Punjab Heatwave Preparedness : चंडीगढ़, 15 अप्रैल। गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और पंजाब में अत्यधिक गर्मी की स्थिति की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बुधवार को घोषणा की कि स्वास्थ्य विभाग ने अत्यधिक गर्मी के प्रभावों को रोकने, कम करने और प्रबंधित करने के लिए सुविधाओं और कार्यबल को तैयार करने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक तैयारी नहीं है। यह लोगों की जान बचाने की मुहिम है। क्योंकि अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से हीट स्ट्रेस, हीट एग्जॉस्शन और हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। साथ ही मौजूदा हृदय और श्वसन संबंधी स्थितियां और बिगड़ सकती हैं।
सभी जिला अस्पतालों में हीट स्ट्रोक यूनिट तैयार
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, मैंने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि वे सभी जिला अस्पतालों, उप-मंडल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में समर्पित हीट स्ट्रोक प्रबंधन इकाइयां चालू करें।”
समझने वाली बात यह है कि ये वार्ड स्पष्ट रूप से चिह्नित हैं और आइस पैक और कोल्ड IV फ्लूइड्स सहित सक्रिय कूलिंग उपायों से लैस हैं। ORS और आपातकालीन दवाओं जैसी आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति प्रत्येक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा में अच्छी तरह से स्टॉक की गई है।
एंबुलेंस में प्री-हॉस्पिटल कूलिंग की व्यवस्था
मंत्री ने आगे कहा कि ट्रांजिट के दौरान प्री-हॉस्पिटल कूलिंग प्रदान करने के लिए एंबुलेंस तैयारी को मजबूत किया गया है। राज्य IHIP पोर्टल का उपयोग हीट-संबंधी बीमारी (HRI) के मामलों की रियल-टाइम निगरानी के लिए कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि शिक्षा, श्रम और परिवहन जैसे विभागों के साथ हीट एक्शन प्लान को समन्वयित करने के लिए जिला टास्क फोर्स की बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
“जबकि हमारी चिकित्सा टीमें अच्छी तरह से प्रशिक्षित और तैयार हैं, मैं जनता, विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों जैसे कमजोर समूहों से आग्रह करता हूं कि वे सतर्क रहें और विभाग के सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें,” डॉ. बलबीर सिंह ने कहा।
हीटवेव सेफ्टी एडवाइजरी—क्या करें, क्या न करें
स्वास्थ्य विभाग ने एक व्यापक हीटवेव सेफ्टी एडवाइजरी जारी की है। आइए समझते हैं क्या करना चाहिए और क्या नहीं:
क्या करें (DO’s):
हाइड्रेटेड रहें: हर 20-30 मिनट में पानी पिएं, भले ही प्यास न लगे। ORS, लस्सी और नींबू पानी का उपयोग करें।
उचित कपड़े पहनें: हल्के रंग के, ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें। अपने सिर को ढकने के लिए छाता, टोपी या तौलिया का उपयोग करें।
अपने दिन की योजना बनाएं: बाहर का काम सुबह जल्दी या शाम के ठंडे घंटों के दौरान शेड्यूल करें।
स्मार्ट खाएं: तरबूज, संतरे और खीरे जैसे पानी से भरपूर फल खाएं। छोटे, बार-बार भोजन करें।
घर को ठंडा रखें: पर्दों का उपयोग करें, पंखे चलाएं और उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करें।
श्रमिक सुरक्षा: नियोक्ताओं को बाहरी मजदूरों के लिए छायादार आराम क्षेत्र और सुरक्षित पेयजल प्रदान करना चाहिए।
क्या न करें (DON’Ts):
पीक सन से बचें: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे के बीच बाहर न जाएं जब तक कि बिल्कुल आवश्यक न हो।
डिहाइड्रेटिंग ड्रिंक्स छोड़ें: चाय, कॉफी, शराब और कार्बोनेटेड शुगर ड्रिंक्स सीमित करें।
भारी भोजन से बचें: तले हुए, मसालेदार या बासी भोजन को छोड़ें जो पाचन पर भार डाल सकता है।
कोई ज़ोरदार गतिविधि नहीं: चरम गर्मी के घंटों के दौरान भारी व्यायाम से बचें।
वाहन सुरक्षा: बच्चों या पालतू जानवरों को कभी भी पार्क किए गए वाहनों के अंदर न छोड़ें।
आपातकालीन लक्षण—तुरंत चिकित्सा सहायता लें
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आपको ये लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें:
- उच्च शरीर का तापमान (40°C या उससे अधिक)
- परिवर्तित मानसिक स्थिति, भ्रम, या दौरे
- गर्म, लाल और सूखी त्वचा
- गंभीर सिरदर्द, मतली, या तेज़ दिल की धड़कन
आपातकालीन हेल्पलाइन: 104, 108, या 112
बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष सावधानी
अगर गौर करें तो बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं। उनका शरीर तापमान को नियंत्रित करने में कम सक्षम होता है। इसलिए उनका विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
बुजुर्गों को बार-बार पानी पिलाएं, उन्हें ठंडे कमरे में रखें, और उनकी दवाओं का ध्यान रखें क्योंकि कुछ दवाएं गर्मी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा सकती हैं।
बच्चों को ठंडे कपड़े पहनाएं, उन्हें धूप में न खेलने दें, और उन्हें बार-बार तरल पदार्थ दें। छोटे बच्चे अक्सर प्यास की शिकायत नहीं करते, इसलिए अभिभावकों को सतर्क रहना होगा।
IHIP पोर्टल से रियल-टाइम मॉनिटरिंग
स्वास्थ्य विभाग IHIP (Integrated Health Information Platform) पोर्टल का उपयोग कर हीट-संबंधी बीमारियों की रियल-टाइम निगरानी कर रहा है। इससे पता चल जाता है कि किस जिले में कितने मामले आ रहे हैं और तुरंत कार्रवाई की जा सकती है।
यह डिजिटल निगरानी प्रणाली बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हॉटस्पॉट की पहचान हो जाती है और वहां अतिरिक्त संसाधन भेजे जा सकते हैं।
जिला टास्क फोर्स का समन्वय
स्वास्थ्य विभाग अकेले काम नहीं कर रहा। जिला टास्क फोर्स की बैठकें हो रही हैं जिनमें शिक्षा, श्रम, परिवहन जैसे विभाग शामिल हैं।
शिक्षा विभाग स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों के समय और दोपहर के भोजन के दौरान ठंडे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। श्रम विभाग बाहरी मजदूरों के लिए छाया और पानी की व्यवस्था करेगा। परिवहन विभाग बसों और अन्य सार्वजनिक वाहनों में एसी और पानी की व्यवस्था देखेगा।
यह समन्वित दृष्टिकोण बेहद जरूरी है क्योंकि हीटवेव एक बहुआयामी समस्या है।
तैयारी ही बचाव है
स्वास्थ्य मंत्री का संदेश स्पष्ट है—तैयारी ही बचाव है। चिकित्सा टीमें तैयार हैं, सुविधाएं तैयार हैं, लेकिन जनता को भी सतर्क रहना होगा।
थोड़ी सी सावधानी से गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। पानी पीना, छाया में रहना, सही कपड़े पहनना—ये छोटी-छोटी बातें जान बचा सकती हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
• हीट स्ट्रोक यूनिट तैयार: सभी जिला अस्पतालों, उप-मंडल अस्पतालों और CHCs में हीट स्ट्रोक प्रबंधन यूनिट चालू, 24×7 तैयारी
• आइस पैक और कोल्ड IV फ्लूइड: सभी यूनिट्स में सक्रिय कूलिंग उपाय, ORS और आपातकालीन दवाएं स्टॉक में
• एंबुलेंस में प्री-हॉस्पिटल कूलिंग: ट्रांजिट के दौरान मरीजों को ठंडा रखने की व्यवस्था
• IHIP पोर्टल से रियल-टाइम मॉनिटरिंग: हीट-संबंधी बीमारियों की तुरंत निगरानी और कार्रवाई
• जिला टास्क फोर्स समन्वय: शिक्षा, श्रम, परिवहन विभागों के साथ मिलकर हीट एक्शन प्लान
• व्यापक हीटवेव एडवाइजरी: हर 20-30 मिनट में पानी, दोपहर 12-3 बजे बाहर न जाएं, आपातकालीन हेल्पलाइन 104, 108, 112













