AAP Jantar Mantar Rally Cancelled: आम आदमी पार्टी और दिल्ली पुलिस के बीच एक नया टकराव खड़ा हो गया है। पार्टी की 1 मार्च को जंतर मंतर पर होने वाली रैली की अनुमति एन आखिरी वक्त रद्द कर दी गई है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे सीधे तौर पर “तानाशाही” करार दिया है और कोर्ट के एक ताजा आदेश से इसका सीधा संबंध जोड़ा है।
केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह — तीनों ने अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस फैसले के खिलाफ जोरदार हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि कोर्ट के फैसले के बाद BJP सरकार ने घबराकर दिल्ली पुलिस के जरिए यह रैली रद्द करवाई है।
केजरीवाल का सीधा हमला: ‘रैली करना संवैधानिक अधिकार है’
अरविंद केजरीवाल ने अपने X हैंडल पर लिखा कि आम आदमी पार्टी की 1 मार्च को जंतर मंतर पर रैली की घोषणा कई दिन पहले हो चुकी थी। हजारों कार्यकर्ता और समर्थक तैयारी कर चुके थे। लेकिन एन आखिरी वक्त पुलिस ने रैली कैंसिल करवा दी।
केजरीवाल ने सीधा सवाल उठाया — “क्या ये कल कोर्ट के आदेश का परिणाम है?” उन्होंने जोर देकर कहा कि रैली करना और अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उनके शब्दों में — “इस तरह से तानाशाही करना सही नहीं। हमें रैली करने दी जाये।”
केजरीवाल के इस बयान से साफ है कि AAP इस मामले को सिर्फ एक रैली की अनुमति का मसला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के रूप में पेश कर रही है।
आख़िर में अधर्म और अन्याय हारता है और सच ही जीतता है।
सत्यमेव जयते pic.twitter.com/GZghEdhJf3
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) February 27, 2026
भगवंत मान का तीखा सवाल: ‘क्या BJP संविधान नहीं मानती?’
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मामले पर पंजाबी में कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा कि 1 मार्च को जंतर मंतर पर AAP का कार्यक्रम काफी पहले से तय था और हजारों कार्यकर्ता व समर्थक अपनी तैयारी कर चुके थे।
भगवंत मान ने सीधे कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालती फैसले के बाद जिस तरह आखिरी वक्त दिल्ली पुलिस के जरिए मंजूरी वापस ली गई, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक इकट्ठा होकर अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और लोगों की आवाज को रोकना या डर के कारण कार्यक्रम रद्द करवाना लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है।
मान ने सबसे तीखा सवाल अंत में दागा — “क्या BJP संविधान नहीं मानती?” यह एक लाइन का सवाल AAP की पूरी रणनीति को बयां कर रहा है — पार्टी इस मामले को BJP बनाम संविधान के फ्रेम में खड़ा करना चाहती है।
1 ਮਾਰਚ ਨੂੰ ਜੰਤਰ ