Health of Nation 2026 Report: अगर आप 25 से 30 साल के हैं, देखने में फिट हैं और खुद को हेल्दी समझते हैं, तो भी जरूरी नहीं कि आप वाकई स्वस्थ हों और आपके अंग पूरी क्षमता से काम कर रहे हों। यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है अपोलो हॉस्पिटल द्वारा जारी की गई Health of Nation 2026 Report से।
इस रिपोर्ट के लिए डेटा अपोलो हॉस्पिटल के अलग-अलग जांच केंद्रों से लिया गया। रिपोर्ट के निष्कर्ष चिंताजनक हैं – हेल्दी दिखने वाले लोगों में भी पोषक तत्वों की भारी कमी, कोलेस्ट्रॉल, बीपी और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। अपोलो प्रिवेंटिव हेल्थ के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. श्री विद्या वेंकटरमन ने इन निष्कर्षों पर विस्तार से चर्चा की है।
30 साल से कम उम्र के युवाओं में चौंकाने वाले आंकड़े
Health of Nation Report के मुताबिक साल 2025 में 30 साल से कम उम्र के 1 लाख से ज्यादा लोगों ने अपना हेल्थ चेकअप कराया। परिणाम चौंकाने वाले थे – 59% लोग ओवरवेट निकले। यानी हर दस में से लगभग छह युवा मोटापे से ग्रस्त हैं।
52% लोगों का कोलेस्ट्रॉल असामान्य था। यह एक खतरनाक संकेत है क्योंकि हाई कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों का प्रमुख कारण है। 10 में से 7 लोगों में विटामिन डी की कमी थी। विटामिन डी हड्डियों की मजबूती और इम्युनिटी के लिए बेहद जरूरी है।
करीब आधे लोगों में विटामिन B12 कम था। B12 की कमी से थकान, कमजोरी और तंत्रिका तंत्र की समस्याएं हो सकती हैं। यह सारी ऐसी दिक्कतें हैं जिनके लक्षण शुरुआत में नहीं दिखते। इसीलिए लोग अक्सर इन्हें सिर्फ स्ट्रेस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
लेकिन परेशानी उससे कहीं बड़ी होती है। ये सभी साइलेंट किलर की तरह काम करते हैं। जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
कॉर्पोरेट एम्प्लॉइज में और भी खराब स्थिति
अगर नौकरी करने वालों की बात करें तो स्थिति और भी चिंताजनक है। जिन 5 लाख कॉर्पोरेट एम्प्लॉइज का हेल्थ चेकअप किया गया, उनमें 10 में से 8 लोग ओवरवेट थे। यह एक भयावह आंकड़ा है।
करीब आधे लोग प्री-डायबिटिक या डायबिटिक थे। यानी या तो उन्हें डायबिटीज हो चुकी है या वे इसके कगार पर हैं। हर चार में से एक व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था। करीब 2/3 लोग बेसिक फिजिकल एक्टिविटी भी नहीं कर रहे थे।
यानी वो हफ्ते में 150 मिनट एक्सरसाइज भी नहीं कर पा रहे थे। यह हाल तब है जब इन एम्प्लॉइज की औसत उम्र सिर्फ 38 साल थी। इतनी कम उम्र में इतनी सारी स्वास्थ्य समस्याएं होना गंभीर चिंता का विषय है।
कॉर्पोरेट एम्प्लॉइज में बीमारियों की सबसे बड़ी वजह थी – कुर्सी। ज्यादातर लोग डेस्क जॉब करते हैं और घंटों अपनी कुर्सी पर जमे रहते हैं। इससे फिजिकल एक्टिविटी कम होती है।
महिलाओं में उम्र के साथ बदलते स्वास्थ्य जोखिम
Health of Nation 2026 के अनुसार महिलाओं के हेल्थ रिस्क उम्र के साथ बदलते रहते हैं। 20s में महिलाओं में विटामिन B12 की कमी सबसे ज्यादा होती है। यह वक्त फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता और नर्वस सिस्टम के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
