Tribune Chowk Flyover: चंडीगढ़ में ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोगों के लिए यह खबर बड़े झटके से कम नहीं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए शहर के दक्षिण मार्ग पर प्रस्तावित ‘ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर’ प्रोजेक्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस शील नागू की अगुवाई वाली बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि यह प्रोजेक्ट ‘चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031’ के नियमों का खुला उल्लंघन है। लिहाजा, इसे बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
देखा जाए तो यह फैसला सिर्फ एक प्रोजेक्ट की मंजूरी से इनकार भर नहीं है। यह चंडीगढ़ की पहचान, उसकी हरियाली और ले कार्बूजियर के सपनों के शहर को बचाने की लड़ाई में एक बड़ा मोड़ है। कोर्ट ने प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि शहर के फेज-1 के सेक्टरों और दक्षिण मार्ग के असली स्वरूप को हर हाल में बरकरार रखा जाए। हालांकि, अदालत ने एक राहत भी दी है—यहां अंडरपास बनाया जा सकता है, जिसे ट्रैफिक समस्या हल करने के लिए विकल्प के तौर पर अपनाया जा सकता है।
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कोर्ट ने 50 साल पुराने पेड़ों को बचाने पर दिया जोर
अदालत की इस सख्ती की जड़ में है—आधी सदी से भी पुराने अंबे और अन्य कीमती पेड़ों की सुरक्षा। पिछली सुनवाई के दौरान ही हाई कोर्ट ने इन ऐतिहासिक पेड़ों को काटने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। बेंच ने कहा था कि ट्रिब्यून चौक के आसपास खड़े इन पेड़ों को फ्लाईओवर के लिए बलि नहीं चढ़ाया जा सकता। ये पेड़ चंडीगढ़ की धरोहर हैं, शहर की पहचान हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट ने सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं की, बल्कि शहर के मूल डिजाइन और शहरी योजना के सिद्धांतों को भी सर्वोपरि माना। बेंच ने स्पष्ट कहा कि निजी वाहनों की बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए एक मजबूत और व्यापक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली (पब्लिक ट्रांसपोर्ट—बस सेवा या मेट्रो) का विकास बेहद जरूरी है।
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पेटिशनकर्ता की दलील: ‘यह विरासत के लिए मौत का वारंट’
पेटिशनकर्ताओं की ओर से पेश वकील तनु बेदी ने जोरदार बहस करते हुए कहा कि चंडीगढ़ को ले कार्बूजियर ने पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के अनुकूल शहर के रूप में डिजाइन किया था। फ्लाईओवर बनने से शहर की हरियाली और खूबसूरती पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को “चंडीगढ़ की विरासत के लिए मौत का वारंट” करार दिया।
वकील ने कोर्ट को बताया कि शहर का मूल स्वरूप ही इसकी खासियत है। अगर हम कंक्रीट के जंगल बनाने लगे, तो वह दिन दूर नहीं जब चंडीगढ़ भी बाकी शहरों की तरह सांस लेने को तरसेगा। उनकी दलील थी कि आधुनिक विकास के नाम पर विरासत को खत्म नहीं किया जा सकता।
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प्रशासन का तर्क: ‘आबादी 5 लाख से 15 लाख पहुंची, विकास जरूरी’
दूसरी ओर, यूटी प्रशासन के सीनियर एडवोकेट अमित झांझी ने प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा कि चंडीगढ़ की आबादी अब 5 लाख से बढ़कर (ट्राई-सिटी समेत) 15 लाख को पार कर चुकी है। दिल्ली और जीरकपुर से आने वाले लोगों को डेढ़-डेढ़ घंटे तक जाम में फंसना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हम 1950 के संकल्पों में फंसकर शहर के विकास को नहीं रोक सकते।
झांझी ने पर्यावरण के नुकसान की भरपाई के तौर पर 2,799 नए पौधे लगाने का भरोसा भी दिया था। उनका तर्क था कि अगर फ्लाईओवर नहीं बना तो ट्रैफिक समस्या और गंभीर हो जाएगी। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि शहर की ग्रीन बेल्ट और विरासती दिख (Heritage Character) को सर्वोच्च माना जाना चाहिए।
अंडरपास बना सकता है प्रशासन, ट्रैफिक हल का विकल्प
हालांकि कोर्ट ने फ्लाईओवर को तो नामंजूर कर दिया, लेकिन एक राह भी दिखाई। बेंच ने कहा कि मास्टर प्लान के तहत यहां अंडरपास बनाने की इजाजत है। यानी अब प्रशासन को ट्रैफिक समस्या के हल के लिए अंडरपास का नया ब्लूप्रिंट तैयार करना होगा। अगर गौर करें तो यह विकल्प पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर है, क्योंकि इससे पेड़ों को नुकसान कम होगा और शहर का स्काईलाइन भी बरकरार रहेगा।
समझने वाली बात यह है कि कोर्ट ने विकास को नकारा नहीं है, बल्कि टिकाऊ और योजनाबद्ध विकास की वकालत की है। बेंच ने साफ कहा कि सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाना सबसे जरूरी है। निजी गाड़ियों पर निर्भरता कम हो, तभी ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी हल निकलेगा।
क्या है पूरे मामले की पृष्ठभूमि?
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब चंडीगढ़ प्रशासन ने ट्रैफिक जाम को कम करने के उद्देश्य से ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन पर्यावरण प्रेमियों और शहर की विरासत की रक्षा करने वाले समूहों ने इसका विरोध किया और हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह प्रोजेक्ट मास्टर प्लान के खिलाफ है और हजारों पुराने पेड़ों को काटना पड़ेगा।
कई सुनवाइयों के बाद आज अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया और प्रशासन की योजना को पूरी तरह खारिज कर दिया। यह फैसला न सिर्फ चंडीगढ़ के लिए, बल्कि देश के अन्य योजनाबद्ध शहरों के लिए भी एक मिसाल बनेगा।
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मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को खारिज किया
- चीफ जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा—यह चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के खिलाफ है
- 50 साल से पुराने अंबों और कीमती पेड़ों को बचाने पर जोर
- अंडरपास बनाने की इजाजत, यह ट्रैफिक समस्या का वैकल्पिक हल हो सकता है
- प्रशासन को सार्वजनिक परिवहन प्रणाली मजबूत करने का निर्देश













