Iran US Ceasefire पर स्याही सूखने से पहले ही नया संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की घोषणा को अभी 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि तेहरान ने चेतावनी दे डाली कि अगर इजराइल ने लेबनान पर हमले जारी रखे तो वह समझौते से हट जाएगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा ही नहीं है।
पूरी दुनिया बैरूत में हो रहे नरसंहार को देख रही है। ईरान ने फिर से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और अमेरिका की तरफ से भड़की प्रतिक्रिया सामने आई है। तनाव की इस नई लहर ने पूरे मध्य पूर्व को फिर से युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है।
24 घंटे में ही टूट गया युद्ध विराम
Iran US Ceasefire की घोषणा के साथ ही दुनिया ने राहत की सांस ली थी। लेकिन यह राहत बेहद अल्पकालिक साबित हुई। ईरान की मीडिया के मुताबिक यह चेतावनी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इजराइली हमलों की रिपोर्ट के बाद दी गई है।
ईरान का कहना है कि अमेरिका-ईरान सीजफायर के नियम स्पष्ट और दो टूक हैं। अमेरिका को दो विकल्पों में से एक चुनना होगा – या तो युद्ध विराम का पालन करें या फिर इजराइल के जरिए युद्ध जारी रखें। दोनों एक साथ नहीं चल सकते।
तेहरान ने साफ कर दिया है कि अगर इजराइल लेबनान पर हमले करता रहा तो यह अमेरिका की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा।
ट्रंप का बड़ा बयान: लेबनान सीजफायर का हिस्सा नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीधे तौर पर कहा है कि लेबनान इस समझौते में शामिल नहीं था। उन्होंने लेबनान के बाहर रखे जाने की वजह हिजबुल्लाह को बताया।
ट्रंप ने कहा, “हिजबुल्लाह की वजह से वे इस समझौते में शामिल नहीं थे। उसका भी हल निकाला जाएगा। अभी सब ठीक है।”
यह बयान ईरान की चिंताओं को और बढ़ाने वाला है क्योंकि हिजबुल्लाह ईरान का करीबी सहयोगी है और लेबनान में उसकी मजबूत उपस्थिति है।
इजराइल-लाबनान के बीच चल रहे युद्ध को ट्रंप ने अमेरिका-ईरान के युद्ध से अलग बताया है। लेकिन ईरान इस तर्क को स्वीकार नहीं कर रहा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बंद
ईरान ने अपनी चेतावनी को कार्रवाई में बदलते हुए फिर से Strait of Hormuz को बंद कर दिया है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग एक तिहाई हिस्सा गुजरता है।
ईरानी नौसेना ने कहा है कि हॉर्मुज के पास से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति के गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों को उड़ा दिया जाएगा।
यह दूसरी बार है जब ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद किया है। पहली बार अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद इसे बंद किया गया था। उसके बाद ही पाकिस्तान की मध्यस्थता में सीजफायर हुआ था।
अमेरिका की प्रतिक्रिया: फिर शुरू होगा युद्ध
अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि ईरान की सीजफायर का पालन न करने की स्थिति में अमेरिकी सेना फिर से युद्ध शुरू करने के लिए तैयार है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसेना और वायु सेना पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी युद्धपोत तैनात हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
ट्रंप प्रशासन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट भी किया है। इसमें लिखा है, “बहुत से लोग ऐसे समझौते, सूचियां और चिट्ठियां भेज रहे हैं जिनका अमेरिका-ईरान की बातचीत से कोई लेना देना नहीं है। कई मामलों में वे पूरी तरह से धोखेबाज, ठग और उससे भी बदतर लोग हैं। हमारी संघीय जांच पूरी होने के बाद उनकी पोल जल्द ही खुल जाएगी।”
यह पोस्ट किसके लिए है, यह स्पष्ट नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि यह बिचौलियों और गलत जानकारी फैलाने वालों के लिए है।
बैरूत में खूनी हमला: 87 की मौत, 700 घायल
इस बीच लेबनान की राजधानी बैरूत पर इजराइल की भीषण एयर स्ट्राइक हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 87 लोग मारे गए हैं और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
इजराइल घनी आबादी वाले लेबनानी इलाके पर लगातार हमले कर रहा है। बेबस नागरिक इन हमलों की चपेट में आ रहे हैं।
लेबनान के प्रधानमंत्री ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “इजराइल घनी आबादी वाले लेबनान इलाके पर हमले कर रहा है और बेबस नागरिकों को मार रहा है। इजराइल युद्ध रोकने के लिए सभी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहा है।”
