Trump Iran War ने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति अमेरिका की असलियत बेरहमी से उजागर कर दी है। डोनल्ड ट्रंप ने एकतरफा ऐलान करते हुए कहा है कि अमेरिका अगले पाँच दिनों तक ईरान पर हमला नहीं करेगा। सवाल यह है कि अगर अमेरिका जीत रहा है, तो खुद ही युद्धविराम (Ceasefire) का प्रस्ताव क्यों दे रहा है? इसका जवाब छिपा है बीते तीन हफ्तों में अमेरिकी सेना को हुए भारी नुकसान में, जहाँ ईरान ने दुनिया का सबसे एडवांस्ड F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट मार गिराया, 12 से ज्यादा MQ-9 रीपर ड्रोन तबाह किए और अमेरिका के दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
ट्रिलियन डॉलर की फौज, लेकिन ईरान के सामने बेबस
अमेरिका हर साल अपनी सेना पर करीब एक ट्रिलियन डॉलर खर्च करता है। उसके पास 13 लाख से ज्यादा एक्टिव ड्यूटी सैनिक हैं, 13,000 एयरक्राफ्ट वाली विशाल वायुसेना है और इतिहास की शायद सबसे ताकतवर नौसेना है। साइबर वेपन्स से लेकर सैटेलाइट सर्वेलेंस और अत्याधुनिक रेडार तक, हर मामले में अमेरिका के “वॉर टॉयज” दुनिया में सबसे एडवांस्ड माने जाते हैं।
लेकिन Trump Iran War में इतना सब होने के बावजूद अमेरिका और इजराइल मिलकर रोज ईरान से मुँह की खा रहे हैं। ईरान जिसका डिफेंस बजट अमेरिका के डिफेंस बजट का 2% भी नहीं है, जो सालों से कड़े प्रतिबंधों (Sanctions) की मार झेल रहा है, उसी ईरान ने बीते तीन हफ्तों में अमेरिका के महँगे हथियारों को या तो तोड़कर रख दिया है या उन्हें अपनी सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर भगा दिया है। हर दूसरा देश इसे देख रहा है और अपने वॉर डॉक्ट्रिन को अपडेट कर रहा है।
ट्रंप का शांति प्रस्ताव: जीत की घोषणा के घंटों बाद ही F-35 मार गिराया गया
Trump Iran War में 19 मार्च को व्हाइट हाउस में बैठे डोनल्ड ट्रंप ने शानदार जीत की घोषणा की। उन्होंने दावा किया कि ईरान की एंटी एयरक्राफ्ट इक्विपमेंट पूरी तरह तबाह हो चुकी है, ईरान में उड़ रहे अमेरिकी जेट्स पर कोई गोलाबारी भी नहीं कर पा रहा, अमेरिका का “कंप्लीट एयर डोमिनेशन” है। ट्रंप के शब्दों में: “देयर नेवी इज गन, देयर एयर फोर्स इज गन, देयर एयरक्राफ्ट इक्विपमेंट इज गन।”
लेकिन इस बयान को कुछ घंटे भी नहीं बीते थे कि ईरान ने एक वीडियो रिलीज किया। इसमें दावा किया गया कि उसने एक अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को सीधे हिट किया है। यह वही स्टेल्थ फाइटर जेट है जिसे अमेरिका “दुनिया का सबसे एडवांस्ड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट” बताकर अपने सहयोगी देशों को भारी रकम पर बेचता है। ट्रंप ने भारत को भी ये जेट बेचने की कोशिश की थी, लेकिन भारत ने समझदारी दिखाते हुए इसे नहीं खरीदा।
₹1000 करोड़ का F-35 जेट, 30 साल पुरानी मिसाइल से मार गिराया
पहली बार किसी एक्टिव वॉर जोन में F-35 स्टेल्थ जेट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। यह छोटी बात नहीं है। अमेरिका ने माना है कि इस जेट को डैमेज्ड हालत में पास के अमेरिकी बेस पर इमरजेंसी लैंडिंग करवाई गई और पायलट जिंदा है। हालाँकि इतने दिनों बाद भी इस क्षतिग्रस्त जेट की कोई तस्वीर रिलीज नहीं की गई है, जिससे यह सवाल उठता है कि वास्तविक नुकसान कितना भयंकर था।
Trump Iran War में ईरान ने यह कारनामा कैसे किया? F-35 को रेडार से अदृश्य (Invisible) रहने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी रिसर्च और डेवलपमेंट में अमेरिका ने खरबों डॉलर खर्च किए हैं और एक F-35 जेट की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट ही लगभग ₹1000 करोड़ है। लेकिन ईरान ने एक अलग रास्ता अपनाया।
