Naina Devi Temple Fire : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मंगलवार की रात एक बड़ा हादसा टल गया। नगरोटा बगवां सब-डिवीजन के पटियालकर (धलूण) इलाके में स्थित नैना देवी मंदिर को जंगल की भीषण आग ने चारों तरफ से घेर लिया था। इसी बीच चलाए गए एक बड़े बचाव अभियान में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत करीब 350 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
देखा जाए तो हालात बेहद डरावने थे। ये सभी श्रद्धालु पहाड़ी की चोटी पर बने मंदिर में भंडारे और जागरण के लिए जुटे थे, तभी आसपास के जंगलों में आग भड़क उठी। दिन में लगी यह आग शाम होते-होते भयानक रूप ले चुकी थी।
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एक ही रास्ता, वो भी आग की चपेट में
अब समझने वाली बात यह है कि यह मंदिर घने जंगलों के बीच बसा है। यहां पहुंचने का इकलौता रास्ता भी जंगल के बीच से ही गुजरता है।
अधिकारियों के मुताबिक, सड़क के दोनों ओर करीब तीन किलोमीटर तक भीषण आग धधक रही थी। और बस यहीं से मुश्किल बढ़ गई: बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और सैकड़ों श्रद्धालु वहीं फंसकर रह गए।
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पांच घंटे की जद्दोजहद और ‘सुरक्षित कॉरिडोर’
नगरोटा बगवां के एसडीएम मुनीश कुमार शर्मा ने बताया कि आग बुझाने का काम शाम करीब 4 बजे शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता बाहर निकलने के लिए एक सुरक्षित रास्ता (कॉरिडोर) बनाना थी।
फायर ब्रिगेड की टीमों ने सड़क किनारे लगी आग बुझाने पर पूरा ध्यान लगाया, ताकि वाहन मंदिर तक पहुंच सकें। शर्मा ने आगे बताया कि सड़क किनारे की आग पर काबू पाने में करीब पांच घंटे लग गए। राहत की बात यह रही कि रात करीब 9 बजे तक रास्ता काफी हद तक सुरक्षित कर लिया गया।
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एक नजर में रेस्क्यू टाइमलाइन
| समय | घटनाक्रम |
|---|---|
| शाम करीब 4 बजे | आग बुझाने का काम शुरू |
| रात करीब 9 बजे | बचाव रास्ता काफी हद तक सुरक्षित |
| रात 9:10 बजे | बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों को निकालना शुरू |
| रात 10:45 बजे | सभी श्रद्धालु सुरक्षित घर पहुंचे |
वहीं कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अशोक रतन ने बताया कि सूचना मिलते ही आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई थीं। उनके मुताबिक, सभी एजेंसियों ने आपसी तालमेल से काम किया और बचाव रास्ते की आग पर काबू पाने में सफलता हासिल की।
विधायक भी रहे सीधे संपर्क में
इस पूरे संकट में स्थानीय नेतृत्व भी सक्रिय रहा। नगरोटा बगवां के विधायक आर.एस. बाली ने कहा कि मंदिर के आसपास आग तेज होने के बाद चिंताजनक स्थिति बन गई थी।
उन्होंने बताया कि वे डिप्टी कमिश्नर, एसडीएम और दूसरे अधिकारियों के लगातार संपर्क में रहे और फंसे हुए लोगों से भी सीधा राबता बनाए रखा। इससे साफ होता है कि तालमेल और तेज फैसलों ने ही इस बड़ी त्रासदी को टाल दिया।
हिमाचल में क्यों बढ़ रहीं आग की घटनाएं
अब सवाल उठता है कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं? इसकी जड़ में है हिमाचल में चल रही भीषण लू (heatwave)।
जंगलात विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार तक राज्य के 11 जंगलात सर्कलों में जंगल की आग की कुल 412 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 276 थी। इस आग ने 4,796 हेक्टेयर से ज्यादा जंगली जमीन को प्रभावित किया है।
| जंगल की आग | इस साल (मंगलवार तक) | पिछले साल (समान अवधि) |
|---|---|---|
| कुल घटनाएं | 412 | 276 |
| प्रभावित क्षेत्र | 4,796 हेक्टेयर+ | : |
चीड़ के जंगल और बढ़ता खतरा
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस खतरे की एक खास वजह भी है। जंगलात अधिकारियों का कहना है कि इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बहुत ज्यादा गर्मी, सूखी वनस्पति और चीड़ के जंगल (chir pine forests) हैं।
ये चीड़ के जंगल बेहद जल्दी आग पकड़ते हैं और निचली पहाड़ियों के बड़े हिस्से में फैले हुए हैं। यानी जैसे-जैसे तापमान चढ़ता है और सूखे के हालात लंबे खिंचते हैं, यह खतरा और बढ़ता चला जाता है।
आम लोगों पर असर
इस तरह की घटनाएं सीधे आम लोगों की जान, उनके घरों और रोजी-रोटी से जुड़ी हैं। जंगल जलने का मतलब है पर्यावरण को नुकसान, पशुओं के लिए खतरा और गांवों तक आग पहुंचने का डर। यही वजह है कि गर्मी के मौसम में पहाड़ी इलाकों में सतर्कता बेहद जरूरी हो जाती है।
जानें पूरा मामला
हिमाचल प्रदेश में इस गर्मी के मौसम में जंगल की आग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। बढ़ता तापमान, लंबे समय तक सूखे के हालात और जल्दी आग पकड़ने वाले चीड़ के जंगल मिलकर इस संकट को और गहरा कर रहे हैं। नैना देवी मंदिर का यह मामला बताता है कि समय रहते उठाया गया कदम कैसे सैकड़ों जिंदगियां बचा सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- कांगड़ा के नैना देवी मंदिर को जंगल की आग ने घेरा, करीब 350 श्रद्धालु फंसे।
- पांच घंटे के रेस्क्यू के बाद रात 10:45 बजे तक सभी सुरक्षित निकाले गए।
- SDM, SP और स्थानीय विधायक के तालमेल से बना ‘सुरक्षित कॉरिडोर’।
- हिमाचल में इस साल 412 आग की घटनाएं (पिछले साल 276), 4,796 हेक्टेयर+ प्रभावित।













