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The News Air - Breaking News - Iran War Bill: $11 Billion खर्च, US Navy ने Hormuz में Ships एस्कॉर्ट करने से किया इनकार

Iran War Bill: $11 Billion खर्च, US Navy ने Hormuz में Ships एस्कॉर्ट करने से किया इनकार

ईरान के खिलाफ जंग के पहले 6 दिनों में ही अमेरिका के 11.3 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं, US Navy ने माना कि Strait of Hormuz में जहाजों को सुरक्षा देना फिलहाल संभव नहीं

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 14 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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Iran War Bill
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Iran War Bill तेजी से बेकाबू होता जा रहा है और अमेरिका पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। पेंटागन (Pentagon) के ताजा अनुमान के मुताबिक, ईरान के खिलाफ जंग के पहले छह दिनों में ही अमेरिका 11.3 बिलियन डॉलर (करीब 96,000 करोड़ रुपये) खर्च कर चुका है। इसी बीच एक और बड़ा झटका यह लगा है कि US Navy ने साफ कह दिया है कि वह Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा (Escort) देने की स्थिति में फिलहाल नहीं है। यह वही डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) हैं जिन्होंने कुछ ही दिन पहले बड़ी-बड़ी बातें कही थीं कि US Navy गल्फ से गुजरने वाले हर टैंकर को एस्कॉर्ट करेगी।

पहले 6 दिन में 11.3 बिलियन डॉलर कैसे खर्च हुए

Iran War Bill का ब्रेकडाउन देखें तो सबसे बड़ा खर्च महंगे प्रसीजन हथियारों पर हुआ है। अमेरिका ने ईरान पर जो मिसाइलें और बम बरसाए हैं, उनकी कीमत अरबों डॉलर में है। शुरुआती दो दिनों में ही 5.6 बिलियन डॉलर सिर्फ हथियारों पर खर्च हो चुके थे। इसमें टॉमहॉक क्रूज मिसाइल (Tomahawk Cruise Missile), प्रसीजन बम, लार्ज गाइडेड बम और एयर टू ग्राउंड मिसाइलें शामिल हैं।

इन हथियारों की कीमत समझें तो एक टॉमहॉक मिसाइल की कीमत 10 से 20 लाख डॉलर होती है। प्रसीजन बम 25,000 से 1 लाख डॉलर तक के होते हैं। एडवांस मिसाइलों की कीमत लाखों डॉलर में जाती है। जब हजारों की संख्या में ये हथियार ईरान पर दागे गए, तो Iran War Bill रातोंरात अरबों डॉलर पार कर गया।

सिर्फ हथियार नहीं, मिलिट्री मशीन चलाने का भी भारी खर्च

Iran War Bill में सिर्फ हथियारों का खर्च शामिल नहीं है। पूरी मिलिट्री मशीन को चलाने का खर्च अलग से है। एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशंस, फाइटर जेट मिशन, रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट, ड्रोन सर्विलांस, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और सैनिकों की तैनाती, ये सब मिलाकर रोजाना करोड़ों डॉलर खर्च हो रहे हैं।

सिर्फ एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को चलाने का एक दिन का खर्च 60 से 80 लाख डॉलर आता है। इसके अलावा ईंधन, स्पेयर पार्ट्स, गोला-बारूद, सैनिकों का भोजन और उपकरण, इन सबकी लगातार सप्लाई देनी पड़ रही है। चूंकि यह युद्ध अमेरिका से हजारों किलोमीटर दूर ईरान में लड़ा जा रहा है, इसलिए लॉजिस्टिक कॉस्ट और भी ज्यादा है।

आज सुबह ही एक और बुरी खबर आई कि अमेरिका का एक रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट इराक (Iraq) में क्रैश हो गया, जो Iran War Bill को और बढ़ाने वाला है।

$2,000 का ड्रोन बनाम $2 Million की मिसाइल: ईरान का सबसे बड़ा फायदा

Iran War Bill में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ईरान और अमेरिका के बीच हथियारों की लागत में जमीन-आसमान का फर्क है। ईरान का शहीद ड्रोन (Shahed Drone) जिसे काफी एडवांस और प्रभावी माना जा रहा है, उसकी कीमत सिर्फ $2,000 (करीब 1.70 लाख रुपये) आती है। दूसरी तरफ अमेरिका की एक टॉमहॉक मिसाइल 10 से 20 लाख डॉलर की है।

