NEET-UG 2026 Paper Leak: देश भर में मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा को लेकर एक बार फिर बवाल मचा हुआ है। परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्रों के सपने चकनाचूर हो गए हैं। इस बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने एक्स पर एक पोस्ट करके केंद्र सरकार से बड़ी मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नीट आधारित प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है।
देखा जाए तो यह तमिलनाडु का पुराना स्टैंड है जो काफी लंबे समय से चला आ रहा है। लेकिन इस बार पेपर लीक विवाद ने इस मांग को और मजबूत बना दिया है। सीएम विजय चाहते हैं कि राज्यों को 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन देने की अनुमति मिले।
पेपर लीक ने उजागर की व्यवस्था की खामियां
सीएम विजय ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हालिया पेपर लीक विवाद ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली में मौजूद ढांचागत कमियों को उजागर किया है। यह विवाद पूरे देश में लाखों मेडिकल उम्मीदवारों की उम्मीदों को तोड़ चुका है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठे हैं। पिछले कुछ सालों में कई बार पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन इस बार मामला इतना गंभीर हो गया कि परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी।
तमिलनाडु की मांग: 12वीं के अंकों पर हो एडमिशन
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने साफ शब्दों में कहा कि तमिलनाडु सरकार नीट को खत्म करने की मांग को दोहराती है। उन्होंने लिखा, “हम राज्यों को 12वीं के अंकों के आधार पर एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष जैसे कोर्सेज में स्टेट कोटा के तहत सभी सीटें भरने की अनुमति देने की मांग फिर से दोहराते हैं।”
अगर गौर करें तो यह मांग केवल नई नहीं है। तमिलनाडु की पिछली सरकारों ने भी नीट का शुरुआत से ही विरोध किया है। उनका तर्क है कि यह परीक्षा ग्रामीण इलाकों, सरकारी स्कूलों, तमिल मीडियम से पढ़ाई करने वाले और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के छात्रों पर असमान रूप से असर डालती है।
समझने वाली बात यह है कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में जहां क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा दी जाती है, वहां के छात्रों को अंग्रेजी में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय परीक्षा में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
CBI ने पकड़े 5 आरोपी, जांच जोरों पर
इस बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। देश भर में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही इसे लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि शिक्षाविद और विपक्षी दल लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि मंत्री की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जब मीडिया उनसे बात करने की कोशिश कर रही थी तब भी वे बिना कोई प्रतिक्रिया दिए वहां से निकल गए।
राजस्थान के टीचर ने सबसे पहले की थी शिकायत
और बस यहीं से शुरू हुई पूरी कहानी। इंडियन एक्सप्रेस में हमजा खान की एक रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के सीकर जिले के उद्योग नगर थाने में 4 मई की रात करीब 1:30 बजे इकोनॉमी कोचिंग संस्थान के एक टीचर कुछ पन्ने लेकर पहुंचे।
टीचर ने आरोप लगाया कि NEET-UG 2026 की परीक्षा में गड़बड़ी हुई है और उनके पास कथित तौर पर गेस पेपर मौजूद है। हालांकि थाने के एसएचओ राजेश कुमार ने क्लेम किया कि उनकी बात सुनी गई और लिखित शिकायत देने को कहा गया, लेकिन टीचर वहां से चले गए।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि टीचर ने पहले कुछ पत्रकारों से भी संपर्क किया था मगर किसी ने उनके आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया। घबराए टीचर ने बाद में कोचिंग सेंटर के मालिक से बात की और 7 मई को NTA को एक मेल किया।
60 पन्नों की PDF में थे केमिस्ट्री और बायोलॉजी के सवाल
शिकायत में टीचर ने कहा कि वे फॉरेंसिक जांच के लिए अपना मोबाइल फोन भी देने को तैयार हैं। उनके पास 60 पन्नों की एक PDF है जिसमें केमिस्ट्री और बायोलॉजी के सवाल शामिल हैं और यह वही गेस पेपर है जिसमें ज्यादातर सवाल वही थे जो एग्जाम में आए।
शुरुआती जांच में टीचर को क्लीन चिट दे दी गई है क्योंकि उन्हें कथित गेस पेपर परीक्षा खत्म होने के बाद मिला था। लेकिन उनकी शिकायत के बाद ही NEET-UG 2026 का पेपर लीक मामला खुला और जांच राजस्थान SOG से होते हुए CBI तक पहुंच गई।
FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट का किया रुख
इन सबके बीच फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए NTA को पूरी तरह से सिस्टम में बदलाव करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि या तो इस एजेंसी को ही खत्म कर दिया जाए या इसमें ढांचागत बदलाव लाए जाएं।
FAIMA ने मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा की विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए इसकी जगह एक तकनीकी रूप से सक्षम संगठन लाने की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन देशभर में तेज
देखा जाए तो यह केवल एक परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं है। यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। जो छात्र महीनों से तैयारी कर रहे थे, उनके लिए यह एक बड़ा झटका है।
विपक्षी दल इसे केंद्र सरकार की विफलता बता रहे हैं। शिक्षाविद भी NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। माता-पिता परेशान हैं कि उनके बच्चों का क्या होगा।
क्या है आगे का रास्ता?
समझने वाली बात यह है कि इस समस्या का तत्काल समाधान जरूरी है। छात्रों को एक निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली चाहिए। सरकार को NTA के ढांचे में सुधार करना होगा या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनानी होगी।
तमिलनाडु की मांग भी गंभीरता से विचार करने योग्य है। अगर राज्यों को 12वीं के अंकों के आधार पर एडमिशन देने की अनुमति मिलती है, तो क्षेत्रीय असमानता कम हो सकती है। लेकिन इसके लिए एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र बनाना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- NEET-UG 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द
- तमिलनाडु के CM विजय ने PM मोदी से नीट खत्म करने की मांग की
- राज्यों को 12वीं के अंकों पर एडमिशन देने की अनुमति मांगी
- CBI ने पेपर लीक मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया
- राजस्थान के टीचर ने सबसे पहले 4 मई को शिकायत की थी
- FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में NTA में सुधार की मांग की
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
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