Pakistan Visa Pilgrimage Guru Arjan Dev : श्री गुरु अरजन देव जी का शहीदी दिवस मनाने के लिए पाकिस्तान जाने वाले श्रद्धालुओं में से कुल 78 श्रद्धालु केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुमति नहीं मिलने के कारण यात्रा नहीं कर पाए। इनमें 67 यात्री हरियाणा से और 11 यात्री पंजाब से थे। देखा जाए तो यह एक बड़ी प्रशासनिक गड़बड़ी का मामला बन गया है।
दिलचस्प बात यह है कि कुल 518 यात्री पाकिस्तान जाने में सफल रहे। पाकिस्तान दूतावास ने 700 से अधिक भारतीय यात्रियों को वीजा जारी किए थे, जिनमें से 541 शिरोमणि कमेटी से संबंधित थे। लेकिन अंतिम समय में केंद्रीय गृह मंत्रालय की क्लीयरेंस नहीं मिलने से 78 श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ा।
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अटारी बॉर्डर पर पूरा दिन इंतजार, फिर निराशा
हरियाणा के यात्रियों ने आरोप लगाया कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGPC) के कुछ नेताओं की लापरवाही के कारण हरियाणा के यात्री पाकिस्तान जाने से वंचित रह गए। इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें हरियाणा से सिख नेता हरकेश सिंह ने स्थिति के बारे में जानकारी दी।
समझने वाली बात यह है कि श्रद्धालु सुबह से ही अटारी बॉर्डर पर पहुंच गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि किसी भी समय अनुमति आ जाएगी, लेकिन देर शाम तक जब कोई सूचना नहीं आई तो उन्हें रात 8 बजे के बाद खाली हाथ अपने घरों को लौटना पड़ा।
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हरियाणा सरकार की नोटिफिकेशन देरी पर सवाल
हरकेश सिंह ने आरोप लगाया कि इस मामले में हरियाणा सरकार ने नोटिफिकेशन ही देर से जारी किया था। उन्होंने कहा कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नेताओं ने भी कोई विशेष प्रयास नहीं किए, जिसके परिणामस्वरूप हरियाणा के यात्री पाकिस्तान जाने से वंचित रह गए।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि शिरोमणि कमेटी और दिल्ली कमेटी से संबंधित सभी यात्री सफलतापूर्वक पाकिस्तान चले गए, लेकिन केवल हरियाणा कमेटी से जुड़े यात्री ही रुक गए। यह सवाल खड़े करता है कि आखिर प्रशासनिक समन्वय में कहां चूक हुई।
रणजीत सिंह का दर्द: सुबह से शाम तक इंतजार
सिख श्रद्धालु रणजीत सिंह ने बताया कि वे सुबह पाकिस्तान जाने के लिए अटारी बॉर्डर पर पहुंचे थे, लेकिन यहां इमिग्रेशन विभाग ने उन्हें भारत सरकार से अनुमति नहीं होने के कारण जाने से रोक दिया। देर शाम तक अनुमति मिलने की आस में वे बॉर्डर पर बैठे रहे और बाद में निराश होकर वापस घरों को लौटे।
अगर गौर करें तो ये श्रद्धालु अपने गुरु के शहीदी दिवस पर दरबार साहिब, लाहौर जाना चाहते थे। यह उनके लिए एक धार्मिक आस्था का मामला था, न कि केवल सैर-सपाटे का।
प्रशासनिक विफलता या जानबूझकर?
सवाल उठ रहा है कि जब पाकिस्तान दूतावास ने पहले ही वीजा जारी कर दिए थे, तो केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति अंतिम समय तक क्यों लंबित रही? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी या कोई सुरक्षा संबंधी चिंता?
दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा सरकार और HSGPC के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। हरकेश सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं के निजी मतभेदों के कारण शिरोमणि कमेटी बंटी हुई है और मीरी पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट भी बंद पड़ा है।
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भारत-पाकिस्तान धार्मिक यात्रा समझौता
भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौता है जिसके तहत दोनों देशों के श्रद्धालु महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर एक-दूसरे के देश में गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकते हैं।
समझने वाली बात यह है कि हर साल गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व, बैसाखी और अन्य सिख त्योहारों पर भारतीय श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में ननकाना साहिब, करतारपुर साहिब और अन्य पवित्र स्थलों पर जाने की अनुमति दी जाती है।
हालांकि, सुरक्षा कारणों से केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी जरूरी होती है। कभी-कभी राजनीतिक तनाव या सुरक्षा खतरों के कारण यह अनुमति रोक दी जाती है।
श्रद्धालुओं की भावनाओं का सवाल
रणजीत सिंह और अन्य श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें कई बार भरोसा दिलाया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुमति आ रही है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उन्हें अत्यधिक शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ये श्रद्धालु अपनी जेब से खर्च करके, परिवार से छुट्टी लेकर और बड़ी उम्मीदों के साथ आए थे। उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किसी भी रूप में उचित नहीं कहा जा सकता।
मुख्य बातें (Key Points)
- 78 श्रद्धालु केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति न मिलने से पाकिस्तान नहीं जा सके
- इनमें 67 हरियाणा और 11 पंजाब से थे
- कुल 518 यात्री सफलतापूर्वक पाकिस्तान गए
- HSGPC नेताओं की लापरवाही और हरियाणा सरकार की देर से नोटिफिकेशन के आरोप
- श्रद्धालुओं को अटारी बॉर्डर पर पूरा दिन इंतजार के बाद निराश होकर लौटना पड़ा












