Strait of Hormuz को लेकर रिटायर्ड मेजर जनरल A K Siwach से खास बातचीत हुई। इस एपिसोड में ईरान के ऊपर जिस तरह से अमेरिका और इजराइल ने हमला किया और उसके बाद जिस तरह से ईरान जंग के मैदान में डटकर खड़ा है, उसके बारे में बात हुई।
ईरान की बात करें तो Strait of Hormuz को एक तरीके से उसको बंद कर देना एक रिटालिएटरी वेपन की तरह उसने यूज किया है। ऐसे में चाइना के साथ ईरान की इकोनॉमिक लाइफ लाइन कहीं न कहीं ऐसे कट होती है।
Iran ने दिखाया कि Strait of Hormuz पर नियंत्रण उसका है
मेजर जनरल सिवाच ने कहा, “देखो ईरान ने तो वह कर दिया जो उसके फायदे के लिए था। ईरान ने यह दिखा दिया कि भाई Strait of Hormuz को कंट्रोल करता है ईरान। इसको अमेरिका भी नहीं खोल पाया।”
आज की तारीख में जो देश ईरान के साथ अच्छे दोस्त हैं, उनको वो निकलने देगा। जब चीन की बात आ रही है, चीन का 90% ईरान का जो ऑयल है, वो चीन की तरफ जाता है। मगर चीन के टैंकर तो जा रहे हैं। चीन के टैंकरों को तो अलाउ कर रहा है। वो इसमें तो कोई शक नहीं। चीन ने तो इन्वेस्टमेंट बहुत किया हुआ है ईरान के अंदर।
भारत को भी छोड़नी पड़ी थी ईरान से तेल खरीदारी
यह भी सच्चाई है कि किसी समय में भारत भी 28% ऑयल लेता था ईरान से, वो जब था 2015 से पहले। जब 2018 के अंदर JCPOA जिसको बोलते हैं Joint Comprehensive Plan of Action, जिसको न्यूक्लियर डील बोलते हैं, अमेरिका बाहर निकल गया था। अमेरिका ने सैंक्शन लगा दी। हमें ओवरनाइट उसको जीरो करना पड़ा। यह दुख की बात है। चाइना वहां से खरीदता रहा।
सभी शिप्स के लिए बंद नहीं है Strait of Hormuz
तो यह जो सोच रहे हो कि भाई Strait of Hormuz सबके लिए बंद है, शायद वो नहीं है। जो ईरान उन शिप को अलाउ कर रहा है जो उनके मित्र देश हैं और चाइना की शिपें तो जैसे सुनने में आया ज्यादातर उसको तो निकलने दे रहा है।
भारत डिप्लोमेसी में लगा हुआ है। भारत की दो ऑयल टैंकर निकले। मुझे लगता है हम सक्सेसफुल होंगे। क्योंकि भारत की नीति है कि हम तो बोलते हैं कि भाई लड़ाई बंद होनी चाहिए। डायलॉग और डिप्लोमेसी शुड टेक ओवर और किसी चीज का हल बैटलफील्ड में नहीं है। वो एक प्रकार टेबल पे है डिस्कस करके है। तो मुझे लगता है कि कहीं ना कहीं हमारे को सफलता मिलेगी।
तेल की कीमतें ₹65 से ₹110 पहुंचीं, 2-3 महीने लगेंगे स्टेबलाइज़ होने में
लेकिन यह Strait of Hormuz बंद करने का लॉन्ग टर्म इंपैक्ट क्या होने वाला है एनर्जी मार्केट्स पर आने वाले समय में? मुझे लगता है कि इसका तो इंपैक्ट होने वाला ही है। ईरान ने यही नहीं किया कि Strait of Hormuz को बंद कर दिया। मगर इसके साथ-साथ इसने जो मिडिल ईस्ट के अंदर जो टूरिज्म था, वह खत्म हो गया।