F-35 की स्टेल्थ कैपेबिलिटी कन्वेंशनल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडार को धोखा देने के लिए बनाई गई है। लेकिन ईरान ने इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इंफ्रारेड (EOIR) सेंसर सिस्टम डिप्लॉय किया, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स नहीं बल्कि हीट सिग्नेचर डिटेक्ट करता है। कोई भी एयरक्राफ्ट कितना भी स्टेल्थ क्यों न हो, चलता तो वो इंजन के दम पर ही है और जहाँ इतना शक्तिशाली इंजन होगा, वहाँ भीषण गर्मी पैदा होगी। बस इसी गर्मी को EOIR सिस्टम ने पकड़ लिया।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि F-35 को डिटेक्ट करने के बाद ईरान ने एक मॉडिफाइड रूसी R-27 एयर-टू-एयर मिसाइल का इस्तेमाल किया। यह इंफ्रारेड गाइडेड मिसाइल है जो मैक 5 (ध्वनि की रफ्तार से पाँच गुना) तक की स्पीड पकड़ सकती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान ने यह मिसाइल 1990 में रूस से मँगवाई थी। यानी एक ट्रिलियन डॉलर प्रोग्राम से निकला हाईटेक F-35 जेट, 30 साल पुरानी मॉडिफाइड मिसाइल से बच नहीं पाया। अमेरिका के लिए Trump Iran War में शायद यह सबसे शर्मनाक बात है।
F-15 जेट्स का हश्र: फ्रेंडली फायर में 3, ईरान का दावा एक और मार गिराया
F-35 को निशाना बनाने के कुछ ही दिनों बाद ईरान ने एक और वीडियो रिलीज किया जिसमें दावा किया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास उड़ रहे एक अमेरिकी F-15 जेट को भी इंटरसेप्ट किया गया। ईरान का कहना है कि यह जेट उनकी एयर स्पेस का उल्लंघन कर रहा था, जिसके बाद उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने सरफेस-टू-एयर मिसाइल से उसे निशाना बनाया।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को अफवाह बताकर खारिज कर दिया है। लेकिन अगर यह दावा सच है तो यह इस जंग में गिरने वाला चौथा F-15 होगा। इससे पहले मार्च की शुरुआत में ही तीन F-15 फाइटर जेट्स मार गिराए गए थे, जिन्हें अमेरिका ने “फ्रेंडली फायर इंसिडेंट” बताया था। यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है कि किसी भी युद्ध में तीन अमेरिकी फाइटर जेट फ्रेंडली फायर में कैसे गिर सकते हैं।
$200 मिलियन के 12 MQ-9 रीपर ड्रोन ईरान ने तबाह किए
Trump Iran War में ड्रोन की कहानी पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना दिया जाना चाहिए। मार्च की शुरुआती तीन हफ्तों में अमेरिका को कम से कम 12 MQ-9 रीपर ड्रोन से हाथ धोना पड़ा। इनमें से ज्यादातर ईरान ने मार गिराए। हर ड्रोन की कीमत 16 मिलियन डॉलर है, यानी कुल मिलाकर करीब 200 मिलियन डॉलर (लगभग 1,700 करोड़ रुपये) का नुकसान।
यह वही ड्रोन प्रोग्राम है जिसके बारे में अमेरिकी विशेषज्ञ सालों से चिंता जता रहे थे। एक्सपर्ट्स का मानना था कि ये ड्रोन धीमे (Slow Moving) और नॉन-स्टेल्थ हैं, किसी भी एडवांस्ड विरोधी के खिलाफ ये बेकार साबित होंगे। यूएस एयरफोर्स ने खुद 2020 में इनकी प्रोडक्शन बंद कर दी थी। ईरान ने इन एक्सपर्ट्स को सही साबित कर दिया: बिना एडवांस्ड हथियारों के इतने महँगे हाईटेक ड्रोन तबाह कर दिए। दूसरी तरफ ईरान के अपने सस्ते और किफायती शाहेद ड्रोन अमेरिका के नाक में दम किए हुए हैं।
USS Gerald R. Ford: $13 बिलियन का कैरियर, लॉन्ड्री रूम में लगी आग से बेकार
