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The News Air - Breaking News - खतरे की घंटी: भारत में 2026 का सबसे कमजोर Monsoon, क्या सूखे की ओर बढ़ रहा देश?

खतरे की घंटी: भारत में 2026 का सबसे कमजोर Monsoon, क्या सूखे की ओर बढ़ रहा देश?

IMD की चौंकाने वाली भविष्यवाणी - मानसून 90% LPA पर आएगा जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है, किसानों और कृषि पर पड़ेगा गहरा असर।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
रविवार, 31 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Monsoon
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Monsoon Alert India 2026: देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक चिंताजनक खबर आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने संशोधित पूर्वानुमान में बताया है कि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले दशक यानी 10 वर्षों में सबसे कमजोर रहने वाला है। यह भविष्यवाणी न सिर्फ भयावह है बल्कि देश के 60-70% वर्षा आधारित कृषि के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

देखा जाए तो IMD ने अपने अप्रैल के पूर्वानुमान को संशोधित करते हुए मानसून को 92% से घटाकर 90% LPA (Long Period Average) कर दिया है। समझने वाली बात यह है कि लॉन्ग पीरियड एवरेज 89 सेंटीमीटर है (जून से सितंबर के बीच), और अगर इसका केवल 90% ही आता है तो लगभग 82-83 सेंटीमीटर बारिश होगी – जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय कृषि को “मानसून का जुआ” कहा जाता है, और यह बिल्कुल सही है। जब मानसून कमजोर होता है तो देश की पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है – खाद्यान्न उत्पादन से लेकर रोजगार तक, मुद्रास्फीति से लेकर ग्रामीण मांग तक सब कुछ।

💡 यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission 2026: Salary Hike से पहले Govt Employees को बड़ा Gift

मानसून क्या है? जानें मूल अवधारणा

मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के ‘मौसिन‘ शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है – हवाओं की दिशा में परिवर्तन। अगर गौर करें तो जब अरब के व्यापारी भारतीय उपमहाद्वीप में आते थे, तब उन्होंने इस मौसमी घटना को देखा और इसी से यह शब्द बना।

मानसून दरअसल एक मौसमी परिघटना है जिसमें हवाओं की दिशा बदल जाती है। उदाहरण के लिए:

गर्मी के मौसम (समर) में उत्तरी गोलार्ध में उच्च तापमान होता है जिससे निम्न दबाव बनता है। दक्षिणी गोलार्ध में सर्दी होती है इसलिए उच्च दबाव होता है। हवाएं हमेशा उच्च दबाव से निम्न दबाव की ओर चलती हैं। इसी कारण दक्षिण से आने वाली हवाएं (कोरिओलिस प्रभाव के कारण दक्षिण-पश्चिम दिशा से) भारत में बारिश कराती हैं – इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून कहते हैं।

सर्दियों में स्थिति उलट जाती है और उत्तर-पूर्वी मानसून आता है।

2026 का मानसून कितना कमजोर? आंकड़े चौंकाने वाले हैं

IMD के अनुसार:

अप्रैल का पूर्वानुमान: 92% LPA
संशोधित पूर्वानुमान: 90% LPA
वास्तविक बारिश: लगभग 82-83 सेमी (89 सेमी का 90%)

पिछले 10 वर्षों की तुलना देखें:

वर्षवर्षा (सेमी)टिप्पणी
201488कमजोर
201586बहुत कमजोर
2024108बहुत अच्छा
2025108बहुत अच्छा
202682-83 (अनुमानित)पिछले 20 साल में सबसे कम

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि लगातार दो साल (2024-25) अच्छी बारिश के बाद अचानक इतनी कमी चिंताजनक है।

LPA क्या है? समझें तकनीकी शब्दावली

LPA (Long Period Average) का मतलब है 50 वर्षीय औसत वर्षा। वर्तमान में यह 1971 से 2020 के बीच की औसत वर्षा पर आधारित है। हर 10 वर्ष में इसे संशोधित किया जाता है।

वर्तमान में जून से सितंबर के बीच औसत वर्षा 89 सेंटीमीटर है। अगर केवल 90% ही बारिश होती है तो यह सामान्य से काफी कम है।

मानसून कमजोर क्यों आ रहा है? El Niño और IOD की भूमिका

इस बार के कमजोर मानसून के पीछे दो मुख्य कारण हैं:

1. El Niño (एल नीनो) का प्रभाव:

El Niño एक प्रशांत महासागर से जुड़ी घटना है। समझने वाली बात यह है कि सामान्य परिस्थितियों में:

• भारत के पास (पश्चिम प्रशांत) में उच्च तापमान और निम्न दबाव होता है
• पेरू (पूर्वी प्रशांत) के पास ठंडा पानी और उच्च दबाव
• हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं और भारत में बारिश कराती हैं

लेकिन El Niño की स्थिति में:

• पेरू के पास गर्म जलधाराएं आ जाती हैं
• वहां निम्न दबाव बन जाता है
• हवाएं भारत की बजाय पेरू की ओर चली जाती हैं
• भारत में देरी से मानसून, कम बारिश, और सूखे की स्थिति

2. नकारात्मक Indian Ocean Dipole (IOD):

Indian Ocean Dipole (हिंद महासागरीय द्विध्रुव) हिंद महासागर में तापमान के बदलाव से जुड़ी घटना है।

सकारात्मक IOD (भारत के लिए अच्छा):
• अरब सागर के पास उच्च तापमान
• निम्न दबाव बनता है
• हवाएं भारत की ओर आकर्षित होती हैं
• अच्छी बारिश होती है
• El Niño के प्रभाव को भी काउंटर करता है

नकारात्मक IOD (भारत के लिए बुरा):
• इंडोनेशिया के पास उच्च तापमान
• वहां निम्न दबाव
• हवाएं भारत से दूर चली जाती हैं
• कम और देरी से बारिश

इस साल दोनों ही कारक – मजबूत El Niño और नकारात्मक IOD – भारत के खिलाफ हैं।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखाएं

भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून दो शाखाओं में बंटकर आता है:

अरब सागर शाखा (Arabian Sea Branch):
• केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र तट पर बारिश
• पश्चिमी घाट पर भारी वर्षा

बंगाल की खाड़ी शाखा (Bay of Bengal Branch):
• पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश
• ब्रह्मपुत्र और गंगा के मैदानों में बारिश

कमजोर मानसून का प्रभाव: देश के सामने क्या चुनौतियां?

कृषि पर सीधा प्रहार:

• भारत की 60-70% कृषि वर्षा आधारित है
• खरीफ फसलें (चावल, ज्वार, बाजरा, कपास, सोयाबीन, मूंगफली) सीधे प्रभावित होंगी
• खरीफ का उत्पादन कम होने से रबी फसलों पर भी नकारात्मक प्रभाव

खाद्यान्न संकट:

• चावल, दालों का उत्पादन घटेगा
• खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ेगी
• गरीबों पर सबसे अधिक असर

रोजगार संकट:

• ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ेगी
• कृषि मजदूरों की आय घटेगी
• शहरों की ओर पलायन बढ़ सकता है

आर्थिक प्रभाव:

• कृषि GDP में गिरावट
• ग्रामीण मांग कमजोर होगी
• FMCG, ऑटो जैसे सेक्टर प्रभावित होंगे

जल संकट:

• जलाशयों में पानी कम होगा
• जल विद्युत उत्पादन घटेगा
• पेयजल की समस्या

सामाजिक प्रभाव:

• कुपोषण बढ़ सकता है
• किसानों पर कर्ज का बोझ
• सामाजिक-आर्थिक विकास बाधित

राहत की बात: सिल्वर लाइनिंग

हालांकि स्थिति गंभीर है, लेकिन कुछ राहत के संकेत भी हैं:

पर्याप्त खाद्यान्न भंडार:
• सरकारी गोदामों में अच्छा स्टॉक
• तत्काल खाद्यान्न संकट की आशंका नहीं

अनुकूल जलाशय स्तर:
• पिछले दो वर्षों की अच्छी बारिश से जलाशय भरे हुए हैं
• तत्काल जल संकट नहीं

लेकिन सावधानी जरूरी:
अगर लगातार दो साल ऐसी स्थिति बनी तो गंभीर संकट हो सकता है।

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सरकार के पास क्या विकल्प हैं?

