Mundan Muhurat June 2026: हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में मुंडन संस्कार भी पवित्र संस्कारों में से एक है। इस संस्कार को चौल मुंडन, जदुला, चूड़ा कर्म या चौल कर्म संस्कार के नाम से भी जाना जाता है। 16 पवित्र संस्कारों में मुंडन संस्कार का आठवां स्थान है और यह बच्चे के सिर को पहली बार मुंडवाने के लिए किया जाता है।
जून में मलमास होने के कारण कई लोग मुंडन के मुहूर्त को लेकर कन्फ्यूज हैं। देखा जाए तो, यह कन्फ्यूजन स्वाभाविक है, क्योंकि पारंपरिक रूप से मलमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते। लेकिन एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, जून 2026 में ऐसे चार विशेष दिन हैं जब ग्रहों की स्थिति अत्यंत शुभ है और मुंडन संस्कार किया जा सकता है।
आइए जानते हैं कि मुंडन की सही तारीखें क्या हैं और इनका ज्योतिषीय महत्व क्या है।
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मुंडन संस्कार का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
हिंदू सनातन संस्कृति में 16 संस्कारों का विशेष महत्व है, जिनमें मुंडन संस्कार (चूड़ाकर्म) अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार, गर्भ के बालों को हटाने से बच्चों का जुड़ाव पिछले जन्म के कर्मों से मुक्त होता है और उसका बौद्धिक, मानसिक और शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है।
समझने वाली बात यह है कि यह संस्कार सीधे बच्चों के स्वास्थ्य और बुद्धि से जुड़ा होता है। इसलिए इसे सही और शुभ मुहूर्त में करना अनिवार्य माना गया है।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी मुंडन के फायदे हैं। गर्भ के बाल कमजोर होते हैं और उन्हें हटाने के बाद नए, मजबूत बाल आते हैं। इससे बच्चे के सिर की त्वचा स्वस्थ रहती है और रक्त संचार बेहतर होता है।
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17 जून: पहला उत्तम मुहूर्त
इस वर्ष जून के महीने में ग्रहों की विशेष स्थिति है और पावन तिथियों के कारण मुंडन संस्कार के लिए चार बेहद शुभ और श्रेष्ठ मुहूर्त बन रहे हैं।
जून महीने का पहला उत्तम मुहूर्त 17 जून को बन रहा है। इस दिन बुद्धि के दाता बुध पुनर्वसु नक्षत्र में रहेंगे, जो मुंडन जैसे मांगलिक कार्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इसके साथ ही इस दिन धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र रंभा एकादशी का व्रत भी है और आकाश मंडल में गज योग का निर्माण हो रहा है।
17 जून के विशेष योग:
• बुध का पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर
• रंभा एकादशी व्रत
• गज योग का निर्माण
• बच्चे की बुद्धि कुशाग्र होने का योग
इस शुभ योग में बच्चे का मुंडन कराने से उसकी बुद्धि कुशाग्र होती है और उसे दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। अगर गौर करें, तो यह तिथि तीन शुभ संयोगों का मेल है।
22 जून: चंद्रमा का हस्त नक्षत्र में गोचर
दूसरा सुंदर मुहूर्त 22 जून का हो रहा है। इस दिन मन के कारक चंद्रमा अपने स्वयं के नक्षत्र यानी हस्त नक्षत्र में गोचर करेंगे।
ज्योतिष शास्त्र में हस्त नक्षत्र को एक अत्यंत शुभ, सौम्य और शीघ्र फल देने वाला नक्षत्र माना गया है।
चूड़ा कर्म संस्कार के लिए चंद्रमा की बलवान स्थिति और हस्त नक्षत्र का यह संयोग बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और शांत स्वभाव के लिए सर्वश्रेष्ठ फलदाई सिद्ध होता है।
22 जून की विशेषताएं:
• चंद्रमा का हस्त नक्षत्र में गोचर
• मानसिक स्वास्थ्य के लिए उत्तम
• शांत और संतुलित स्वभाव का योग
• शीघ्र फलदायी संयोग
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हस्त नक्षत्र में किए गए कार्यों का फल जल्दी मिलता है और वह स्थायी होता है।
24 जून: गंगा दशहरा का महापर्व
तीसरा महामुहूर्त है 24 जून। इस दिन पावन गंगा दशहरा का महापर्व है, जो अपने आप में ही एक स्वतः सिद्ध और अभुज मुहूर्त माना जाता है।
इस दिन बुध और चित्रा नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है। गंगा दशहरा के पावन दिन पर मां गंगा के आशीर्वाद से बच्चों के सभी पूर्व जन्म के दोष समाप्त होते हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि चित्रा नक्षत्र उसके जीवन में तेज और आकर्षण केंद्र लेकर आता है। यानी बच्चा न केवल बुद्धिमान बल्कि आकर्षक व्यक्तित्व वाला भी होगा।
24 जून के विशेष योग:
• गंगा दशहरा महापर्व (स्वतः सिद्ध मुहूर्त)
• बुध और चित्रा नक्षत्र का संयोग
• पूर्व जन्म के दोषों से मुक्ति
• तेज और आकर्षक व्यक्तित्व का योग
गंगा दशहरा को अभुज मुहूर्त कहा जाता है, जिसमें किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती।
25 जून: निर्जला एकादशी का महाव्रत
चौथा और सबसे शक्तिशाली मुहूर्त है 25 जून। इस दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति का दिन है। चंद्रमा तुला राशि में गोचर कर रहे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस दिन सनातन धर्म की सबसे बड़ी एकादशी यानी निर्जला एकादशी का महाव्रत है।
गुरुवार, तुला का चंद्रमा और एकादशी तिथि का यह त्रिवेणी संगम बच्चे के जीवन में सौभाग्य, आरोग्यता और ऐश्वर्य की वृद्धि करने वाला है।
25 जून की विशेषताएं:
| तत्व | लाभ |
|---|---|
| गुरुवार | देवगुरु बृहस्पति का आशीर्वाद |
| तुला राशि में चंद्रमा | संतुलित व्यक्तित्व |
| निर्जला एकादशी | सभी एकादशियों का फल |
| त्रिवेणी संगम | सौभाग्य, स्वास्थ्य, धन |
समझने वाली बात है कि निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य असीम पुण्य देने वाला होता है।
जून 2026 के चारों मुहूर्त की तुलना
अगर आप जून के महीने में अपने बच्चे का मुंडन संस्कार करने का विचार कर रहे हैं, तो शास्त्रों के अनुसार यह चारों तिथियां – 17, 22, 24 और 25 जून – सर्वोत्तम हैं।
चारों मुहूर्त की तुलनात्मक तालिका:
| तिथि | मुख्य योग | विशेष लाभ |
|---|---|---|
| 17 जून | बुध + पुनर्वसु + गज योग | बुद्धि और दीर्घायु |
| 22 जून | चंद्र + हस्त नक्षत्र | मानसिक शांति |
| 24 जून | गंगा दशहरा + चित्रा | पूर्व दोष निवारण |
| 25 जून | गुरुवार + निर्जला एकादशी | सम्पूर्ण सौभाग्य |
यह सभी तिथियां अलग-अलग प्रकार के लाभ देने वाली हैं। आप अपनी सुविधा और परिवार की परंपरा के अनुसार कोई भी तिथि चुन सकते हैं।
मलमास में मुंडन: भ्रम और सच्चाई
कई लोगों के मन में यह सवाल है कि मलमास में शुभ कार्य कैसे हो सकते हैं?
ज्योतिषियों का कहना है कि मलमास में विवाह, गृह प्रवेश जैसे कार्य वर्जित हैं, लेकिन जब कोई विशेष ग्रह योग, पावन तिथि या अभुज मुहूर्त बन रहा हो, तो संस्कार किए जा सकते हैं।
राहत की बात यह है कि गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे पर्व स्वतः सिद्ध मुहूर्त होते हैं, जिनमें किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती।
मुंडन संस्कार की तैयारी कैसे करें?
मुहूर्त तो मिल गया, लेकिन संस्कार की तैयारी कैसे करें? यहां कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:
• पंडित से परामर्श: अपने कुल पुरोहित या किसी अनुभवी पंडित से संस्कार की विधि समझें
• स्थान का चयन: मुंडन घर पर, मंदिर में या किसी पवित्र तीर्थ स्थल पर किया जा सकता है
• नाई का चयन: अनुभवी और कुशल नाई का चयन करें जो बच्चों के साथ धैर्यपूर्वक काम करे
• पूजा सामग्री: फल, फूल, अगरबत्ती, नारियल, कपड़े आदि की व्यवस्था करें
• बच्चे की तैयारी: बच्चे को प्यार से समझाएं ताकि वह डरे नहीं
दिलचस्प बात यह है कि कई परिवार मुंडन के बाद बच्चे के बाल किसी नदी, विशेषकर गंगा में प्रवाहित करते हैं। यह परंपरा अत्यंत शुभ मानी जाती है।
मुंडन के बाद बच्चे की देखभाल
मुंडन के बाद बच्चे के सिर की विशेष देखभाल जरूरी है:
• सिर पर हल्का तेल लगाएं, विशेषकर सर्दियों में
• कुछ दिनों तक सिर को धूप और धूल से बचाएं
• साफ और मुलायम कपड़े की टोपी पहनाएं
• सिर को रगड़ें नहीं, हल्के हाथ से साफ करें
मुख्य बातें (Key Points)
• जून 2026 में मुंडन संस्कार के लिए 17, 22, 24 और 25 जून की तिथियां सर्वश्रेष्ठ हैं
• 17 जून को बुध का पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर और गज योग बन रहा है, जो बुद्धि और दीर्घायु के लिए शुभ
• 24 जून को गंगा दशहरा और 25 जून को निर्जला एकादशी है, जो स्वतः सिद्ध अभुज मुहूर्त हैं
• मलमास में भी विशेष ग्रह योग और पावन तिथियों में मुंडन संस्कार किया जा सकता है
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