40s आते-आते लगभग 10 में से 9 महिलाओं में पेट के आसपास चर्बी जमा हो जाती है। यह सिर्फ दिखावट की समस्या नहीं है बल्कि यह कई बीमारियों का संकेत है। पेट की चर्बी को विसरल फैट कहते हैं जो अंगों के आसपास जमा होती है।
फिर मेनोपॉज के दौरान शरीर का मेटाबॉलिज्म चेंज होता है। हार्मोनल बदलाव होते हैं। इससे डायबिटीज का रिस्क ढाई गुना बढ़ जाता है। अगर पेट के आसपास चर्बी जमा है तो यह रिस्क और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
महिलाओं को नियमित हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी है। खासकर 40 की उम्र के बाद ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राम, हड्डियों की मजबूती के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट और हार्मोन लेवल की जांच करानी चाहिए।
दिल, दिमाग और लिवर की छिपी हुई समस्याएं
Apollo Hospitals की रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। 1,100 से ज्यादा ऐसे लोग टेस्ट कराने आए जिनमें दिल की बीमारी का कोई लक्षण नहीं था। वे पूरी तरह सामान्य महसूस कर रहे थे।
लेकिन जब Coronary Calcium Score Test किया गया तो पता चला कि 45% लोगों की धमनियों में कैल्शियम जमा हुआ है। यह दिल की बीमारी का एक प्रारंभिक संकेत है। धमनियों में कैल्शियम जमा होने से वे सख्त हो जाती हैं और ब्लड फ्लो में रुकावट आ सकती है।
इसीलिए कोरोनरी कैल्शियम स्कोर टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इसमें बस कुछ मिनट लगते हैं लेकिन यह लक्षण आने से पहले ही बीमारी का पता लगा सकता है। यह एक तरह का सीटी स्कैन है जो दिल की धमनियों में जमा कैल्शियम को मापता है।
1 लाख से ज्यादा लोगों के रूटीन हेल्थ चेकअप से यह भी पता चला कि हर 15 में से एक व्यक्ति को डिप्रेशन है। हर 10 में से एक को एंग्जायटी है। यह समस्याएं सिर्फ 2 मिनट के छोटे से क्वेश्चनेयर से पकड़ में आईं।
फैटी लिवर – साइलेंट एपिडेमिक
रिपोर्ट में एक और खतरनाक खुलासा हुआ। 500 से ज्यादा लोगों का अल्ट्रासाउंड करने पर पता चला कि उन्हें फैटी लिवर है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि नॉर्मल ब्लड टेस्ट में 74% लोगों के लिवर एंजाइम पूरी तरह नॉर्मल थे।
यानी फैटी लिवर है या नहीं, इसका सटीक पता सिर्फ ब्लड टेस्ट से नहीं चल पाता। इसीलिए अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी है। फैटी लिवर का मतलब है लिवर में अत्यधिक चर्बी जमा होना।
यह शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाता लेकिन धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाता है। अगर समय पर पकड़ में न आए तो यह लिवर सिरोसिस और लिवर फेलियर तक पहुंच सकता है। लाइफस्टाइल में बदलाव, वजन कम करना और नियमित एक्सरसाइज से फैटी लिवर को रिवर्स किया जा सकता है।
गट माइक्रोबायोम – आपके स्वास्थ्य का नया पैमाना
Health Report में एक नया और दिलचस्प पहलू सामने आया – गट माइक्रोबायोम। हमारी आंतों में लाखों-करोड़ों अच्छे और बुरे बैक्टीरिया रहते हैं। इस पूरे झुंड को तकनीकी भाषा में गट माइक्रोबायोम कहते हैं।
यह गट माइक्रोबायोम ही तय करता है कि शरीर शुगर कैसे प्रोसेस करेगा, फैट कैसे जमा करेगा और अंदरूनी सूजन कैसे कंट्रोल करेगा। गट माइक्रोबायोम हमारे मूड, स्ट्रेस और सोचने की क्षमता पर भी असर डालता है।
