Laljit Bhullar Case अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। Punjab Warehousing Corporation के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर डॉ. गगनदीप सिंह रंधावा को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के इस हाई प्रोफाइल मामले में पुलिस ने अब वैज्ञानिक और डिजिटल सबूतों का एक मजबूत जाल तैयार कर लिया है। यह केस अब महज जुबानी बयानों पर नहीं, बल्कि ठोस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर खड़ा है।
Amritsar की रणजीत एवेन्यू पुलिस ने Chief Judicial Magistrate सुप्रीत कौर की अदालत में करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में पंजाब के साबका ट्रांसपोर्ट मंत्री Laljit Singh Bhullar, उनके पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और निजी सहायक दिलबाग सिंह को आरोपी बनाया गया है।
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डॉ. रंधावा के आखिरी दिनों की पूरी कहानी
देखा जाए तो यह केस सिर्फ एक सुसाइड केस नहीं रह गया है। हफ्तों की मेहनत के बाद पुलिस ने जो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य इकट्ठे किए हैं, वे डॉ. रंधावा के आखिरी दिनों की हर गतिविधि और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की पूरी कहानी बयान करते हैं।
समझने वाली बात यह है कि पुलिस ने मृतक के मोबाइल से वह WhatsApp कॉल डिटेल बरामद कर ली है, जो 13 मार्च को भुल्लर द्वारा रंधावा को बार-बार की गई थी। यही वह दिन था जब कथित तौर पर डॉ. रंधावा को भुल्लर के घर पर बुलाकर उनके साथ मारपीट और बेइज्जती की गई थी।
दिलचस्प बात यह है कि पुलिस के पास अब मोबाइल टॉवर डंप लोकेशन और CCTV फुटेज भी है, जो साबित करते हैं कि 13 मार्च को डॉ. रंधावा, मंत्री लालजीत भुल्लर, उनके पिता, PA दिलबाग और एक अन्य अधिकारी हरप्रीत सिंह सभी एक ही जगह मौजूद थे।
दो वीडियो बनेंगे केस का आधार
इस केस में सबसे महत्वपूर्ण सबूत दो वीडियो हैं जो पूरे मामले को पलट सकते हैं।
पहली वीडियो: यह महज 12 सेकंड की एक भयावह वीडियो है, जो डॉ. रंधावा ने सल्फास की गोलियां खाने के बाद अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड की थी। यह वीडियो उनकी मानसिक स्थिति और आत्महत्या की तरफ बढ़ते कदमों का सीधा सबूत है।
दूसरी वीडियो: यह फिलहाल फॉरेंसिक जांच के दायरे में है। कथित तौर पर यह वीडियो लालजीत भुल्लर के घर-कम-दफ्तर में पिस्टल की नोक पर बनवाई गई थी, जिसमें डॉ. रंधावा को दूसरी तरफ से 10 लाख रुपये रिश्वत लेने की बात कबूल करने के लिए मजबूर किया गया था।
हैरान करने वाली बात तो यह है कि सरहाली टोल प्लाजा की CCTV फुटेज से यह पूरी तरह साबित हो गया है कि सभी आरोपी 13 मार्च को एक साथ थे।
पीड़ित परिवार के गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का दोष है कि तत्कालीन मंत्री लालजीत भुल्लर ने डॉ. रंधावा पर नियमों के विपरीत जाकर अपने पिता को वेयरहाउस का ठेका देने के लिए दबाव बनाया था। और जब डॉ. रंधावा ने इनकार किया, तो उन्हें जलील किया गया और धमकाया गया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि डॉ. रंधावा एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन किया, लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
मृतक की पत्नी उपिंदरजीत कौर और उनके वकील सरबजीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि पुलिस ने जांच में लापरवाही बरती है।
BNS की कौन-कौन सी धाराएं लगाई गईं?
