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The News Air - Breaking News - US Navy ने भारतीय मलाहों पर किया हमला, 3 मौतें

US Navy ने भारतीय मलाहों पर किया हमला, 3 मौतें

ओमान तट के पास 4 दिनों में 3 व्यापारिक जहाजों पर अमेरिकी हमला, भारत ने अमेरिका के पास दर्ज कराया सख्त विरोध

Ajay Kumar by Ajay Kumar
गुरूवार, 11 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय
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US Navy
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US Navy attacks Indian seafarers: खाड़ी क्षेत्र में एक गंभीर घटनाक्रम सामने आया है जहां अमेरिकी जल सेना ने पिछले चार दिनों में भारतीय चालक दल वाले तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला किया है। भारत सरकार ने गुरुवार को इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि ओमान के तट के पास हुए इन हमलों में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है। यह पहली बार है जब सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया है कि अमेरिकी जल सेना भारतीय क्रू वाले जहाजों को निशाना बना रही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग में इस घटना की जानकारी देते हुए कहा कि भारत ने इस मामले को अमेरिका के पास सख्ती से उठाया है। देखा जाए तो यह घटना भारत-अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर सकती है।

🔍 यह भी पढ़ें- ‘Touska जब्त किया’: US Navy ने Iranian Ship को रोका, Trump का बड़ा ऐलान, Iran ने दी जवाबी कार्रवाई की धमकी

8 जून से शुरू हुआ हमलों का सिलसिला

पहला हमला 8 जून को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर ‘मैरीवैक्स’ (Marivayx) पर किया गया था। इस जहाज पर 24 भारतीय मलाह सवार थे, जिन्हें सौभाग्य से सुरक्षित बचा लिया गया। लेकिन बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी… दो दिन बाद 10 जून को अमेरिकी सेना ने फिर से हमला किया।

इस बार निशाना बना पलाऊ के झंडे वाला एक और तेल जहाज ‘सेटेबेलो’ (MT Settebello)। इस जहाज पर भी 24 भारतीय मलाह सवार थे, लेकिन इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया। हमले में तीन भारतीय मलाहों की दर्दनाक मौत हो गई। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तीसरे जहाज ‘जलवीर’ (Jalveer) पर भी हमला हुआ, जो गिनी-बिसाऊ के झंडे वाला था।

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भारत ने अमेरिकी अधिकारी को किया तलब

बुधवार को हुए घातक हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी दूतावास के कार्यकारी मुखी (डी’अफेयर्स) जेसन मीक्स को तलब किया। विदेश मंत्रालय ने उन्हें एक ‘डीमार्श’ यानी राजनीतिक विरोध पत्र सौंपा। दिलचस्प बात यह है कि भारत ने इस मामले को केवल औपचारिक विरोध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी चिंताओं को बेहद मजबूती से रखा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने गुरुवार की मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हमारे लिए अपने मलाहों की भलाई और सुरक्षा सबसे जरूरी है। जब ‘एमटी सेटेबेलो’ जहाज पर यह हमला हुआ, तो हमने अमेरिकी पक्ष के पास सख्त विरोध दर्ज करवाया।”

भारत की स्पष्ट मांग: हमले बंद हों

जैसवाल ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे हमले “बंद होने चाहिए”। उन्होंने आगे कहा, “हमने यह भी बताया कि टकराव के शांतिपूर्ण हल के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) के रास्ते बिना किसी रुकावट के आने-जाने की सुविधा होनी चाहिए।”

समझने वाली बात यह है कि भारत ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा की मांग की, बल्कि व्यापक समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून की पालना का भी मुद्दा उठाया।

🔍 यह भी पढ़ें- ISRO का LVM3 रॉकेट Launch, Navy को मिली ‘समुद्र की आंख’ CMS-03, देखें LIVE

कौन से जहाज थे निशाने पर

जैसवाल ने स्पष्ट किया, “इन घटनाओं में शामिल तीनों जहाज विदेशी झंडे वाले थे। उनमें से दो पलाऊ के झंडे वाले थे, जबकि तीसरा जहाज गिनी-बिसाऊ (Guinea-Bissau) के झंडे वाला था। ये भारतीय मालिकी वाले जहाज नहीं थे।”

अगर गौर करें तो यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जहाज भले ही विदेशी झंडे वाले थे, लेकिन उन पर काम करने वाले ज्यादातर भारतीय नाविक थे। यही वजह है कि भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड की प्रतिक्रिया

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US Central Command – Centcom) ने सेटेबेलो और मैरीवैक्स पर हुए हमलों की पुष्टि तो की है, लेकिन ‘जलवीर’ पर हुए हमलों की रिपोर्टों पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। यह चुप्पी खुद में कई सवाल खड़े करती है।