और उसके बाद जो एनर्जी सेक्टर में ऑयल में जहां इनकी ऑयल प्रोडक्शन थी और स्टोरेज फैसिलिटी, उसको भी काफी हद तक डेंट मिला है। अगर यह Strait of Hormuz खुल भी जाएगा, आपके ऑयल के रेट स्टेबलाइज़ होने में अगले 2-3 महीने लग जाएंगे।
आज जो ₹65 डॉलर पर बैरल था, ₹50 से ₹60 के बीच में फिर ₹65 हुआ। आज वो बढ़ के ₹110 डॉलर पर बैरल तक चला गया है।
ऑयल बढ़ने से पूरी अर्थव्यवस्था पर असर
इसका मतलब है जब आपका ऑयल के रेट इतने तेजी से बढ़ेंगे, आपकी इकॉनमी बढ़ेगी। क्यों? ऑयल के रेट बढ़ेंगे, उसके इंपैक्ट से सब चीज के रेट बढ़ेंगे, खाने-पीने का सामान भी बढ़ेगा। एक चीज़ हम भूल रहे हैं, यूरिया भी वहीं से आता था। जो फर्टिलाइजर बनाता है, उसका भी एडवर्स इंपैक्ट हुआ है।
तो वाकई यह जो छोटे-छोटे देश हैं साउथ एशिया के, उनके ऊपर तो बहुत बड़ी मार पड़ी है। भारत प्रिपेयर था इसलिए भारत को इतनी लेस (कम मार पड़ी)। मगर वाकई इकॉनमी पर मार पड़ेगा। अगर यह लड़ाई लंबी चलती है तो फाइव परसेंट जो GDP कम हो सकती है भारत की भी। इसमें कोई शक नहीं है।
LNG और LPG पर भी ध्यान देना होगा
क्योंकि यह जिस प्रकार से दिख रहा है और LNG, LPG हमें ध्यान रखना पड़ेगा। जो ऑयल है, वह हम वेल प्लेस्ड हैं क्योंकि हमने जो डिफरेंट एंटिटी से लेना स्टार्ट, डाइवर्सिफाई जिसको बोलते हैं, वो कर दिया। मगर जो LNG के सोर्सेस कम हैं, बढ़ाए हैं हमने। अमेरिका से भी ले रहे हैं, हम बाकी देशों से भी स्टार्ट कर दिया, ऑस्ट्रेलिया से भी ले रहे। मगर इसमें टाइम लगेगा।
तो यह सच्चाई है, इसके कारण इकॉनमी डगमगाएगी। अगर यह खुल भी जाता है, रेट्स जो हैं ऑयल और गैस के स्टेबलाइज़ होने में अगले 2-3 महीने लगेंगे।
ईरान की आंतरिक स्थिति: विरोध अब बैक बर्नर पर
ईरान की इंटरनल सिचुएशन के बारे में बात करें तो मेजर जनरल सिवाच ने एक बहुत इंटरेस्टिंग स्टेटमेंट दिया था। कहा था कि अमेरिका के खिलाफ इस वक्त पूरा ईरान यूनाइटेड है। लेकिन जब अली खुमेनी की डेथ हुई थी, उस समय डिवाइडेड था ईरान। एक ऐसा सेक्शन था जो मौन कर रहा था उनकी डेथ। एक ऐसा सेक्शन था जो सेलिब्रेट कर रहा था।
लेकिन प्रेजेंटली आपको क्या लगता है कि मुस्तबा खुमेनी जो उनके बेटे अली खमेनी के हैं, हालांकि उनको लेकर के भी बहुत सारी चर्चाएं हैं कि डिसफिगर्ड हो गए अटैक में और अभी तक सामने नहीं आए हैं। कोई खुल के उनके ज्यादा वीडियोज और पिक्चर्स भी नहीं अवेलेबल हैं कहीं पर भी सोशल मीडिया पे। बहुत सारी चीजों पर बात हो रही है। अभी जो ईरान है, आपको लगता है प्रेजेंट रिजीम से फाइन है?