Trump Iran War की समुद्री कहानी अमेरिका के लिए हवाई युद्ध से भी ज्यादा शर्मनाक साबित हो रही है। अमेरिकी नौसेना (US Navy) को दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेना माना जाता है। इस युद्ध में ट्रंप प्रशासन ने दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स डिप्लॉय किए: USS Gerald R. Ford और USS Abraham Lincoln। इसके अलावा एम्फीबियस असॉल्ट शिप USS Tripoli भी तैनात किया गया।
एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में एक विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर, कई डिस्ट्रॉयर्स, एक-दो सबमरीन और हजारों सेलर होते हैं। एक कैरियर अकेले इतनी एयर पावर कैरी करता है जितनी किसी छोटे देश की पूरी वायुसेना होती है।
USS Gerald R. Ford, अमेरिकी नौसेना का सबसे नया, सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। इसकी कंस्ट्रक्शन कॉस्ट $13 बिलियन है और इसे “दुनिया का सबसे बड़ा वॉरशिप” कहा जाता है। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार 12 मार्च को इस शिप के लॉन्ड्री रूम में आग लग गई। यह आग इतनी भीषण थी कि इसे बुझाने में 30 घंटे लगे। 600 से ज्यादा क्रू मेंबर्स को अपने बंकर बेड्स छोड़कर फर्श या टेबल पर सोना पड़ा। अब इस कैरियर को रिपेयर के लिए ग्रीस में अमेरिकी नेवी बेस पर भेज दिया गया है, यानी फ्रंट लाइन से पूरी तरह बाहर।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस शिप के सेलर्स का मनोबल पहले से ही गिरा हुआ था। हजारों सेलर्स 10 महीने से ज्यादा समय से समुद्र पर थे, उनका डिप्लॉयमेंट पीरियड बार-बार बढ़ाया जा रहा था और इस नए युद्ध में उन्हें जबरदस्ती धकेल दिया गया। इसीलिए अब यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ सेलर्स ने यह आग जानबूझकर लगाई ताकि उनका मिशन खत्म हो और वे जल्दी घर लौट सकें।
USS Abraham Lincoln: ईरान की मिसाइल के डर से 1000 किमी पीछे हटा
Trump Iran War में USS Abraham Lincoln की कहानी और भी दिलचस्प है। युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरान ने बार-बार दावा किया कि उसने इस कैरियर को अपनी बैलिस्टिक मिसाइल का निशाना बनाया और इसे क्षति पहुँचाई। अमेरिका ने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि USS Lincoln अभी भी ईरानी एयर स्पेस को डोमिनेट करने में मदद कर रहा है, फ्लाइट्स यहीं से टेक ऑफ कर रही हैं।
लेकिन स्वतंत्र रिपोर्ट्स बताती हैं कि युद्ध के शुरुआती दिनों के बाद ईरानी हमले के डर से इस कैरियर ग्रुप को ईरान के तट से 1000 किलोमीटर पीछे हटा दिया गया है। आज भी यह ग्रुप ईरान के आसपास जाने की हिम्मत नहीं कर रहा है। यह अपने आप में इस बात का सबूत है कि दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना ईरान के ड्रोन और मिसाइल से कितना डरती है। शायद इन विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर्स का युग अब खत्म हो रहा है।
अमेरिका की आँखें ही फोड़ दीं: $1.1 बिलियन का रेडार तबाह
Trump Iran War में F-35 को गिराने से भी ज्यादा गंभीर घाव अमेरिका को दूसरी जगह लगा है। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने सहयोगी देशों के पास THAAD और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम सालों से तैनात कर रखे हैं। ये दुनिया के सबसे एडवांस्ड और महँगे एयर डिफेंस सिस्टम्स में से हैं। एक THAAD बैटरी की कीमत $800 मिलियन से ऊपर है और एक पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर की कीमत 3 से 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल है।