यह कॉस्ट इमबैलेंस पेंटागन के लिए सबसे बड़ी स्ट्रैटेजिक चिंता बन गया है। ईरान सस्ते ड्रोन और हथियारों से लगातार हमले कर सकता है, जबकि अमेरिका को हर जवाबी कार्रवाई में अरबों डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर यह युद्ध लंबा खिंचता गया, तो Iran War Bill इतना भारी हो जाएगा कि अमेरिका के लिए इसे सहना मुश्किल हो सकता है।

मिसाइल स्टॉक खत्म होने का खतरा, 50 बिलियन डॉलर की इमरजेंसी फंडिंग की जरूरत

Iran War Bill का एक और डरावना पहलू यह है कि अमेरिका का मिसाइल भंडार तेजी से खत्म हो रहा है। पिछले 5 वर्षों में अमेरिका ने सिर्फ 322 टॉमहॉक मिसाइलें प्रोड्यूस की हैं। ईरान पर इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलें दागी गई हैं कि अब प्रसीजन मिसाइलों की कमी (Shortage) हो सकती है। प्रोडक्शन रेट पहले से ही धीमा चल रहा है और इन मिसाइलों को दोबारा बनाने में महीनों लग सकते हैं।

बताया जा रहा है कि ट्रंप को बहुत जल्द अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) से कम से कम 50 बिलियन डॉलर की इमरजेंसी फंडिंग मांगनी पड़ेगी। यह फंडिंग हथियारों की रिप्लेसमेंट, सैनिकों की तैनाती और लॉजिस्टिक सप्लाई के लिए चाहिए। लेकिन अमेरिका में ही इसको लेकर विरोध हो रहा है कि यह फंडिंग दी जानी चाहिए या नहीं। ट्रंप ने युद्ध तो शुरू कर दिया, लेकिन इसे कैसे सस्टेन किया जाएगा, यह उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है।

US Navy ने Strait of Hormuz में एस्कॉर्ट से क्यों किया इनकार

Iran War Bill बढ़ने के साथ-साथ अमेरिका की सैन्य क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ दिन पहले ट्रंप ने बड़े दावे किए थे कि US Navy Strait of Hormuz से गुजरने वाले हर टैंकर को एस्कॉर्ट करेगी। लेकिन अब US Navy ने शिपिंग इंडस्ट्री को साफ बता दिया है कि यह फिलहाल संभव नहीं है।

दूसरों को सुरक्षा देना तो दूर, अमेरिका के अपने टैंकर पर ही ईरान ने हमला कर दिया। इसके पीछे कई वजहें हैं। पहली, US Navy पहले से ही ईरान पर एयर स्ट्राइक्स, मिसाइल डिफेंस और दूसरे ऑपरेशंस में लगी हुई है। अगर वह अपने संसाधनों को Strait of Hormuz में एस्कॉर्ट मिशन पर लगा दे, तो ईरान के खिलाफ युद्ध में कमजोर पड़ जाएगी।

दूसरी, एस्कॉर्ट मिशन बेहद जटिल प्रक्रिया है। एक बार में 20 से 30 टैंकरों को सुरक्षा देने के लिए डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, एयरक्राफ्ट कैरियर और माइन काउंटर मेजर्स व्हीकल्स की जरूरत पड़ती है, जिसे कॉन्वॉय सिस्टम कहा जाता है। इतने बड़े नेवल फॉर्मेशन को खड़ा करना युद्ध के बीच में लगभग असंभव है।

ईरान की ताकत कम नहीं, अमेरिका की मुश्किलें बढ़ रही हैं

Iran War Bill बढ़ता जा रहा है लेकिन ईरान की सैन्य क्षमता खत्म होती नहीं दिख रही। ईरान के पास कई खतरनाक हथियार हैं जो अमेरिका के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।

ईरान हजारों की संख्या में नेवल माइंस Strait of Hormuz में तैनात कर सकता है। अगर कोई भी जहाज इन माइंस के संपर्क में आया तो वह तबाह हो जाएगा। इन माइंस को साफ करना बेहद खतरनाक और धीमी प्रक्रिया है। IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) के पास तेज गति वाली स्पीड बोट हैं जो स्वॉर्म टैक्टिक्स (एक साथ बड़ी संख्या में हमला) में माहिर हैं। ईरान के पास नूर मिसाइल और कादिर मिसाइल जैसे एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम भी तैनात हैं जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से जहाजों पर हमला कर सकते हैं।

