मंगलवार, 5 मई 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Chinese Weapons Failing: Iran War में चीनी हथियारों की पोल खुली, तीन देशों में फेल

Chinese Weapons Failing: Iran War में चीनी हथियारों की पोल खुली, तीन देशों में फेल

ईरान, पाकिस्तान और वेनेजुएला में चाइनीस एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरह धराशायी, ग्लोबल आर्म्स मार्केट में चीन की साख को करारा झटका

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
मंगलवार, 24 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय
A A
0
Chinese Weapons Failing
104
SHARES
691
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Chinese Weapons Failing का मुद्दा अब दुनिया भर में सबसे बड़ी चर्चा बन गया है। चल रहे ईरान–अमेरिका युद्ध में चीन के बनाए एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरह फेल हो गए हैं। जंग के पहले ही दिन जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 500 से ज्यादा टारगेट्स पर हमला किया, तो ईरान में इंस्टॉल किया गया पूरा चाइनीस डिफेंस सिस्टम ध्वस्त हो गया। न कोई मिसाइल डिटेक्ट हो पाई, न कोई एयरक्राफ्ट रोका जा सका। यह पहली बार नहीं है: इससे पहले पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और वेनेजुएला में भी चाइनीस हथियार पूरी तरह नाकाम साबित हो चुके हैं।

चीन: दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक, लेकिन भरोसा शून्य

चीन आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक (Arms Exporter) बन चुका है। बहुत सारे देश चीन से हथियार खरीद रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है सस्ता दाम। चीन अपने वेपन्स इतनी कम कीमत पर बेचता है कि कई बार उसे खुद भी नुकसान होता होगा, लेकिन वह अपनी सॉफ्ट पावर बढ़ाने के लिए ऐसा करता है। पाकिस्तान, ईरान, वेनेजुएला और कई अफ्रीकी तथा एशियाई देश Chinese Weapons Failing के बावजूद इनके प्रमुख खरीदार रहे हैं।

चीन अपने सिस्टम की मार्केटिंग बड़ी शान से करता है। दावा किया जाता है कि इनमें एंटी-स्टेल्थ कैपेबिलिटी है, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर रेजिस्टेंस है, और इन्हें अमेरिका और रूस के सिस्टम्स के बराबर बताया जाता है। लेकिन जब रियल वॉर (Real War) का समय आता है तो मार्केटिंग के दावों और युद्धभूमि की हकीकत के बीच ज़मीन-आसमान का फ़र्क दिखता है।

ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने चाइनीस हथियारों की असलियत दुनिया के सामने रख दी

Chinese Weapons Failing की कहानी ईरान से पहले शुरू होती है पाकिस्तान से। पिछले साल जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर जबरदस्त हमला किया, तब पाकिस्तान के पास चीन निर्मित तीन प्रमुख हथियार प्रणालियाँ तैनात थीं जो तीनों ही बुरी तरह फेल हो गईं।

पहला था HQ-9 लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम। यह वही सिस्टम है जिसे चीन रूस के S-300 की बराबरी का बताता है। इसका मूल काम यही है कि अगर कोई दुश्मन मिसाइल आए तो रेडार उसे डिटेक्ट करे और हवा में ही इंटरसेप्ट करके खत्म कर दे। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलें दागीं तो HQ-9 एक भी मिसाइल को इंटरसेप्ट नहीं कर पाया। जिस काम के लिए इसे बनाया गया था, वही काम यह करने में पूरी तरह विफल रहा।

दूसरा था YLC-8E एंटी-स्टेल्थ रेडार, जिसे खास तौर पर स्टेल्थ एयरक्राफ्ट को डिटेक्ट करने के लिए बनाया गया था। लेकिन भारत ने अपने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (Electronic Warfare) सिस्टम से इस रेडार को पूरी तरह जैम कर दिया। यह काम ही नहीं कर पा रहा था। आपको याद होगा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने लाहौर के पास एक रेडार सिस्टम पर हमला किया था, वह यही YLC-8E था जिसे भारत ने खत्म कर दिया।

तीसरा था PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल, जिसे फाइटर जेट में इंस्टॉल किया जाता है। चीन इसे अपना एडवांस्ड बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल बताता है जिसमें एक्टिव रेडार सीकर है। पाकिस्तान ने भारत पर बहुत सारी मिसाइलें बरसाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने अपने सभी डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट करके उन सबको हवा में ही खत्म कर दिया। PL-15E भी अपने इंटेंडेड टारगेट तक पहुँचने में पूरी तरह नाकाम रहा।

यह भी पढे़ं 👇

Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

मंगलवार, 5 मई 2026
IMD Weather Alert

IMD Weather Alert: 10 राज्यों में रेड अलर्ट, 70 kmph की तेज हवाओं का खतरा

मंगलवार, 5 मई 2026
May 5 Historical Events

May 5 Historical Events: जानें वो घटनाएं जिन्होंने बदला इतिहास

मंगलवार, 5 मई 2026
Breaking News Live Updates 5 May 2026

Breaking News Live Updates 5 May 2026: Big Developments, हर खबर सबसे तेज

मंगलवार, 5 मई 2026
भारत का S-400 चमका, पाकिस्तान की एक भी मिसाइल भारतीय धरती तक नहीं पहुँच सकी

Chinese Weapons Failing के ठीक उलट, भारत ने रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से दुनिया को दिखा दिया कि असली युद्ध में क्या काम करता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की एक भी मिसाइल भारत की धरती तक नहीं पहुँच सकी। जो भी खतरा आया, भारत ने उसे हवा में ही खत्म कर दिया। यह उस समय भारत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

यह बात इसलिए मायने रखती है क्योंकि पेपर पर या टेस्टिंग के दौरान कोई भी सिस्टम अच्छा दिख सकता है, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब वह रियल वॉर में खुद को साबित करता है। रूस का S-400 इराक, सीरिया, यूक्रेन और गल्फ वॉर जैसे कई युद्धों में पहले ही टेस्ट हो चुका है, इसीलिए वह बेहतर साबित हुआ। चीन के सिस्टम्स केवल अभ्यासों (Exercises) में ही टेस्ट हुए हैं, असली युद्ध की आग में कभी नहीं तपे।

वेनेजुएला में भी वही कहानी: JY-27A रेडार अमेरिकी हमले में धराशायी

Chinese Weapons Failing का सिलसिला वेनेजुएला में भी दोहराया गया। वेनेजुएला के पास चीन निर्मित JY-27A रेडार सिस्टम तैनात था। जब अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया तो यह रेडार सिस्टम दुश्मन को डिटेक्ट तक नहीं कर पाया। एक बार फिर चाइनीस तकनीक ने अपने खरीदार को निराश किया। तीन अलग-अलग देशों में, तीन अलग-अलग युद्ध परिस्थितियों में, चीनी हथियारों की एक ही कहानी रही: विफलता।

ईरान का HQ-9B: एडवांस्ड वर्जन भी 500 मिसाइलों के सामने ढेर

ईरान ने पाकिस्तान वाले HQ-9 का और भी एडवांस्ड वर्जन HQ-9B खरीदा था। चीन ने दावा किया था कि इसमें इंप्रूव्ड सीकर है, बेटर इलेक्ट्रॉनिक रेजिस्टेंस है और एक्सटेंडेड रेंज है। ईरान को भी पूरा भरोसा था कि अगर कोई मिसाइल उनकी तरफ आएगी तो यह सिस्टम उसे डिटेक्ट करेगा और हवा में ही खत्म कर देगा।