इन्हें खास तौर पर इसीलिए तैनात किया गया था कि ईरान जैसे देश जब बैलिस्टिक मिसाइल दागें तो उन्हें इंटरसेप्ट किया जा सके। यही अमेरिका की डिफेंस शील्ड थी मिडिल ईस्ट में। लेकिन युद्ध के पहले दो हफ्तों के अंदर ईरान के हमलों ने इस शील्ड को और अमेरिकी सैन्य बेसेज को करोड़ों डॉलर का नुकसान पहुँचाया। दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम भी अमेरिकी बेसेज, उनके हितों और उनके सहयोगियों को ईरान की मिसाइल और ड्रोन से बचा नहीं पाए।
युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरान ने अमेरिका का AN/FPS-132 रेडार नष्ट कर दिया। यह इतना एडवांस्ड रेडार था कि 5000 किलोमीटर के दायरे को स्कैन कर सकता था। इसकी कीमत $1.1 बिलियन (करीब 9,400 करोड़ रुपये) थी और अमेरिका इसे दोबारा कब बना पाएगा, किसी को नहीं पता। हालत यह हो गई है कि अमेरिका को युद्ध के बीच में ईस्ट एशिया में लगे पैट्रियट सिस्टम्स को मिडिल ईस्ट मँगवाना पड़ा, लेकिन उसके बाद भी ईरान की मिसाइलों को रोक पाना अमेरिका के बस की बात नहीं रही। आज ईरान जब चाहे इजराइल और खाड़ी देशों पर मिसाइल दाग सकता है क्योंकि अमेरिका की “आँखें” यानी उसके रेडार ही नोच लिए गए हैं।
ट्रंप को शांति क्यों चाहिए: ना शुरुआत की प्लानिंग, ना अंत की
अब यह साफ समझ आता है कि डोनल्ड ट्रंप को शांति क्यों चाहिए। अगर ईरान हमले जारी रखता है तो अमेरिका के पास डिफेंस कैपेबिलिटीज बची नहीं हैं। तेल अवीव पर बम गिर सकते हैं और इजराइल उन्हें रोक भी नहीं सकता। ट्रंप इसीलिए मजबूर होकर कह रहे हैं कि “चलो ठीक है, अगले पाँच दिन शांति दे दो।”
Trump Iran War में प्रेसिडेंट ट्रंप इतनी बुरी तरह फँस चुके हैं कि वे न तो ऑपरेशंस एक्सपैंड कर पा रहे हैं और न ही सम्मानजनक तरीके से पीछे हट पा रहे हैं। हर घंटे वे कुछ अलग कह रहे हैं: कभी दावा करते हैं कि “हम जंग जीत चुके हैं, ऑपरेशंस वाइंड डाउन होने वाले हैं”, अगले ही घंटे नए हमलों की धमकी दे डालते हैं। कभी सहयोगी देशों (Allies) को जीती हुई जंग से दूर रहने को कहते हैं, फिर दो घंटे बाद कहते हैं “हमें मदद करो, तुम्हारा फर्ज बनता है।”
28 फरवरी को जब यह जंग शुरू हुई, तभी से यह बात साफ थी कि अमेरिका के वॉर गोल्स स्पष्ट रूप से परिभाषित (Clearly Defined) नहीं हैं। अमेरिकी सैनिक लड़ तो रहे हैं, लेकिन किसके लिए और किस लक्ष्य के लिए, यह न तब साफ था न आज है। अंग्रेजी में कहावत है: “A sword is only as good as the man who wields it” यानी दुनिया के सबसे अच्छे हथियार भी बेकार हैं अगर चलाने वाला ही बेवकूफ हो।
ईरान बातचीत से इनकार: “पहले अमेरिका खाड़ी से बाहर जाए”
Trump Iran War में ईरान ने सीजफायर के अमेरिकी प्रस्ताव को बार-बार ठुकरा दिया है। ईरान का कहना साफ है कि “हमें अमेरिका खाड़ी (Gulf) से बाहर चाहिए, उसके पहले हम बात भी नहीं करना चाहते।” ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले भी अमेरिका ने बातचीत की, ईरान ने कई रियायतें (Concessions) दीं, लेकिन फिर अमेरिका ने उनके लीडरशिप को मार गिराया। इसीलिए इस बार ईरान भरोसा करने को तैयार नहीं है।
ट्रंप ने खुद स्वीकार किया: “हमने तुम्हें बहुत बार धोखा दिया है।” लेकिन इसके बावजूद वे पाँच दिन के पॉज का एकतरफा ऐलान कर रहे हैं। असल वजह यह है कि अगर ईरान के बैलिस्टिक हमले और चलते रहे तो अमेरिका और इजराइल के पास बचाव की कोई व्यवस्था ही नहीं बचेगी। ईरान भली-भाँति जानता है कि अगर इस बार मौका हाथ से गया तो अगली बार अमेरिका और इजराइल उसे छोड़ेंगे नहीं। इसीलिए वह अपने प्रोग्राम पर डटा हुआ है।
5000 अमेरिकी सैनिक ईरान रवाना: ग्राउंड ऑफेंसिव की तैयारी?
