Raghav Chadha Security Controversy : चंडीगढ़, 15 अप्रैल। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से लोकसभा सदस्य सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस लेने के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सुरक्षा कभी भी राजनीतिक हथियार नहीं बननी चाहिए और सुरक्षा घटाने या वापस लेने के अचानक फैसले गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
देखा जाए तो यह मामला सिर्फ राघव चड्ढा तक सीमित नहीं है। यह इस बात का सवाल है कि क्या सुरक्षा को राजनीतिक सुविधा के आधार पर दिया और वापस लिया जा सकता है? क्या यह वास्तविक खतरे के आकलन पर आधारित है या पार्टी की आंतरिक राजनीति पर?
सुरक्षा राजनीतिक हथियार नहीं बन सकती
रंधावा ने सवाल उठाया कि क्या ये फैसले वास्तविक खतरे के आकलन (थ्रेट परसेप्शन) पर आधारित हैं या आंतरिक पार्टी समीकरणों का परिणाम हैं?
“जनता की सुरक्षा को राजनीतिक सुविधा का साधन नहीं बनाया जा सकता। इस मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और DGP पंजाब को स्पष्ट करना चाहिए कि इस फैसले के पीछे क्या कारण हैं,” उन्होंने कहा।
समझने वाली बात यह है कि सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा है। इसे राजनीतिक प्रतिशोध या पुरस्कार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
पहले खतरा था तो अब क्या बदला?
रंधावा ने आगे कहा कि जब वे गृह मंत्री के पद पर थे, तब ऐसे मामलों में निर्णय पूरी तरह खुफिया इनपुट और CID रिपोर्ट्स के आधार पर लिए जाते थे। ऐसे संवेदनशील फैसलों में संस्थागत प्रक्रिया और सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिशों का पालन अनिवार्य होता है।
पूर्व गृह मंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा, “यदि अब कोई खतरा नहीं है, तो पहले इतनी बड़ी सुरक्षा क्यों दी गई थी? और यदि पहले खतरा था, तो अब ऐसा क्या बदल गया है कि सुरक्षा वापस ले ली गई?”
यह सवाल बिल्कुल सही है। अगर किसी को सुरक्षा दी जाती है तो खुफिया रिपोर्ट के आधार पर दी जाती है। और अगर वापस ली जाती है तो भी रिपोर्ट होनी चाहिए कि खतरा अब नहीं रहा।
जनता के टैक्स का पैसा राजनीतिक स्टंट के लिए नहीं
रंधावा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता के टैक्स का पैसा राजनीतिक स्टंट या निजी हितों के लिए खर्च नहीं होना चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि सुरक्षा प्रदान करना बहुत महंगा होता है। Z-Plus सुरक्षा में दर्जनों पुलिसकर्मी, गाड़ियां, हथियार, सब कुछ शामिल होता है। यह सब जनता के पैसे से चलता है।
अगर यह सुरक्षा राजनीतिक कारणों से दी और वापस ली जाती है, तो यह जनता के पैसे की बर्बादी है। और लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं है।
राजनीति से कानून-व्यवस्था को खतरा
रंधावा ने आगे कहा कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने मांग की कि सुरक्षा देने या वापस लेने की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि संवैधानिक संस्थाओं और प्रशासन पर जनता का भरोसा बना रहे।
हैरान करने वाली बात यह है कि जब सुरक्षा को राजनीतिक हथियार बनाया जाता है, तो पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। लोग सोचने लगते हैं कि क्या ये संस्थाएं निष्पक्ष हैं या राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं।
DGP को स्पष्टीकरण देना चाहिए
रंधावा की मांग है कि DGP पंजाब को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस लेने के पीछे क्या खुफिया रिपोर्ट है। क्या थ्रेट परसेप्शन बदला? या यह पार्टी के आंतरिक मामलों के कारण लिया गया फैसला है?
यह पारदर्शिता जरूरी है ताकि जनता को भरोसा हो कि सुरक्षा एजेंसियां निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से काम कर रही हैं।
AAP सरकार पर सवाल
यह मामला आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार के लिए भी असहज सवाल खड़ा करता है। अगर राघव चड्ढा को सुरक्षा दी गई थी और अब वापस ली गई, तो इसका आधार क्या है?
और अगर यह आंतरिक पार्टी राजनीति के कारण है, तो यह दिखाता है कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल पार्टी के फायदे के लिए किया जा रहा है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सुरक्षा के मानक क्या होने चाहिए?
सुरक्षा देने के मानक स्पष्ट होने चाहिए:
- खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट
- CID की सिफारिश
- गृह विभाग की मंजूरी
- समय-समय पर समीक्षा
और जब सुरक्षा वापस ली जाती है, तो भी यही प्रक्रिया होनी चाहिए। यह फैसला किसी राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर नहीं होना चाहिए।
मुख्य बातें (Key Points)
• सुरक्षा को राजनीतिक हथियार बनाना गलत: पूर्व गृह मंत्री रंधावा ने कहा लोकतंत्र में सुरक्षा राजनीतिक सुविधा नहीं बन सकती
• पहले खतरा था तो अब क्या बदला: रंधावा ने सवाल उठाया कि अगर पहले सुरक्षा दी तो अब वापस क्यों, थ्रेट परसेप्शन क्या बदला?
• DGP को स्पष्टीकरण देना चाहिए: सुरक्षा वापस लेने के फैसले के पीछे खुफिया रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए
• जनता के टैक्स का दुरुपयोग: सुरक्षा पर करोड़ों खर्च होते हैं, इसे राजनीतिक स्टंट के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता
• संस्थागत प्रक्रिया जरूरी: सुरक्षा देने या वापस लेने में CID रिपोर्ट, खुफिया इनपुट और निष्पक्ष प्रक्रिया अनिवार्य