लेकिन Chinese Weapons Failing का सबसे बड़ा उदाहरण यहीं दिखा। जंग के पहले ही दिन जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 500 से ज्यादा टारगेट्स पर एक साथ हमला किया, तो पूरा चाइनीस सिस्टम ढह गया। जब वेस्टर्न एयरक्राफ्ट और मिसाइलें ईरान के एयर स्पेस में घुसीं तो HQ-9B ने काम ही नहीं किया। जिस मल्टी-लेयर इंटीग्रेशन का दावा किया गया था वह बेहद कमजोर निकला और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के सामने यह सिस्टम पूरी तरह बेबस रहा।

चाइनीस हथियार क्यों फेल हो रहे हैं: चार बड़े तकनीकी कारण

Chinese Weapons Failing के पीछे कई गंभीर तकनीकी कारण हैं जो अब एक-एक करके सामने आ रहे हैं।

पहला कारण: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वल्नेरेबिलिटी। आज के आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम बेहद अहम है। जैमिंग, डिसेप्शन, रेडार स्पूफिंग और साइबर इंटरफेरेंस: ये सब इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के हिस्से हैं। वेस्टर्न फोर्सेज के पास इसका दशकों का अनुभव है जो चीन के पास नहीं है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अपने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से चाइनीस रेडार को पूरी तरह जैम कर दिया, और ईरान में भी वेस्टर्न इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने चाइनीस सिस्टम को ओवरवेल्म कर दिया।

दूसरा कारण: कॉम्बैट एक्सपीरियंस गैप। चीन के हथियार कभी भी किसी असली युद्ध में टेस्ट नहीं हुए हैं। वे केवल अभ्यासों (Exercises) में ही आजमाए गए हैं। दूसरी तरफ अमेरिका और रूस के सिस्टम इराक, सीरिया, यूक्रेन और गल्फ वॉर में बार-बार टेस्ट हो चुके हैं। जब पिछले साल भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ तो यह खबर भी आई थी कि चीन खुश था कि कम से कम उसके हथियारों की रियल टेस्टिंग तो हो रही है पाकिस्तान में। लेकिन वह “टेस्टिंग” उसकी शर्मिंदगी का कारण बन गई।

तीसरा कारण: एक्सपोर्ट डाउनग्रेड। यह संभावना बहुत प्रबल है कि चीन अपने सबसे अच्छे वर्जन अपने पास रखता है और जो डाउनग्रेडेड (कमजोर) वर्जन है, वही दूसरे देशों को निर्यात करता है। इसीलिए ये सिस्टम असली युद्ध में काम नहीं कर पा रहे।

चौथा कारण: इंटीग्रेशन और नेटवर्किंग की कमी। आधुनिक एयर डिफेंस में सेंसर फ्यूज़न, रियल-टाइम बैटलफील्ड डेटा शेयरिंग और सैटेलाइट इंटीग्रेशन बेहद जरूरी है। पाकिस्तान, वेनेजुएला और ईरान के पास वह एडवांस्ड सैटेलाइट नेटवर्क और सेंसर इंटीग्रेशन नहीं है जो चीन के पास खुद है। हो सकता है कि यही हथियार अगर चीन खुद इस्तेमाल करे तो बेहतर काम करें, लेकिन बिना प्रॉपर इंटीग्रेशन के ये किसी और देश में बेकार साबित हो रहे हैं।

ग्लोबल आर्म्स मार्केट में चीन की साख दाँव पर

Chinese Weapons Failing का सबसे बड़ा असर ग्लोबल आर्म्स मार्केट पर पड़ने वाला है। अब तक कई देश सस्ते दाम देखकर चीनी हथियार खरीद लेते थे। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि सस्ते में लेकर करोगे क्या, जब वह हथियार आपको बचा ही नहीं पाएगा?

ईरान, पाकिस्तान और वेनेजुएला में लगातार फेल होने के बाद दुनिया के बाकी देश अब चाइनीस हथियार खरीदने से पहले दस बार सोचेंगे। उनका भरोसा टूट चुका है। इसके बदले वेस्टर्न सिस्टम जैसे पैट्रियट मिसाइल डिफेंस और अन्य अमेरिकी व यूरोपीय हथियारों की माँग बढ़ सकती है। खरीदार देश अब सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि विश्वसनीयता (Reliability) को भी गंभीरता से आँकेंगे।

क्या चीनी हथियार चीन की अपनी सेना में काम करेंगे?

यह एक अहम सवाल है जो Chinese Weapons Failing की बहस में बार-बार उठ रहा है। एयर डिफेंस का प्रदर्शन सिर्फ हथियार पर नहीं, बल्कि कई और चीजों पर भी निर्भर करता है। यही रेडार अगर चीन के पास हो तो शायद बेहतर काम करे, क्योंकि चीन के पास इसकी प्रॉपर ट्रेनिंग है, एडवांस्ड सैटेलाइट सिस्टम है, प्रॉपर नेटवर्क इंटीग्रेशन है। आज के दौर में कोई भी हथियार अकेले काम नहीं करता, हर चीज इंटीग्रेटेड होनी चाहिए।

लेकिन यह तर्क चीन के हथियार निर्यात के लिए और भी खतरनाक है। अगर ये सिस्टम सिर्फ चीन के अपने हाथों में काम करते हैं और बाकी किसी देश में नहीं, तो कोई देश इन्हें क्यों खरीदेगा?

कोई भी डिफेंस सिस्टम 100% नहीं, लेकिन चीन की स्थिति सबसे खराब

यह समझना भी जरूरी है कि कोई भी डिफेंस सिस्टम दुनिया में 100% अभेद्य (Foolproof) नहीं होता। अभी चल रहे ईरान युद्ध में अमेरिका को भी नुकसान हो रहा है। ईरान ने अमेरिकी ड्रोन, जेट और रेडार तबाह किए हैं। लेकिन Chinese Weapons Failing जिस पैमाने पर हो रही है, वह चीन के लिए बेहद चिंताजनक है।

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में यह साबित किया कि उसका रक्षा तंत्र रियल वॉर में काम करता है। पाकिस्तान की एक भी मिसाइल भारतीय धरती तक नहीं पहुँच सकी और हर खतरे को हवा में ही खत्म कर दिया गया। यह एक बेहद बड़ी उपलब्धि थी। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान, ईरान और वेनेजुएला तीनों में चाइनीस सिस्टम पूरी तरह धराशायी हो गए। यह अंतर बताता है कि सिर्फ पैसा बचाकर सस्ते हथियार खरीदना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

ईरान वॉर खत्म होने के बाद आएगा असली हिसाब-किताब

यह बात ध्यान रखने योग्य है कि डिफेंस की रिपोर्टिंग एक्टिव कॉन्फ्लिक्ट (चालू युद्ध) के दौरान अधूरी होती है। जब ईरान युद्ध पूरी तरह खत्म होगा, तब और विस्तृत आकलन (Assessment) सामने आएगा कि Chinese Weapons Failing का वास्तविक पैमाना क्या था। लेकिन जो तस्वीर अभी तक सामने आई है, वह चीन के हथियार निर्यात उद्योग के लिए विनाशकारी है।

अगर यह सब सच साबित होता है तो चीन का आर्म्स एक्सपोर्ट बुरी तरह प्रभावित होगा। खरीदार देश अब कॉस्ट (कीमत) और रिलायबिलिटी (विश्वसनीयता) दोनों को गहराई से जाँचेंगे। सस्ता लेकर जान गँवाना किसी को मंजूर नहीं होगा। यह ईरान युद्ध चीन के लिए सिर्फ भू-राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक हार भी साबित हो सकता है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • Chinese Weapons Failing: ईरान में HQ-9B, पाकिस्तान में HQ-9, YLC-8E रेडार व PL-15E मिसाइल, और वेनेजुएला में JY-27A रेडार: तीनों देशों में चाइनीस हथियार पूरी तरह नाकाम रहे।
  • ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से चाइनीस रेडार जैम किया, लाहौर का YLC-8E रेडार तबाह किया, पाकिस्तान की एक भी मिसाइल भारतीय धरती तक नहीं पहुँची।
  • चाइनीस हथियारों की विफलता के चार बड़े कारण: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वल्नेरेबिलिटी, रियल कॉम्बैट अनुभव की कमी, एक्सपोर्ट डाउनग्रेड, और इंटीग्रेशन-नेटवर्किंग की कमी।
  • ग्लोबल आर्म्स मार्केट में चीन की साख को करारा झटका, खरीदार देश अब विश्वसनीयता को प्राथमिकता देंगे।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Chinese Weapons ईरान युद्ध में कैसे फेल हुए?