अल्पकालिक उपाय:

• प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता
• प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का विस्तार
• सूखा राहत पैकेज
• न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि

दीर्घकालिक समाधान:

• जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस कदम
• माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप, स्प्रिंकलर) को बढ़ावा
• वर्षा जल संचयन की व्यवस्था
• सूखा प्रतिरोधी फसलों का विकास
• मौसम आधारित फसल बीमा

IMD क्या है? जानें इस महत्वपूर्ण संस्था के बारे में

India Meteorological Department (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग):

• स्थापना: 1875
• मुख्यालय: नई दिल्ली
• मंत्रालय: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत
• कार्य: मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात चेतावनी, जलवायु अनुसंधान

यह एशिया की सबसे पुरानी मौसम सेवाओं में से एक है।

IPCC रिपोर्ट की चेतावनी: जलवायु परिवर्तन का खतरा

Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) की रिपोर्ट्स लगातार चेतावनी दे रही हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की अनिश्चितता बढ़ रही है।

भविष्य में:
• मानसून का समय अनिश्चित होगा
• अत्यधिक बारिश और सूखे दोनों बढ़ेंगे
• कृषि पैटर्न बदलने होंगे

क्या है पूरा मामला?

भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां करोड़ों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर हैं। मानसून यहां सिर्फ बारिश नहीं है – यह अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

क्लाइमेट चेंज ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। अब मौसम का पैटर्न बदल गया है। कभी अत्यधिक गर्मी, कभी ओलावृष्टि, कभी बाढ़ – किसान हर तरफ से परेशान है।

अब इस साल कमजोर मानसून की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है। खरीफ की फसलें खतरे में हैं, सूखा पड़ सकता है, भुखमरी और बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है।

लेकिन हमें घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार के पास योजनाएं हैं, भंडार है, तकनीक है। जरूरत है सिर्फ समय पर और सही कदम उठाने की।

साथ ही, हमें दीर्घकालिक रूप से जलवायु परिवर्तन से लड़ने की रणनीति बनानी होगी। नहीं तो यह संकट हर साल गहराता जाएगा।


मुख्य बातें (Key Points)

• IMD ने मानसून पूर्वानुमान 92% से घटाकर 90% LPA किया

• यह पिछले 20 वर्षों में सबसे कम बारिश का अनुमान है

• LPA (89 सेमी) का 90% मतलब केवल 82-83 सेमी बारिश

• भारत की 60-70% कृषि वर्षा आधारित है जो प्रभावित होगी

• El Niño और नकारात्मक IOD दोनों प्रतिकूल स्थिति में

• खरीफ फसलें (चावल, कपास, सोयाबीन) सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी

• सिल्वर लाइनिंग: पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और अच्छे जलाशय स्तर

• IPCC चेतावनी: जलवायु परिवर्तन से मानसून की अनिश्चितता बढ़ेगी

• IMD की स्थापना 1875 में हुई, मुख्यालय नई दिल्ली

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: LPA (Long Period Average) क्या है?

उत्तर: LPA का मतलब है 50 वर्षीय औसत वर्षा। वर्तमान में यह 1971 से 2020 के बीच की औसत वर्षा पर आधारित है और हर 10 वर्ष में संशोधित किया जाता है। जून से सितंबर के बीच भारत में औसत वर्षा 89 सेंटीमीटर है। जब IMD कहता है कि मानसून 90% LPA पर होगा, तो इसका मतलब है केवल 82-83 सेमी बारिश होगी।

प्रश्न 2: El Niño और La Niña में क्या अंतर है?

उत्तर: El Niño और La Niña प्रशांत महासागर में तापमान परिवर्तन से जुड़ी घटनाएं हैं। El Niño में पेरू के पास समुद्र गर्म हो जाता है, जिससे भारत में कम बारिश होती है और सूखा पड़ता है। La Niña में विपरीत स्थिति होती है – भारत में समय पर और भारी बारिश होती है। दोनों को सामूहिक रूप से ENSO (El Niño Southern Oscillation) कहते हैं।

प्रश्न 3: कमजोर मानसून का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: कमजोर मानसून का व्यापक प्रभाव होगा: (1) कृषि उत्पादन घटेगा क्योंकि 60-70% खेती वर्षा पर निर्भर है, (2) खरीफ फसलें (चावल, कपास, सोयाबीन) प्रभावित होंगी, (3) खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ेगी, (4) ग्रामीण रोजगार और आय घटेगी, (5) कृषि GDP कम होगी, (6) ग्रामीण मांग कमजोर होने से FMCG और ऑटो सेक्टर प्रभावित होंगे। हालांकि, इस साल पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और अच्छे जलाशय स्तर से कुछ राहत मिलेगी।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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