हर तरफ से मार खा रहे अमेरिका के पास अब अपने सैनिकों को जमीन पर उतारने के अलावा कोई खास विकल्प बचा नहीं है। अमेरिकी मीडिया में खबर आ चुकी है कि अमेरिका ने ईरान के लिए 5000 सैनिक रवाना कर दिए हैं। ईरान के खर्ग आइलैंड पर ग्राउंड ऑफेंसिव शुरू करने की आशंका जताई जा रही है।
लेकिन सबको पता है कि ग्राउंड ऑफेंसिव अमेरिका के लिए बेहद महँगा साबित हो सकता है। ईरानी सैनिकों के साथ-साथ अमेरिकी जानें भी जाएँगी, यह बात तय है। ईरान ने पहले ही कहा है कि वह ग्राउंड असॉल्ट का इंतजार कर रहा है। एक ऐसे देश के खिलाफ जमीनी लड़ाई जो अपनी धरती पर लड़ रहा हो, इतिहास गवाह है कि ऐसी लड़ाइयाँ हमेशा हमलावर के लिए विनाशकारी साबित हुई हैं।
पैसे और टेक्नोलॉजी नहीं, फोकस और प्लानिंग जीतती है जंग
Trump Iran War ने एक बात पूरी तरह साफ कर दी है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि आज अमेरिका से ज्यादा ईरान ज्यादा फोकस्ड, ज्यादा अनुशासित (Disciplined) दिख रहा है। शायद यही फोकस, यही अनुशासन, यही प्लानिंग ईरान का “सीक्रेट वेपन” है। अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बेहतरीन फौज थी, लेकिन प्लानिंग “जीरो बटा अंडा” थी।
युद्ध की परिभाषा ही बदल गई है। एक तरफ बहुत सारा पैसा है और दूसरी तरफ बहुत सारी स्मार्ट थिंकिंग। ईरान जैसा देश जिसके पास न अमेरिका जैसी टेक्नोलॉजी है, न उतने पैसे, उसने साबित कर दिया कि रणनीति, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के आगे दुनिया के सबसे महँगे हथियार भी बेकार हो सकते हैं। यह सबक सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, पूरी दुनिया के लिए है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Trump Iran War में ईरान ने पहली बार F-35 स्टेल्थ जेट मार गिराया, 30 साल पुरानी मॉडिफाइड R-27 मिसाइल और EOIR सेंसर्स का इस्तेमाल करके।
- अमेरिका को 12 MQ-9 रीपर ड्रोन (~$200 मिलियन) गँवाने पड़े, $1.1 बिलियन का AN/FPS-132 रेडार तबाह हुआ, THAAD-पैट्रियट शील्ड लगभग खत्म।
- USS Gerald R. Ford ($13 बिलियन) आग से क्षतिग्रस्त होकर फ्रंट लाइन से बाहर, USS Abraham Lincoln ईरानी तट से 1000 किमी पीछे हटा।
- ट्रंप ने 5 दिन का एकतरफा पॉज घोषित किया लेकिन ईरान बातचीत से इनकार कर रहा है, कहा: “पहले अमेरिका खाड़ी से बाहर जाए।”








