IMD Heavy Rainfall Alert July 2026: देश के कई हिस्सों में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और अगले चार दिनों में भारी से अति भारी बारिश का खतरा मंडरा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार 25 जुलाई 2026 को दोपहर 1:10 बजे एक अहम प्रेस विज्ञप्ति जारी की है, जिसमें ओडिशा और गुजरात के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है।
देखा जाए तो यह चेतावनी सामान्य नहीं है। IMD के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से ओडिशा में 25 से 28 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। विशेष रूप से 25 और 26 जुलाई को कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी वर्षा (204.4 मिमी से अधिक) हो सकती है।
दूसरी ओर, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण गुजरात राज्य में 25 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। अगर गौर करें तो पिछले 24 घंटों में गुजरात के कुछ इलाकों में असाधारण रूप से भारी बारिश (30 सेमी से अधिक) पहले ही दर्ज की जा चुकी है।
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पिछले 24 घंटों में कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश?
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत कार्यरत IMD की रिपोर्ट के अनुसार, आज सुबह 8:30 बजे तक के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
| राज्य/क्षेत्र | स्थान | वर्षा (सेमी) |
|---|---|---|
| गुजरात क्षेत्र | सांतलपुर (पाटन) | 39 |
| सौराष्ट्र और कच्छ | थानगढ़ (सुरेंद्रनगर) | 18 |
| मध्य महाराष्ट्र | सुरगाणा (नासिक) | 12 |
| झारखंड | सिमडेगा | 12 |
| कोंकण और गोवा | माथेरान (रायगढ़) | 11 |
| ओडिशा | सुंदरगढ़ | 10 |
दिलचस्प बात यह है कि गुजरात के सांतलपुर में एक ही दिन में 39 सेमी बारिश हुई, जो असाधारण है। यह मात्रा सामान्य मासिक औसत से कई गुना अधिक है।
मौसम प्रणालियां: क्या है असली कारण?
IMD के मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि इस भारी बारिश के पीछे कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं:
कम दबाव के दो क्षेत्र:
- पहला कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण-पूर्व राजस्थान से पश्चिम की ओर बढ़कर अब दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के इलाकों में स्थित है।
- दूसरा कम दबाव का क्षेत्र उत्तरी गंगीय पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव में बना और अब उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल तट पर केंद्रित है। यह अगले 2-3 दिनों में इसी क्षेत्र में घूमता रहेगा और अधिक स्पष्ट हो सकता है।
मानसून ट्रफ सक्रिय: मानसून का गर्त (ट्रफ) अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण में है और निचले वायुमंडलीय स्तर पर सक्रिय है।
पूर्व-पश्चिम शीयर जोन: उपरोक्त दो कम दबाव क्षेत्रों से जुड़े चक्रवाती परिसंचरण के साथ एक पूर्व-पश्चिम शीयर जोन लगभग 24°N अक्षांश के साथ मध्य भारत में निचले और मध्य वायुमंडलीय स्तरों पर चल रहा है।
पश्चिमी विक्षोभ: मध्य और ऊपरी वायुमंडलीय पश्चिमी हवाओं में एक गर्त के रूप में पश्चिमी विक्षोभ भी मौजूद है।
समझने वाली बात यह है कि जब इतनी सारी मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय होती हैं, तो भारी से अति भारी बारिश की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
राज्यवार मौसम पूर्वानुमान: किन इलाकों को रहना होगा अलर्ट?
उत्तर-पश्चिम भारत:
हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और उत्तराखंड में 25 से 31 जुलाई तक व्यापक बारिश की संभावना है। पंजाब में 25 जुलाई और 28-31 जुलाई के बीच अच्छी बारिश होगी। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 28-31 जुलाई के दौरान बारिश का दौर रहेगा।
भारी बारिश की चेतावनी:
- हिमाचल प्रदेश: 28-30 जुलाई को अति भारी बारिश संभव
- उत्तराखंड: 27-29 जुलाई को अति भारी बारिश
- पंजाब और हरियाणा: 28-29 जुलाई को अति भारी बारिश
- पूर्वी उत्तर प्रदेश: 27-28 जुलाई को अति भारी बारिश
पूर्वी भारत:
यहां सबसे गंभीर स्थिति है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में 25-31 जुलाई तक व्यापक बारिश रहेगी।
विशेष चेतावनी – ओडिशा:
- 25 और 26 जुलाई को कई स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश
- अलग-अलग जगहों पर अत्यधिक भारी वर्षा (204.4 मिमी से अधिक)
- 27-28 जुलाई को भी अति भारी बारिश जारी रहेगी
झारखंड में 25-28 जुलाई तक भारी बारिश रहेगी, जबकि गंगीय पश्चिम बंगाल में 25 जुलाई को अति भारी बारिश हो सकती है।
पश्चिम भारत:
कोंकण और गोवा में 25-31 जुलाई तक व्यापक बारिश रहेगी। 25-26 जुलाई को अति भारी बारिश संभव है।
गुजरात क्षेत्र और सौराष्ट्र-कच्छ में विशेष सावधानी:
- 25 जुलाई को गुजरात राज्य में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश
- मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में 25-26 जुलाई को अत्यधिक भारी वर्षा संभव
मध्य भारत:
छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में 25-31 जुलाई तक व्यापक बारिश रहेगी। छत्तीसगढ़ में 26-27 जुलाई को अति भारी बारिश हो सकती है।
पूर्वोत्तर भारत:
नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 25-31 जुलाई तक व्यापक बारिश का अनुमान है। असम और मेघालय में 30-31 जुलाई को अति भारी बारिश संभव है।
दक्षिण भारत:
तटीय कर्नाटक और केरल-माहे में 25-31 जुलाई तक व्यापक बारिश रहेगी। तटीय आंध्र प्रदेश में 27-29 जुलाई के दौरान आंधी-तूफान (50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से 70 किमी/घंटा तक तेज हवाएं) की चेतावनी जारी की गई है।
दिल्ली-NCR का मौसम: अगले 4 दिनों का हाल
राजधानी दिल्ली और NCR क्षेत्र के लिए भी IMD ने विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है:
25 जुलाई 2026 (शुक्रवार):
- आम तौर पर बादल छाए रहेंगे
- दोपहर में हल्की बारिश की संभावना, हवा की गति 20-30 किमी/घंटा
- अधिकतम तापमान: 33-35°C
- हवा दक्षिण-पूर्व दिशा से 20 किमी/घंटा तक
26 जुलाई 2026 (शनिवार):
- बादल छाए रहेंगे, हल्की बारिश संभव
- न्यूनतम तापमान: 24-26°C
- अधिकतम तापमान: 33-35°C
- न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे रहेगा
27 जुलाई 2026 (रविवार):
- हल्की बारिश, दिन और रात दोनों समय
- अधिकतम तापमान: 34-36°C
- न्यूनतम तापमान: 25-27°C
28 जुलाई 2026 (सोमवार):
- सुबह से दोपहर तक हल्की से मध्यम बारिश
- शाम/रात में फिर से बारिश
- अधिकतम तापमान: 33-35°C
- न्यूनतम तापमान: 23-25°C
मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी: समुद्र में न जाएं
IMD ने मछुआरों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि समुद्री परिस्थितियां बेहद खतरनाक होने वाली हैं।
अरब सागर में:
- सोमालिया और ओमान तट के साथ 25-30 जुलाई तक खतरनाक स्थिति
- गुजरात और महाराष्ट्र तट के साथ 25-27 जुलाई तक उच्च लहरें
- लहरों की ऊंचाई 6-14 मीटर तक हो सकती है
बंगाल की खाड़ी में:
- ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट के साथ 25-28 जुलाई तक न जाएं
- उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट पर 26-28 जुलाई तक खतरनाक
- अंडमान सागर में 26-28 जुलाई तक जोखिम भरा
- मध्य बंगाल की खाड़ी में 25-30 जुलाई तक अत्यधिक खतरनाक
संभावित प्रभाव और सुझाए गए कदम
अत्यधिक भारी बारिश से क्या हो सकता है:
- सड़कों पर स्थानीय बाढ़, निचले इलाकों में जलभराव
- अंडरपास बंद हो सकते हैं
- भारी बारिश के कारण दृश्यता में कमी
- शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक बाधित, यात्रा समय बढ़ेगा
- कच्ची सड़कों को मामूली नुकसान
- कमजोर संरचनाओं को क्षति की संभावना
- स्थानीय भूस्खलन/मिट्टी धंसना संभव
- बागवानी और खड़ी फसलों को पानी भराव से नुकसान
- नदियों में बाढ़ की संभावना
क्या करें, क्या न करें:
✓ अपने रास्ते पर ट्रैफिक की जानकारी लें
✓ ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें
✓ जलभराव वाले क्षेत्रों से बचें
✓ कमजोर इमारतों में न रहें
✓ आवश्यक सामान और दवाएं घर पर रखें
✗ अनावश्यक यात्रा न करें
✗ बाढ़ग्रस्त सड़कों से गाड़ी न चलाएं
किसानों के लिए कृषि सलाह
गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ: धान, कपास, बाजरा, मक्का, मूंगफली और सब्जी के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें। लंबे समय तक जलभराव से बचाएं। खेती के सभी कार्य स्थगित करें।
कोंकण: पहले से रोपी गई धान की रोपाई, हल्दी, मूंगफली, मडुआ, सब्जियों और बागों से अतिरिक्त पानी निकालें। निचले इलाकों से पानी निकालने के लिए उचित जल निकासी बनाए रखें।
मध्य महाराष्ट्र (घाट क्षेत्र): धान नर्सरी, अन्य खड़ी फसलों और सब्जियों से अतिरिक्त पानी निकालें। सिंचाई, उर्वरक और पौध संरक्षण कार्य स्थगित करें।
ओडिशा: धान, मक्का, दलहन, तिलहन और सब्जी के खेतों में उचित जल निकासी बनाए रखें। खेत की नालियों को साफ रखें। सभी खेती कार्य उपयुक्त परिस्थितियों तक स्थगित करें।
पश्चिम बंगाल: धान नर्सरी और अन्य फसलों में जलभराव से बचाव के लिए उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। नर्सरी के चारों ओर मेड़ मजबूत करें। जहां संभव हो, चाय की परिपक्व पत्तियों और सब्जियों की कटाई करें।
झारखंड: खड़ी फसलों में जलभराव से बचाव के लिए उचित जल निकासी सुनिश्चित करें।
पशुधन/मुर्गी पालन/मत्स्य पालन:
- भारी बारिश के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें
- संतुलित चारा प्रदान करें
- चारा और भूसा को सुरक्षित स्थान पर रखें
- पशुओं को साफ, ठंडा पेयजल दें
- तालाबों के चारों ओर उचित जाली के साथ आउटलेट बनाएं ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके
फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) का खतरा
IMD की फ्लैश फ्लड गाइडेंस के अनुसार, 26 जुलाई 2026 को सुबह 11:30 बजे तक:
सौराष्ट्र और कच्छ: देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर, जूनागढ़, राजकोट, मोरबी और कच्छ जिलों में निम्न से मध्यम फ्लैश फ्लड जोखिम।
झारखंड: पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, रांची, लोहरदगा जिलों में जोखिम।
ओडिशा: बालेश्वर, मयूरभंज, केंदुझर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बारगढ़ जिलों में जोखिम।
छत्तीसगढ़: जशपुर, बलरामपुर, सुरजुजा, कोरबा, लोरिया, सूरजपुर जिलों में जोखिम।
चिंता का विषय यह है कि पूरी तरह से संतृप्त मिट्टी और निचले इलाकों में सतह अपवाह/जलभराव हो सकता है।
रंग-कोडित चेतावनी प्रणाली को समझें
IMD चार रंगों में चेतावनी जारी करता है:
🟢 हरा (No Warning): कोई कार्रवाई नहीं
🟡 पीला (Watch): सतर्क रहें
🟠 ऑरेंज (Alert): कार्रवाई के लिए तैयार रहें
🔴 लाल (Warning): तुरंत कार्रवाई करें
वर्षा की श्रेणियां:
- भारी बारिश: 64.5-115.5 मिमी
- अति भारी बारिश: 115.6-204.4 मिमी
- अत्यधिक भारी बारिश: 204.4 मिमी से अधिक
प्रशासन की तैयारियां
ओडिशा और गुजरात सरकारों ने रेड अलर्ट के बाद आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय कर दिया है। NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात की जा रही हैं। स्कूल और कॉलेज बंद रखने के आदेश जारी हो सकते हैं। अस्पतालों को आपातकालीन तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं।
जलवायु परिवर्तन का संकेत?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी अत्यधिक मौसमी घटनाएं जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकती हैं। पिछले कुछ वर्षों में मानसून का पैटर्न बदल रहा है—कभी अत्यधिक बारिश, तो कभी लंबे सूखे की अवधि। यह कृषि और जल प्रबंधन के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- IMD ने ओडिशा और गुजरात के लिए 25-26 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया
- बंगाल की खाड़ी और राजस्थान में दो कम दबाव के क्षेत्र सक्रिय हैं
- पिछले 24 घंटों में गुजरात के सांतलपुर में 39 सेमी बारिश दर्ज की गई
- मछुआरों को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में न जाने की सलाह
- दिल्ली-NCR में 28 जुलाई से मध्यम बारिश शुरू होगी
- हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में 28-30 जुलाई को अति भारी बारिश संभव
- किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और सभी कृषि कार्य स्थगित करने की सलाह
- फ्लैश फ्लड का खतरा झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और गुजरात में