ईरान में चीन निर्मित HQ-9B एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम इंस्टॉल था। लेकिन जंग के पहले दिन जब अमेरिका-इजराइल ने 500 से ज्यादा टारगेट्स पर एक साथ हमला किया, तो यह सिस्टम न मिसाइलें डिटेक्ट कर पाया, न एयरक्राफ्ट रोक पाया। वेस्टर्न इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने इसे पूरी तरह ओवरवेल्म कर दिया।

प्रश्न 2: ऑपरेशन सिंदूर में चीनी हथियारों को भारत ने कैसे बेकार कर दिया?

भारत ने अपने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से पाकिस्तान का YLC-8E एंटी-स्टेल्थ रेडार पूरी तरह जैम कर दिया और लाहौर का रेडार तबाह किया। HQ-9 सिस्टम भारतीय मिसाइलों को इंटरसेप्ट नहीं कर पाया और PL-15E मिसाइलें भी भारतीय डिफेंस से हवा में ही खत्म कर दी गईं।

प्रश्न 3: चीनी हथियार बार-बार क्यों फेल हो रहे हैं?

इसके चार प्रमुख कारण हैं: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के प्रति कमजोरी, असली युद्ध में टेस्टिंग का अनुभव न होना, संभावित एक्सपोर्ट डाउनग्रेड (कमजोर वर्जन निर्यात करना), और खरीदार देशों में प्रॉपर सैटेलाइट-सेंसर इंटीग्रेशन का अभाव।

Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Trump Iran War: ईरान के सामने घुटनों पर अमेरिका, 5 दिन का पॉज क्यों?

Next Post

Strait of Hormuz Toll: ईरान ने लगाया ₹18 करोड़ का टोल, ट्रंप ने दी 48 घंटे की धमकी

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

मंगलवार, 5 मई 2026
IMD Weather Alert

IMD Weather Alert: 10 राज्यों में रेड अलर्ट, 70 kmph की तेज हवाओं का खतरा

मंगलवार, 5 मई 2026
May 5 Historical Events

May 5 Historical Events: जानें वो घटनाएं जिन्होंने बदला इतिहास

मंगलवार, 5 मई 2026
Breaking News Live Updates 5 May 2026

Breaking News Live Updates 5 May 2026: Big Developments, हर खबर सबसे तेज

मंगलवार, 5 मई 2026
5 May 2026 Rashifal

5 May 2026 Rashifal: बड़ा बदलाव! आज 5 राशियों की चमकेगी किस्मत

मंगलवार, 5 मई 2026
PPSC Member Sunil Kapoor Oath

Punjab PPSC में नए Non-Official Member को मिली नियुक्ति, Governor ने दिलाई शपथ

सोमवार, 4 मई 2026
Next Post
Strait of Hormuz Toll

Strait of Hormuz Toll: ईरान ने लगाया ₹18 करोड़ का टोल, ट्रंप ने दी 48 घंटे की धमकी

LPG to PNG Shift

LPG to PNG Shift: अडानी का ₹20,000 करोड़ का दांव, आत्मनिर्भरता या नया जाल?

Bhagat Singh Biography

Bhagat Singh Biography: बचपन में बोई बंदूक, 23 साल में दी शहादत

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।