इसी बीच यह विवाद भी गरमाया हुआ है कि क्या ईरान ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक स्पीड बोट एयरक्राफ्ट कैरियर की तरफ आ रहा था। ईरान का दावा है कि उसने कैरियर को हिट किया, जबकि अमेरिका इसे नकार रहा है।

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क्रूड ऑयल $150-200 प्रति बैरल तक जा सकता है, अमेरिका ने रूसी तेल पर दी छूट

Iran War Bill सिर्फ अमेरिका की जेब पर ही नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। क्रूड ऑयल की कीमतें 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत हर देश पर पड़ेगा।

दबाव इतना बढ़ गया है कि अमेरिका ने अपना ही रुख बदल दिया है। जो अमेरिका कुछ दिन पहले तक रूस (Russia) का तेल खरीदने पर सैंक्शन की धमकी दे रहा था, उसी अमेरिका ने आज सभी देशों को इजाजत दे दी कि वे रूस का जो तेल समुद्र में टैंकरों में पड़ा है, उसे अगले 30 दिनों में खरीद सकते हैं। पहले यह छूट सिर्फ भारत को दी गई थी, लेकिन अब सबको दी गई है। इससे साफ जाहिर है कि अमेरिका खुद भी भारी दबाव में है।

इराक और अफगानिस्तान जैसा बन सकता है ईरान का हश्र

Iran War Bill को अमेरिका के पिछले युद्धों से तुलना करें तो तस्वीर और भयावह दिखती है। इराक युद्ध में अमेरिका ने 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए। अफगानिस्तान युद्ध में 2.3 ट्रिलियन डॉलर का खर्च आया। ईरान के खिलाफ युद्ध के पहले छह दिनों में ही 11.3 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं और यह रफ्तार लगातार बढ़ रही है।

ईरान ने पिछले 15-20 सालों से इसी दिन के लिए खुद को तैयार किया है। उसने अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज बना रखी हैं जिन्हें तबाह करना बेहद मुश्किल है। ईरान की रणनीति यही है कि इस युद्ध को जितना हो सके लंबा खींचा जाए, क्योंकि जितना युद्ध लंबा होगा, Iran War Bill उतना भारी होगा और अमेरिका पर आर्थिक दबाव उतना ज्यादा बढ़ेगा। अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप इस बढ़ते बोझ को सह पाएंगे, या फिर अमेरिका को एक और इराक-अफगानिस्तान जैसे महंगे और अधूरे युद्ध का सामना करना पड़ेगा।


मुख्य बातें (Key Points)
  • Iran War Bill के तहत पहले 6 दिनों में $11.3 बिलियन खर्च हो चुके हैं, पेंटागन का अनुमान।
  • US Navy ने माना कि Strait of Hormuz में जहाजों को एस्कॉर्ट करना फिलहाल संभव नहीं है।
  • ईरान का शहीद ड्रोन $2,000 का, अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल $1-2 मिलियन की: भारी कॉस्ट इमबैलेंस।
  • ट्रंप को कांग्रेस से कम से कम $50 बिलियन की इमरजेंसी फंडिंग मांगनी पड़ेगी।
  • दबाव में अमेरिका ने सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे दी।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: Iran War में अमेरिका ने अब तक कितना खर्च किया है?

पेंटागन के अनुमान के मुताबिक, ईरान युद्ध के पहले 6 दिनों में अमेरिका ने $11.3 बिलियन (करीब 96,000 करोड़ रुपये) खर्च कर दिए हैं, जिसमें प्रसीजन मिसाइलें, बम, नेवल ऑपरेशंस और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

Q2: US Navy Strait of Hormuz में जहाजों को एस्कॉर्ट क्यों नहीं कर पा रही?

US Navy पहले से ईरान पर एयर स्ट्राइक्स और मिसाइल डिफेंस में व्यस्त है। Strait of Hormuz में एस्कॉर्ट मिशन के लिए बड़ी संख्या में डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और एयरक्राफ्ट कैरियर चाहिए, जो अभी युद्ध में लगे हुए हैं।

Q3: Iran War का क्रूड ऑयल और भारत पर क्या असर पड़ रहा है?

Strait of Hormuz के ब्लॉक होने से क्रूड ऑयल $150-200 प्रति बैरल तक जा सकता है। इसका सीधा असर भारत में तेल, गैस और LPG की कीमतों पर पड़ रहा है। दबाव में अमेरिका ने भारत समेत सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति भी दे दी है।

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