गंभीर राजनीतिक विवाद के बाद 22 मार्च को पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) के तहत मामला दर्ज किया था। शुरुआत में जो धाराएं लगाई गई थीं, वे थीं:
| धारा | आरोप |
|---|---|
| 108 | आत्महत्या के लिए उकसाना |
| 351(3) | धमकाना और डराना |
| 3(5) | आपराधिक साजिश |
लेकिन जांच के दौरान जब आरोपी लालजीत भुल्लर ने अपने घर की DVR हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन पुलिस को सौंपने से इनकार कर दिया, तो पुलिस ने केस में दो और धाराएं जोड़ दीं:
धारा 238: सबूत मिटाना
धारा 115(2): चोट पहुंचाना
अगर गौर करें तो ये सभी धाराएं गंभीर प्रकृति की हैं और इनमें लंबी सजा का प्रावधान है।
50 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज होंगे
केस में 50 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज कराए जाएंगे। इनमें शामिल हैं:
✓ पीड़ित परिवार के सदस्य
✓ वे सहकर्मी जो 13 मार्च को डॉ. रंधावा के साथ भुल्लर के घर गए थे
✓ अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ
✓ पुलिस अधिकारी
✓ फॉरेंसिक विशेषज्ञ
हॉस्पिटल की CCTV फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट्स को भी चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया है। ये सभी साक्ष्य मिलकर एक मजबूत केस तैयार करेंगे।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
राहत की बात तो यह नहीं है, बल्कि चिंता का विषय है कि मृतक के परिवार ने अमृतसर पुलिस की कार्यवाही पर गंभीर शंकाएं जताई हैं।
परिवार के वकील सरबजीत सिंह ने आरोप लगाया कि रिमांड के दौरान साबका मंत्री लालजीत भुल्लर को ‘VIP ट्रीटमेंट’ दिया गया। इसकी वजह से पुलिस:
❌ उनका मोबाइल बरामद नहीं कर सकी
❌ DVR की हार्ड डिस्क नहीं मिल सकी
❌ वह पिस्टल नहीं मिली जिससे रंधावा पर हमला हुआ था
❌ बाकी नामजद मुलजिमों को गिरफ्तार नहीं कर सकी
सवाल उठता है कि आखिर पुलिस को इतनी परेशानी क्यों हो रही है? क्या वाकई में VIP संस्कृति जांच में बाधा बन रही है?
परिवार अदालत पहुंचा
इन सभी कमियों को देखते हुए पीड़ित परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मांग की है कि:
📌 रणजीत एवेन्यू थाने की CCTV फुटेज सुरक्षित रखी जाए
📌 CIA स्टाफ की फुटेज भी सुरक्षित रखी जाए
📌 मंडी गोबिंदगढ़ थाने (जहां से गिरफ्तारी हुई) की फुटेज सुरक्षित रखी जाए
📌 जांच को किसी अन्य एजेंसी को ट्रांसफर किया जाए
परिवार का मानना है कि स्थानीय पुलिस पर दबाव है और वह निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती।
अभी भी फरार हैं दो मुलजिम
इससे भी बड़ी बात यह है कि पुलिस अभी तक दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है:
- सुखदेव सिंह भुल्लर (लालजीत भुल्लर के पिता)
- दिलबाग सिंह (निजी सहायक)
ये दोनों चार्जशीट में नामजद हैं, लेकिन फरार चल रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उन्हें तलाश किया जा रहा है, लेकिन परिवार को शक है कि जानबूझकर इन्हें नहीं पकड़ा जा रहा।
13 मार्च को क्या हुआ था?
पूरे केस का केंद्र बिंदु 13 मार्च का दिन है। उस दिन क्या हुआ, यह समझना बेहद जरूरी है:
सुबह: डॉ. रंधावा को लालजीत भुल्लर के घर बुलाया गया
दोपहर: कथित तौर पर उनके साथ मारपीट हुई और उन्हें पिस्टल दिखाकर धमकाया गया
शाम: उन्हें 10 लाख रुपये रिश्वत लेने की बात कबूल करने के लिए मजबूर किया गया
रात: मानसिक रूप से टूटे हुए डॉ. रंधावा घर लौटे
इसके बाद के दिनों में उनकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई और अंततः उन्होंने आत्महत्या कर ली।
यह केस क्यों है खास?
यह केस कई मायनों में अलग है:
पहला, यह एक हाई प्रोफाइल केस है जिसमें एक साबका मंत्री शामिल हैं।
दूसरा, यह डिजिटल सबूतों पर आधारित है, न कि सिर्फ गवाहों के बयान पर।
तीसरा, यह VIP संस्कृति और पुलिस जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है।
इसका मतलब यह है कि यह केस पंजाब की न्याय व्यवस्था के लिए एक परीक्षा है। क्या एक आम अधिकारी के परिवार को न्याय मिल पाएगा या फिर VIP होने का फायदा उठाकर आरोपी बच निकलेंगे?
आगे क्या होगा?
अब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है तो अगले चरण में:
ट्रायल शुरू होगा: CJM कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई होगी
गवाह पेश होंगे: 50 से अधिक गवाह अपने बयान देंगे
डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत होंगे: वीडियो, मोबाइल डेटा, CCTV फुटेज सब कुछ पेश किया जाएगा
फॉरेंसिक रिपोर्ट आएगी: दूसरी वीडियो की फॉरेंसिक जांच पूरी होगी
यह मुकदमा लंबा चल सकता है, लेकिन पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद है।
मुख्य बातें (Key Points)
- लालजीत भुल्लर केस में 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, तीन आरोपी नामजद
- दो वीडियो और मोबाइल लोकेशन डेटा मुख्य सबूत, 13 मार्च की घटना का पूरा ब्यौरा
- BNS की धारा 108, 351(3), 238, 115(2) के तहत केस दर्ज
- 50 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज होंगे, फॉरेंसिक रिपोर्ट प्रतीक्षित
- परिवार ने पुलिस पर VIP ट्रीटमेंट का आरोप लगाया, जांच ट्रांसफर की मांग













