BBMB में Punjab का हक छीना: BBMB (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) को लेकर पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग दोनों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर जमकर हमला बोला है। आरोप है कि केंद्र सरकार ने BBMB नियम 1974 में संशोधन कर पंजाब की स्थायी प्रतिनिधित्व व्यवस्था को खत्म कर दिया है।
और बस यहीं से शुरू हुआ पंजाब के पानी और बिजली अधिकारों पर खतरे का नया दौर। 14 अप्रैल को चंडीगढ़ में दोनों विपक्षी नेताओं ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस में मान सरकार की कड़ी आलोचना की।
देखा जाए तो, यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है। यह पंजाब के संसाधनों पर नियंत्रण का सवाल है।
क्या है BBMB विवाद
पहले “मेंबर पावर” का पद पंजाब से लिया जाता था। यह पंजाब की स्थायी प्रतिनिधित्व व्यवस्था थी। लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे देशभर के अधिकारियों के लिए खोल दिया है।
इसे पंजाब के अधिकारों पर सीधा हमला माना जा रहा है। क्योंकि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड पंजाब के पानी और बिजली संसाधनों का प्रबंधन करता है।
मजीठिया का तीखा हमला
बिक्रम सिंह मजीठिया ने भगवंत मान सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार पंजाब की रक्षा करने के बजाय उसे खत्म करने में लगी हुई है।
उन्होंने कहा, “भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में नियम बदलकर पंजाब की अनिवार्य हिस्सेदारी को खत्म कर दिया गया है। यह कोई साधारण गलती नहीं, बल्कि सीधी लूट है — पंजाब के पानी और बिजली पर कब्जा करने की खुली साजिश, जिसके सामने मान सरकार ने घुटने टेक दिए हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि मजीठिया ने इसे एक सुनियोजित और क्रमबद्ध साजिश बताया। उन्होंने कहा, “पहले पानी के मुद्दे पर दरवाज़े खोले गए और अब BBMB में पंजाब का हक कम किया जा रहा है। इसका मकसद साफ है — पंजाब के संसाधनों पर बाहरी नियंत्रण स्थापित करना।”
SYL की याद दिलाई
यहां ध्यान देने वाली बात है कि मजीठिया ने याद दिलाया कि प्रकाश सिंह बादल की सरकार ने SYL (सतलुज-यमुना लिंक) मामले में कानून बनाकर किसानों के हितों की रक्षा की थी।
लेकिन मौजूदा सरकार उल्टा पंजाब को फिर उसी खतरनाक स्थिति में धकेल रही है। उन्होंने कहा, “SYL की तरह फिर पंजाब से धोखा हो रहा है। राज्य को तबाही की ओर धकेलने की पूरी तैयारी है।”
केजरीवाल के इशारे पर फैसले
मजीठिया ने आरोप लगाया कि यह फैसले अरविंद केजरीवाल के इशारों पर लिए जा रहे हैं। पंजाब के हितों की कीमत पर दूसरों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “मान सरकार सिर्फ एक कठपुतली बनकर रह गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र के साथ साठगांठ कर पंजाब के अधिकारों का सौदा किया है। यह सरकार न सिर्फ नाकाम है, बल्कि पंजाब के हितों के साथ खुली गद्दारी कर रही है।”
समझने वाली बात यह है कि मजीठिया का आरोप है कि मान सरकार विज्ञापनों, फोटोशूट और दिखावे में व्यस्त है, जबकि हकीकत में पंजाब के अधिकारों की खुलेआम बोली लग रही है।
अकाली दल का संघर्ष का ऐलान
अंत में मजीठिया ने चेतावनी दी कि शिरोमणि अकाली दल इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा, “हम सड़क से लेकर संसद तक हर मंच पर कड़ा संघर्ष करेंगे, ताकि पंजाब के अधिकार हर कीमत पर बचाए जा सकें।”
कांग्रेस अध्यक्ष वारिंग का बयान
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने भी केंद्र सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रॉक्सी के जरिए पंजाब पर शासन करने की तैयारी कर रहे हैं।
वारिंग ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “यह केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से पंजाब की बची हुई शक्तियों को कमजोर करने का एक और प्रयास है। यह देश की संघीय संरचना पर स्पष्ट हमला है क्योंकि केंद्र धीरे-धीरे राज्यों के अधिकार क्षेत्र में घुसपैठ कर रहा है।”
