Sushmita Dev Resigns : टीएमसी की वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया। दिल्ली में हुए इस घटनाक्रम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर एक नए सांसद के रूप में सदन में वापसी कर सकती हैं।
देखा जाए तो यह फैसला अचानक नहीं आया। उन्होंने सीनियर टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर रॉय के नक्शे-कदम पर चलते हुए यह कदम उठाया, जिन्होंने ऊपरी सदन में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत की अगुवाई की थी। और बस यहीं से शुरू हुई पार्टी के भीतर असली उठापटक की कहानी।
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कांग्रेस से टीएमसी और अब नया मोड़
सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर भी कम दिलचस्प नहीं रहा। वे पहले कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं और उसके बाद टीएमसी में शामिल हुई थीं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उन्होंने पहले कांग्रेस की टिकट पर असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। यानी उनका अनुभव सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर की राजनीति में भी गहरी पकड़ रखता है।
टीएमसी में अंदरूनी टूट-फूट
दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ एक नेता के जाने की बात नहीं है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस इस वक्त एक बड़ी अंदरूनी टूट-भूट का सामना कर रही है।
खबरों के मुताबिक, पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने भी इस्तीफा देने और एनडीए का हिस्सा बनने का दावा किया है। समझने वाली बात यह है कि जब इतनी बड़ी संख्या में सांसद एक साथ नाराजगी जाहिर करें, तो यह किसी भी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
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राज्यसभा का गणित और दल-बदल कानून
अब सवाल उठता है कि राज्यसभा में आगे क्या होगा? यहां भी कुछ वैसी ही कहानी सामने आ सकती है।
राज्यसभा में टीएमसी के 13 सांसद हैं। दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के मुताबिक, बागी गुट बनाने के लिए कम से कम नौ (दो-तिहाई) सदस्यों की जरूरत पड़ती है। यानी आंकड़ों का यह खेल ही तय करेगा कि बगावत कानूनी तौर पर टिक पाती है या नहीं।
| राज्यसभा में टीएमसी | संख्या |
|---|---|
| कुल टीएमसी सांसद | 13 |
| बागी गुट के लिए जरूरी (दो-तिहाई) | 9 |
और कौन-कौन BJP के संपर्क में
इस पूरे मामले में एक और परत है। सार्वजनिक तौर पर बोलने वालों के अलावा टीएमसी के कई और सांसद भी भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
इनमें यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा के नाम भी शामिल हैं। इससे साफ होता है कि पार्टी के भीतर असंतोष की लहर सिर्फ ऊपरी सतह पर नहीं, बल्कि कहीं ज्यादा गहरी है।
पंजाब से जुड़ा कनेक्शन
वहीं एक और पहलू इस खबर को बड़ा बना देता है। भाजपा द्वारा राज्यसभा सदस्यों को पार्टी में शामिल कराने को लेकर एक बड़ी रणनीति अपनाई जा रही है।
इससे पहले पंजाब से आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ भाजपा का दामन थामा था। उस घटना की देश भर में बड़ी चर्चा रही थी। यानी यह कोई इकलौती घटना नहीं, बल्कि एक बड़े पैटर्न का हिस्सा नजर आती है।
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आम जनता पर असर
इस सियासी उठापटक का सीधा असर बंगाल और पूर्वोत्तर की जनता पर पड़ सकता है। जब सांसद पाला बदलते हैं, तो जनता द्वारा दिया गया जनादेश और क्षेत्र के विकास से जुड़े फैसले भी प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि आम लोग इस पूरे घटनाक्रम पर नजर गड़ाए हुए हैं।
जानें पूरा मामला
टीएमसी इस समय अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। पहले सुखेंदु शेखर रॉय की बगावत और अब सुष्मिता देव का इस्तीफा: इन दोनों घटनाओं ने पार्टी की अंदरूनी कलह को सबके सामने ला दिया है। राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी बड़ी संख्या में सांसदों के नाराज होने की खबरें पार्टी की पकड़ कमजोर होने की ओर इशारा कर रही हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- टीएमसी नेता सुष्मिता देव ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया, BJP में जाने की अटकलें।
- सुखेंदु शेखर रॉय की बगावत के बाद यह पार्टी को एक हफ्ते में दूसरा झटका।
- राज्यसभा में टीएमसी के 13 सांसद; बागी गुट के लिए 9 (दो-तिहाई) जरूरी।
- 20 लोकसभा सांसदों ने भी एनडीए में जाने का दावा किया; यूसुफ पठान, शत्रुघ्न सिन्हा भी BJP के संपर्क में।