मलाहों को निकालने का काम शुरू

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि ‘जलवीर’ पर मौजूद मलाहों को बाहर निकालने का काम शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर, सेटेबेलो से बाकी सभी 25 क्रू मेंबरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

बचाए गए क्रू मेंबरों में 21 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक रूसी और एक यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इससे साफ होता है कि खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले जहाजों पर दक्षिण एशियाई देशों के नाविकों की संख्या काफी अधिक है।

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शहीद परिवारों को मिलेगी आर्थिक सहायता

सरकार ने शहीद हुए तीन भारतीय मलाहों के परिवारों के लिए राहत राशि की घोषणा की है। सीमैन वेलफेयर फंड सोसाइटी को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक शहीद के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। राहत की बात यह है कि सरकार ने तुरंत मानवीय पहलू को देखते हुए परिवारों की मदद करने का फैसला किया।

होर्मुज जलमार्ग की अहमियत

होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से हर दिन लाखों बैरल तेल का परिवहन होता है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।

अगर इस क्षेत्र में नौवहन में कोई रुकावट आती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस जलमार्ग में बिना रुकावट आवागमन की मांग की है।

भारतीय मलाहों की सुरक्षा पर सवाल

यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। भारत दुनिया में सबसे बड़ी संख्या में नाविक आपूर्ति करने वाले देशों में से एक है। हजारों भारतीय नाविक विदेशी जहाजों पर काम करते हैं।

चिंता का विषय यह है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो भारतीय मलाहों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या होगा असर

यह घटना भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंधों के लिए एक परीक्षा की घड़ी है। हालांकि दोनों देश Quad और Indo-Pacific सुरक्षा जैसे मंचों पर मजबूत साझेदार हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा कर सकती हैं।

भारत ने जिस तरह से कूटनीतिक चैनलों के जरिए अपनी बात रखी है, वह दर्शाता है कि नई दिल्ली अपने नागरिकों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। उम्मीद की किरण यह है कि दोनों देश इस मामले को आपसी बातचीत से सुलझाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का पहलू

भारत ने अपने विरोध में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का हवाला दिया है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत व्यापारिक जहाजों पर हमला करना युद्ध अपराध माना जा सकता है, खासकर जब वे तटस्थ हों और किसी सैन्य अभियान में शामिल न हों।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा की मांग की, बल्कि व्यापक समुद्री सुरक्षा नियमों की पालना पर भी जोर दिया है।


मुख्य बातें (Key Points):

• US Navy ने पिछले 4 दिनों में ओमान तट के पास भारतीय मलाहों वाले 3 व्यापारिक जहाजों पर हमला किया

• 10 जून को MT Settebello पर हुए हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई

• भारत ने अमेरिकी दूतावास के कार्यकारी मुखी जेसन मीक्स को तलब कर सख्त विरोध दर्ज कराया

• विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने कहा कि ऐसे हमले “बंद होने चाहिए”

• शहीद परिवारों को सीमैन वेलफेयर फंड से 10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी

• भारत ने होर्मुज जलमार्ग में बिना रुकावट नौवहन की मांग की है

• यह पहली बार है जब सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया कि अमेरिकी सेना भारतीय क्रू वाले जहाजों को निशाना बना रही है


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: US Navy ने भारतीय मलाहों वाले जहाजों पर क्यों हमला किया?

उत्तर: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमलों की पुष्टि तो की है, लेकिन हमले के सटीक कारणों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं को इसका संभावित कारण माना जा रहा है। भारत ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इन्हें तुरंत बंद करने की मांग की है।

प्रश्न 2: किन-किन जहाजों पर हमला हुआ और कितने भारतीयों की मौत हुई?

उत्तर: तीन जहाजों पर हमला हुआ – 8 जून को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर ‘मैरीवैक्स’ (24 भारतीय मलाह, सभी सुरक्षित), 10 जून को पलाऊ के झंडे वाले ‘एमटी सेटेबेलो’ (24 भारतीय मलाह, 3 की मौत), और गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले ‘जलवीर’ पर भी हमला हुआ। कुल मिलाकर 3 भारतीय नाविकों की मौत हुई है।

प्रश्न 3: भारत सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?

उत्तर: भारत ने अमेरिकी दूतावास के कार्यकारी मुखी जेसन मीक्स को तलब कर एक ‘डीमार्श’ (राजनीतिक विरोध पत्र) सौंपा। विदेश मंत्रालय ने सख्त विरोध दर्ज कराते हुए मांग की कि ऐसे हमले बंद हों और होर्मुज जलमार्ग में बिना रुकावट नौवहन सुनिश्चित किया जाए। शहीद परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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