Punjab Wheat Procurement : एस.ए.एस. नगर (मोहाली), 15 अप्रैल। पंजाब के किसान एक बार फिर मुश्किल में हैं। मंडियों में गेहूं की फसल पड़ी है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से खरीद की हरी झंडी नहीं मिल रही। आम आदमी पार्टी, पंजाब के राज्य महासचिव और पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन सरदार हरचंद सिंह बरसट ने केंद्र की मोदी सरकार पर पंजाब के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीनों से किसानों ने अपनी जेब से पैसे खर्च करके, महंगे बीज और खाद डालकर बेटों की तरह पाली गई फसल आज मंडियों में बेसहारा पड़ी है।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक देरी का मामला नहीं है। यह पंजाब के किसानों के साथ जानबूझकर की जा रही उपेक्षा है। जो किसान देश का अन्न भंडार भरते हैं, उन्हीं को आज केंद्र सरकार की रहमो-करम पर छोड़ दिया गया है।
मंडियों में पड़ा सोना, केंद्र की मर्जी पर निर्भर
सरदार बरसट ने कहा कि किसानों ने मौसम की मार झेलते हुए देश के अन्न भंडार को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की है। आज मंडियों में पड़ा सूखा गेहूं, जो किसान का सोना है, वह केंद्र सरकार के रहमो-करम पर है।
हैरान करने वाली बात यह है कि केंद्र की भाजपा सरकार एक तरफ पंजाबियों को गुमराह करने के लिए किसान हितैषी होने के दावे करती है, तो वहीं दूसरी तरफ हर स्तर पर पंजाब के साथ सौतेली मां वाला व्यवहार कर रही है।
पंजाब सरकार ने किए पुख्ता प्रबंध
सरदार बरसट ने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब की सभी मंडियों में गेहूं की खरीद-फरोख्त के पूरे प्रबंध किए गए हैं। हर मंडी में सफाई, पीने का पानी, बिजली, किसानों-मजदूरों के बैठने के लिए छाया और विभिन्न एजेंसियों जैसे पनग्रेन, पनसप, मार्कफेड, वेयरहाउस का स्टाफ तैनात किया गया है।
समझने वाली बात यह है कि पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा राज्य में 1896 मंडियां और 759 अस्थायी मंडियां बनाकर किसानों की फसल बिकने के प्रबंध किए गए हैं। इसके साथ ही पंजाब मंडी बोर्ड के मुख्य कार्यालय में किसानों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
लेकिन इतनी तैयारी के बावजूद केंद्र की ओर से खरीद की अनुमति नहीं मिल रही। यह किसानों के लिए बेहद निराशाजनक स्थिति है।
सैंपल फेल करके पंजाब को दबाने की कोशिश
मंडी बोर्ड चेयरमैन ने आरोप लगाया कि आज केंद्र की भाजपा सरकार पंजाब के किसानों और पंजाबियों को दबाने के लिए गेहूं के दानों के सैंपल फेल करके पंजाब के प्रति अपनी बुरी सोच को उजागर कर रही है।
“क्योंकि पंजाब के किसानों ने अपने अधिकारों के लिए सदैव शांतिपूर्ण संघर्ष का रास्ता अपनाया है। पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र के इस पंजाब विरोधी रवैये से सख्त नाराज है,” उन्होंने कहा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि किसान आंदोलन के दौरान पंजाब के किसानों ने तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष किया था। और शायद यही वजह है कि केंद्र सरकार अब बदले की भावना से काम कर रही है।
₹9 हजार करोड़ RDF फंड रोका, 155 लाख मीट्रिक टन अनाज नहीं उठाया
सरदार बरसट ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार रूरल डेवलपमेंट फंड (RDF) का ₹9 हजार करोड़ रुपये रोककर और गोदामों-शैलरों में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन अनाज भंडार को दूसरे राज्यों में स्थानांतरित न करके पंजाब के किसानों और पंजाबियों पर दबाव बनाना चाहती है।