गवर्नर राज लगाने की आशंका
अगर गौर करें तो वारिंग ने एक बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री पंजाब में गवर्नर राज लगाने की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं।
यह बेहद गंभीर आरोप है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार पंजाब की निर्वाचित सरकार को खत्म करके सीधे शासन करना चाहती है।
AAP सरकार की नींद पर सवाल
वारिंग ने आम आदमी पार्टी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जब BJP नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब के अधिकार पर हमले जारी रख रही है, तब AAP सरकार गहरी नींद में सोई हुई है।
उन्होंने कई उदाहरण दिए:
- पहले BBMB के चेयरमैन की नियुक्ति बाहर से की गई
- फिर केंद्र सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट चुनाव खत्म करने और विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोशिश की
- अब BBMB में पंजाब के अधिकार छीन लिए गए
- इसके अलावा चंडीगढ़ प्रशासन ने हरियाणा को केंद्र शासित प्रदेश में अपना विधानसभा भवन बनाने की अनुमति दी
सर्वदलीय बैठक से इनकार
जब वारिंग से पूछा गया कि क्या वे इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की मांग करेंगे, तो उन्होंने कहा कि इससे शायद ही कोई उद्देश्य पूरा होता है।
उन्होंने कहा, “सरकार बस एक प्रस्ताव पारित कर देती है और उसके साथ ही अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है।”
सुप्रीम कोर्ट जाने का सुझाव
वारिंग ने सुझाव दिया कि AAP सरकार को मजबूत कानूनी सहारा अपनाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में जाकर मामले को कानूनी तौर पर लड़ना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी, “अन्यथा ऐसे संकेत पंजाब के लिए अच्छे नहीं हैं। बहुत जल्द केंद्र में BJP सरकार सतलुज यमुना लिंक नहर के माध्यम से पंजाब का पानी हरियाणा को देने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।”
यह आशंका बहुत गंभीर है। क्योंकि SYL का मुद्दा पंजाब के किसानों के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा है।
पंजाब के संसाधनों पर खतरा
दोनों विपक्षी नेताओं का मुख्य मुद्दा एक ही है: पंजाब के पानी और बिजली संसाधनों पर खतरा मंडरा रहा है।
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी और बिजली का बंटवारा करता है। अगर इसमें पंजाब की प्रतिनिधित्व कम हो जाएगी, तो पंजाब के हितों की रक्षा कैसे होगी?
AAP सरकार की चुप्पी
यहां ध्यान देने वाली बात है कि इन सभी आरोपों पर AAP सरकार की तरफ से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार केंद्र के सामने घुटने टेक चुकी है। लेकिन सरकार की तरफ से यह तर्क भी आ सकता है कि वे कानूनी तौर पर लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।
राजनीतिक प्रभाव
यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में बहुत संवेदनशील है। पानी और बिजली के मुद्दे पर पंजाब की सभी पार्टियां एक स्वर में बोलती रही हैं।
लेकिन अब विपक्ष AAP सरकार पर आरोप लगा रहा है कि वह केंद्र की कठपुतली बनकर रह गई है। यह AAP की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
अगले चुनावों में यह मुद्दा बड़ा मुद्दा बन सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- केंद्र सरकार ने BBMB नियम 1974 में संशोधन कर पंजाब की स्थायी प्रतिनिधित्व व्यवस्था खत्म की
- “मेंबर पावर” का पद अब देशभर के अधिकारियों के लिए खुला
- मजीठिया ने लगाया मान सरकार और केंद्र की साठगांठ का आरोप
- वारिंग ने कहा गवर्नर राज लगाने की तैयारी
- विपक्ष ने AAP सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए
- SYL जैसी स्थिति की आशंका