कॉमन एनिमी के खिलाफ ईरान इकट्ठा हो गया
मेजर जनरल ने कहा, “देखो यह कहना बड़ा मुश्किल है क्योंकि यह तो अभी कोई इंटरनल डिसेंट तो दिख नहीं रहे। वहां पर इंटरनेट काम नहीं करता। वहां पर जो ईरान में होता है, वो चीज तो आती नहीं। मगर ऐसा लगता है ईरान की हिस्ट्री है, जब भी कॉमन एनिमी के अगेंस्ट ईरान इकट्ठा हो जाता है। जो बात डिसेंट थी, वो थी, अब वो बैक बर्नर हो गई। वो चीज नजर नहीं आ रही।”
क्योंकि उनको एक जो ऑथॉरिटेरियन या ऑटोक्रेटिक जो रूल था, उसके अगेंस्ट एक सेक्शन था जिसने रिवोल्ट किया था, जो प्रोटेस्ट किया था, स्ट्रीट पर आया था। मगर वो जो ऑटोक्रेटिक रिजीम है, वो अभी भी तो कंटिन्यू है। उनके बेटे ने वो, और उनके बेटे भी इक्वली ऑटोक्रेटिक हैं क्योंकि क्लेरिकल वही बैकग्राउंड से आते हैं।
ईरान की समस्याएं: इन्फ्लेशन, करप्शन, हिजाब मूवमेंट
तो वो जो एक रोश था लोगों के बीच में, एक एशियसनेस थी कि भाई हमको यह रिजीम चेंज करनी है। डेमोक्रेटिक गवर्नमेंट लेकर के आनी है, इलेक्टेड गवर्नमेंट लेकर के आनी है। वो वाला जो पूरा कांसेप्ट था, वो तो कोलैप्स ही हो गया।
यही कह रहे हैं कि सच्चाई है कि क्या यह सच्चाई है कि वहां प्रॉब्लम थी? वाकई प्रॉब्लम थी। इकॉनमी उनकी डिगमगा थी। इन्फ्लेशन थी, करप्शन थी और वहां पर रिस्ट्रिक्शन थी बहुत ज्यादा। आप हिजाब के प्रति देखें जो एक प्रकार से मूवमेंट चली थी। कितनी सक्सेसफुल थी? सक्सेसफुल थी। लोग सड़कों पे थे। बहुत ज्यादा इन्फ्लेशन थी वहां क्योंकि वहां सैंक्शन लगी हुई है और यह ज्यादा पैसा वो खर्च करते हैं अपने डिफेंस के इक्विपमेंट में।
अमेरिका की दुविधा: दलदल में फंसा
ईरान के लीडर मारे जाते हैं। दूसरा लीडर आ जाता है। ईरान लड़ता जा रहा है। ईरान के पास जो रॉकेट और मिसाइल का भंडार अभी भी है। ईरान के पास ड्रोन्स भी हैं। और ईरान ने जो मिलिट्री वारफेयर को इकोनॉमिक वारफेयर बना दिया है। दुखती हुई नर्व्स पे उसने हाथ लगा दिया है। चाहे वो मिडिल ईस्ट की हो या अमेरिका की हो।
अब यह समझ नहीं आ रहा, करें तो करें क्या? अमेरिका दलदल में फंस गया है। निकलने की कोशिश कर रहा है। मगर उसको एक वे आउट नहीं मिल रहा कि दिखाए कि भाई हमारी जीत हुई है, हम वे आउट करें। वो नहीं मिल रहा। और अमेरिका इजराइल के फोर्स करने से आया। यह लड़ाई अमेरिका की नहीं है। यह लड़ाई इजराइल की है।
मुख्य बातें (Key Points)
• Iran ने Strait of Hormuz बंद कर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण दिखाया, अमेरिका भी नहीं खोल पाया
• तेल की कीमतें ₹65 से ₹110 प्रति बैरल पहुंचीं, खुलने के बाद भी 2-3 महीने स्टेबलाइज़ होने में लगेंगे
• चीन के टैंकर निकल रहे हैं, भारत डिप्लोमेसी से अपने टैंकर निकालने में सफल
• भारत की GDP में 5% तक की गिरावट संभव अगर युद्ध लंबा चला
• ईरान की आंतरिक असंतोष अब बैक बर्नर पर, कॉमन एनिमी के खिलाफ पूरा देश एकजुट