दिलचस्प बात यह है कि पंजाब सरकार बार-बार केंद्रीय भंडार का यह अनाज यहां से उठाने और गोदामों-शैलरों को खाली करने की अपील कर चुकी है, ताकि नया अनाज रखा जा सके। लेकिन केंद्र सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही।
यह स्थिति किसानों के लिए दोहरी मार है। एक तरफ नई फसल की खरीद नहीं हो रही, दूसरी तरफ पुराना अनाज गोदामों में पड़ा सड़ रहा है।
BBMB से पंजाब-हरियाणा की नुमाइंदगी खत्म
सरदार बरसट ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब के बांधों में से पंजाब और हरियाणा की नुमाइंदगी खत्म करके पंजाब के पानी पर डाका डालने की नीयत दिखा दी है, जिसका हर पंजाबी विरोध करेगा।
यह मुद्दा सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि पंजाब की संप्रभुता और अधिकारों का है। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में पंजाब का प्रतिनिधित्व खत्म करना पंजाब के साथ विश्वासघात है।
पीएम मोदी से अपील—खरीद की हरी झंडी दें
सरदार बरसट ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि:
- पंजाब की फसलों की खरीद के लिए हरी झंडी दी जाए
- रूरल डेवलपमेंट फंड तुरंत जारी किया जाए
- खराब हुई फसलों के लिए विशेष पैकेज दिया जाए
- जिन बोर्डों में से सदस्य खत्म किए गए हैं, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए
“ताकि पंजाब के लोग देश में सिर ऊंचा करके चल सकें,” उन्होंने कहा।
केंद्र का दोहरा चरित्र—दावे और हकीकत में फर्क
अगर गौर करें तो केंद्र सरकार का दोहरा चरित्र साफ दिखता है। एक तरफ किसान हितैषी होने के दावे किए जाते हैं, दूसरी तरफ किसानों की फसल मंडियों में पड़ी सड़ रही है। एक तरफ आत्मनिर्भर भारत के नारे लगाए जाते हैं, दूसरी तरफ अन्नदाता को उसकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा।
पंजाब ने हमेशा देश का अन्न भंडार भरा है। 1960 और 70 के दशक में जब देश में अनाज की भारी कमी थी, तब हरित क्रांति के जरिए पंजाब ने देश को भुखमरी से बचाया। लेकिन आज वही पंजाब केंद्र सरकार की उपेक्षा झेल रहा है।
किसानों की मुश्किलें और बढ़ेंगी
अगर जल्द ही खरीद शुरू नहीं हुई तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ेंगी। मंडियों में पड़ी फसल खराब हो सकती है। किसानों को कर्ज के ब्याज का बोझ बढ़ेगा। और सबसे बड़ी बात, अगली फसल के लिए उनके पास पैसे नहीं होंगे।
यह एक दुष्चक्र है जिसमें किसान फंस जाता है। और इसी दुष्चक्र से निकलने के लिए सरकारी खरीद जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Points)
• मंडियों में गेहूं पड़ा, खरीद नहीं: पंजाब की मंडियों में किसानों की गेहूं की फसल पड़ी है लेकिन केंद्र की ओर से खरीद की हरी झंडी नहीं मिल रही
• 1896 मंडियां तैयार: पंजाब मंडी बोर्ड ने 1896 मंडियां और 759 अस्थायी मंडियां बनाकर पूरे प्रबंध किए, कंट्रोल रूम भी स्थापित
• ₹9 हजार करोड़ RDF फंड रोका: केंद्र ने रूरल डेवलपमेंट फंड का ₹9 हजार करोड़ रुपये रोक रखा है, पंजाब पर दबाव बनाने की कोशिश
• 155 लाख मीट्रिक टन अनाज नहीं उठाया: गोदामों में पुराना अनाज पड़ा है, केंद्र इसे दूसरे राज्यों में शिफ्ट नहीं कर रहा, नए अनाज के लिए जगह नहीं
• BBMB से प्रतिनिधित्व खत्म: भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से पंजाब-हरियाणा की नुमाइंदगी खत्म कर पानी पर कब्जे की साजिश
• सैंपल फेल करके परेशान: केंद्र गेहूं के सैंपल फेल कर रहा है ताकि पंजाब के किसानों को दबाया जा सके