जिन लोगों का गट माइक्रोबायोम हेल्दी था, यानी जिनकी आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन था, उनमें गुड कोलेस्ट्रॉल ज्यादा था। उनकी इम्युनिटी बेहतर थी और वे कम बीमार पड़ते थे।
गट हेल्थ को सुधारने के लिए प्रोबायोटिक फूड जैसे दही, छाछ और फर्मेंटेड फूड खाने चाहिए। फाइबर से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। प्रोसेस्ड फूड और शुगर से दूर रहना चाहिए।
फिटनेस का गिरता स्तर – चिंताजनक संकेत
जांच में यह भी पता चला कि 30 से कम उम्र के लगभग 2/3 लोगों में फ्लेक्सिबिलिटी, स्ट्रेंथ और बैलेंस कमजोर था। यह बहुत चिंताजनक है क्योंकि यह उम्र तो सबसे ज्यादा फिट रहने की होती है।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, फिटनेस घटती जाती है। अगर 30 की उम्र में ही इतनी कमजोरी है तो 50-60 की उम्र में क्या होगा? फिजिकल फिटनेस सिर्फ मसल्स के लिए नहीं बल्कि हड्डियों, जोड़ों और पूरे शरीर के लिए जरूरी है।
नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, योग और बैलेंस एक्सरसाइज करनी चाहिए। यह न केवल फिटनेस बढ़ाती हैं बल्कि बुढ़ापे में गिरने और चोट लगने से भी बचाती हैं।
सकारात्मक बदलाव की संभावना
Health of Nation Report 2026 बताती है कि जो लोग फॉलो-अप के लिए वापस आए, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट के हिसाब से कदम उठाए, उनमें काफी सुधार हुआ। करीब 56% लोगों का हाई बीपी और 34% लोगों की डायबिटीज कंट्रोल में आई।
यह साबित करता है कि समय पर पता लगने और सही कदम उठाने से बीमारियों को रोका जा सकता है। वहीं जिन्होंने कोई कदम नहीं उठाया, उनकी स्थिति प्री-डिजीज से बढ़कर पूरी बीमारी में बदल गई।
यह रिपोर्ट हमें एक स्पष्ट संदेश देती है – प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर। बीमारी होने से पहले ही उसे रोकना बेहतर है। नियमित हेल्थ चेकअप, हेल्दी लाइफस्टाइल और समय पर इलाज बहुत जरूरी है।
डॉ. वेंकटरमन की सलाह – कौन से टेस्ट जरूरी?
Apollo Preventive Health के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. श्री विद्या वेंकटरमन कहते हैं कि हेल्थ चेकअप के लिए कोई फिक्स्ड चेकलिस्ट नहीं है। डॉक्टर आपकी उम्र, जेंडर, लाइफस्टाइल और परिवार में बीमारी का इतिहास देखकर तय करते हैं कि कौन से टेस्ट जरूरी हैं।
फिर भी कुछ बेसिक चीजें हैं। 20 साल की उम्र में यह जांचना जरूरी है कि कहीं शरीर में विटामिन की कमी तो नहीं है। ब्लड शुगर का लेवल क्या है? थायरॉइड की जांच भी रेगुलरली करानी चाहिए।
30 की उम्र के बाद पेट का अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी हो जाता है। इससे फैटी लिवर का पता चल जाएगा। साथ ही मेंटल हेल्थ और नींद से जुड़ी दिक्कतों की जांच भी जरूरी है।
40 की उम्र के बाद कई और रिस्क बढ़ जाते हैं। महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राम करवाना चाहिए। पुरुषों को दिल की बीमारियों का रिस्क ज्यादा होता है इसलिए ECG, इको या ट्रेडमिल टेस्ट करवाएं।
मुख्य बातें (Key Points):
• 30 साल से कम उम्र के 59% लोग ओवरवेट, 52% का कोलेस्ट्रॉल असामान्य
• 10 में से 8 कॉर्पोरेट एम्प्लॉइज ओवरवेट, आधे प्री-डायबिटिक या डायबिटिक
• 45% लोगों की धमनियों में कैल्शियम जमा, 74% में फैटी लिवर के बावजूद नॉर्मल ब्लड टेस्ट
• नियमित चेकअप और लाइफस्टाइल बदलाव से 56% का बीपी और 34% की डायबिटीज कंट्रोल में आई