पूरी दुनिया इन नरसंहार के दृश्य देख रही है लेकिन इजराइल अपने हमले रोकने को तैयार नहीं है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल
इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका भी विवादास्पद हो गई है। ट्रंप ने पहले दावा किया था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अनुरोध पर ही ईरान पर होने वाले हमले को टाला गया था।
लेकिन अब सीजफायर टूटते ही ईरान ने पाकिस्तान को फोन मिलाया है। ईरान के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख से फोन पर बातचीत की है। इसमें लेबनान में हो रहे सीजफायर उल्लंघन पर चर्चा हुई है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सीजफायर उल्लंघन पर चिंता जताई है। पाकिस्तान ने कहा है कि संघर्ष वाले इलाकों में कई जगह सीजफायर टूटने की खबरें आई हैं जो शांति प्रक्रिया की भावना को कमजोर कर रही हैं।
अब पाकिस्तान पर तनाव बढ़ सकता है क्योंकि दोनों पक्ष उससे उम्मीद कर रहे हैं कि वह फिर से मध्यस्थता करे।
ईरान की शर्तें: हिजबुल्लाह को अकेला नहीं छोड़ेंगे
ईरान ने साफ कर दिया है कि इजराइल और लेबनान की लड़ाई में वह हिजबुल्लाह को अकेले नहीं छोड़ सकता। जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था तो उस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी।
उसके बाद हिजबुल्लाह भी ईरान की तरफ से लड़ाई में शामिल हो गया था। हिजबुल्लाह लेबनान का सबसे शक्तिशाली सशस्त्र समूह है और उसे ईरान का समर्थन प्राप्त है।
ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका सच में शांति चाहता है तो उसे इजराइल को लेबनान पर हमले रोकने के लिए दबाव डालना होगा। वरना यह सीजफायर बेमानी है।
इजराइल का रुख: हमले नहीं रुकेंगे
इस पूरे मामले में सबसे कठोर रुख इजराइल का है। इजराइल ने साफ कर दिया है कि लेबनान पर जो हमले हैं वो नहीं रुकेंगे।
इजराइल का तर्क है कि हिजबुल्लाह आतंकवादी संगठन है और उसके खिलाफ कार्रवाई उसका अधिकार है। अमेरिका भी इजराइल के इस तर्क का समर्थन कर रहा है।
लेकिन इस कार्रवाई में मासूम नागरिकों की मौत से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आक्रोश बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य देश युद्ध विराम की अपील कर रहे हैं लेकिन इजराइल टस से मस नहीं हो रहा।
वैश्विक प्रभाव: तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल की आशंका है। दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
भारत समेत कई देश अपनी तेल आवश्यकता के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं। अगर यह स्थिति लंबी चली तो पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित होगा क्योंकि कई कार्गो शिप इसी मार्ग से गुजरते हैं। वैकल्पिक मार्ग लंबे और महंगे हैं।
आगे क्या होगा
अभी स्थिति बेहद नाजुक है। एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर है जो पहले ही दिन टूटने के कगार पर पहुंच गया। दूसरी तरफ इजराइल-लेबनान में युद्ध जारी है।
अगर पाकिस्तान फिर से सफल मध्यस्थता नहीं कर पाता तो पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ सकता है। ईरान ने चेतावनी दे दी है कि वह अपने सहयोगी को अकेला नहीं छोड़ेगा।
अमेरिकी सेना भी पूरी तरह तैयार है और किसी भी हालत से निपटने के लिए अलर्ट है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अगर ईरान समझौते का उल्लंघन करता है तो वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
पूरी दुनिया की निगाहें अब इस बात पर हैं कि अगले 24 घंटों में क्या होता है। क्या शांति बहाल हो पाएगी या फिर मध्य पूर्व एक बार फिर खूनी संघर्ष की आग में जल उठेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- Iran US Ceasefire को अभी 24 घंटे भी नहीं बीते कि तनाव फिर बढ़ा
- इजराइल के लेबनान हमले में 87 मरे, 700 से ज्यादा घायल
- ईरान ने फिर से हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया
- ट्रंप बोले: लेबनान सीजफायर का हिस्सा नहीं है
- ईरान की चेतावनी: इजराइल के हमले बंद नहीं हुए तो समझौता खत्म
- अमेरिका ने कहा: फिर से युद्ध के लिए तैयार है सेना
- पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव, दोनों पक्षों से बात की
- वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं













