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The News Air - Breaking News - Seat Belt Importance: AIIMS की रिपोर्ट में खुलासा, 69% कार यात्रियों के लिए चेतावनी

Seat Belt Importance: AIIMS की रिपोर्ट में खुलासा, 69% कार यात्रियों के लिए चेतावनी

सड़क दुर्घटनाओं में घायलों में सीट-बेल्ट न लगाने की आदत तेजी से बढ़ी, ड्राइवरों में 19% से 40% हुई वृद्धि, जानें AIIMS ट्रॉमा सेंटर के चौंकाने वाले आंकड़े

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
बुधवार, 10 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, काम की बातें
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Seat Belt
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Seat Belt Importance AIIMS Report ने देश में सड़क सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। सड़क दुर्घटनाओं में घायल कार सवारों में सीट-बेल्ट न लगाने की आदत तेजी से बढ़ रही है। AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के आंकड़ों ने इस बात की चिंताजनक रिपोर्ट पेश की है। देखा जाए तो यह आंकड़े सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों की लापरवाही को दर्शाते हैं।

साल 2025-26 में ट्रॉमा सेंटर में इलाज कराने गए 69% कार यात्रियों ने दुर्घटना के समय सीट-बेल्ट नहीं लगाया था। यह आंकड़ा पिछले साल 2024-25 के 46% की तुलना में काफी ज्यादा है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एक ही साल में यह संख्या 23 प्रतिशत अंक बढ़ गई है, जो बेहद चिंताजनक है।

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ड्राइवरों की स्थिति और भी खराब

ड्राइवरों की स्थिति और भी खराब हो गई है। सीट-बेल्ट न लगाने वाले ड्राइवरों का प्रतिशत 19% से बढ़कर 40% हो गया है। यानी यह आंकड़ा एक साल में दोगुना से भी ज्यादा हो गया है। अगर गौर करें तो यह बताता है कि जो लोग वाहन चला रहे हैं, वही सबसे ज्यादा लापरवाह हो रहे हैं।

वर्ग2024-25 में सीट-बेल्ट नहीं लगाने वाले2025-26 में सीट-बेल्ट नहीं लगाने वालेवृद्धि
कार यात्री46%69%+23%
ड्राइवर19%40%+21% (दोगुना से अधिक)
AIIMS डॉक्टर की चेतावनी

Times of India की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रॉमा सेंटर के चीफ डॉक्टर कामरान फारूकी ने कहा, “कार में सीट-बेल्ट सबसे ज्यादा प्रभावी सुरक्षा उपकरण है। दुर्घटना के समय बिना सीट-बेल्ट वाले व्यक्ति को डैशबोर्ड, खिड़कियों से टकराने या गाड़ी से बाहर फेंके जाने का खतरा रहता है। जिससे सिर, छाती और रीढ़ की गंभीर चोटें लग सकती हैं।”

दिलचस्प बात यह है कि खासकर पिछली सीट पर बैठने वाले यात्रियों में सीट-बेल्ट लगाने की प्रवृत्ति कम है। लेकिन खतरा उनके लिए भी उतना ही है। चिंता का विषय यह है कि लोग यह समझते हैं कि पीछे बैठने से वे सुरक्षित हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

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दुर्घटनाओं के अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े

2025-26 में AIIMS के ट्रॉमा सेंटर में कुल 19,472 सड़क दुर्घटना के मामले दर्ज किए गए। पिछले साल यह संख्या 18,637 थी। समझने वाली बात यह है कि दुर्घटनाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

दुर्घटनाग्रस्त वाहनों का विवरण:

  • 77% दो पहिया वाहन चालक
  • 17% पैदल यात्री
  • 6% कार सवार

यहां ध्यान देने वाली बात है कि हालांकि दो पहिया वाहनों में दुर्घटनाएं सबसे अधिक हैं, लेकिन कार यात्रियों में सीट-बेल्ट न लगाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ना अधिक चिंताजनक है।

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सबसे ज्यादा प्रभावित युवा वर्ग

दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला वर्ग युवा है:

  • 21 से 30 साल के 35%
  • 31 से 40 साल के 23%

यानी कुल मरीजों में लगभग 58-60% यानी 40 साल से कम उम्र के थे। राहत की बात यह नहीं है, बल्कि चिंता की बात है कि देश का युवा वर्ग सबसे ज्यादा दुर्घटनाग्रस्त हो रहा है।

अस्पताल में भर्ती और गंभीरता
  • 20% मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा (पिछले साल 16%)
  • भर्ती मरीजों में 27% को ICU की जरूरत पड़ी
  • 23% का ऑपरेशन हुआ
सबसे आम चोटें
चोट का प्रकारप्रतिशत
हड्डी और रीढ़ की चोटें45%
न्यूरोट्रॉमा (सिर की चोटें)27%
अन्य (छाती, पेट, रक्त वाहिकाएं)28%

अगर गौर करें तो सबसे आम चोटें हड्डी और रीढ़ से संबंधित हैं, जो जीवन भर की अपंगता का कारण बन सकती हैं।

कहां से आते हैं मरीज?

बता दें कि ट्रॉमा सेंटर को दिल्ली के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज रेफर किए जा रहे हैं:

  • 35% दिल्ली से
  • 35% उत्तर प्रदेश से
  • 27% हरियाणा से
सीट-बेल्ट कैसे बचाती है जान?

Seat Belt Importance को समझना बेहद जरूरी है:

1. गति में अचानक रुकावट: दुर्घटना में गाड़ी अचानक रुकती है, लेकिन शरीर गति में रहता है। सीट-बेल्ट शरीर को सीट से बांधे रखती है।

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2. डैशबोर्ड/विंडशील्ड से टकराव रोके: बिना बेल्ट के यात्री आगे की ओर उछल कर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।

3. गाड़ी से बाहर फेंके जाने से बचाव: तेज दुर्घटना में बिना बेल्ट वाले यात्री गाड़ी से बाहर फेंके जा सकते हैं।

4. चोट की गंभीरता कम करे: सीट-बेल्ट शरीर पर प्रभाव को वितरित करती है, जिससे चोट कम गंभीर होती है।

क्या करें?
  • हमेशा सीट-बेल्ट लगाएं, चाहे आगे बैठें या पीछे
  • बच्चों के लिए चाइल्ड सेफ्टी सीट का इस्तेमाल करें
  • छोटी दूरी पर भी बेल्ट अनिवार्य
  • सभी यात्रियों को बेल्ट लगाने के लिए कहें
  • यातायात नियमों का पालन करें

मुख्य बातें (Key Points)

  • AIIMS ट्रॉमा सेंटर में 69% कार यात्रियों ने सीट-बेल्ट नहीं लगाया था
  • पिछले साल यह आंकड़ा 46% था, एक साल में 23% की वृद्धि
  • ड्राइवरों में यह संख्या 19% से बढ़कर 40% हुई (दोगुना)
  • 2025-26 में कुल 19,472 सड़क दुर्घटना मामले दर्ज
  • 58-60% मरीज 40 साल से कम उम्र के युवा
  • 20% मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा
  • 45% हड्डी और रीढ़ की चोटें सबसे आम

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: AIIMS की रिपोर्ट में सीट-बेल्ट के बारे में क्या कहा गया?

उत्तर: 2025-26 में 69% कार यात्रियों ने दुर्घटना के समय सीट-बेल्ट नहीं लगाया था, जो पिछले साल के 46% से बहुत अधिक है।

प्रश्न 2: ड्राइवरों में सीट-बेल्ट न लगाने की प्रवृत्ति कितनी बढ़ी?

उत्तर: ड्राइवरों में यह संख्या 19% से बढ़कर 40% हो गई है, यानी एक साल में दोगुना से भी अधिक।

प्रश्न 3: सीट-बेल्ट क्यों जरूरी है?

उत्तर: सीट-बेल्ट दुर्घटना में डैशबोर्ड से टकराव, गाड़ी से बाहर फेंके जाने और सिर, छाती, रीढ़ की गंभीर चोटों से बचाती है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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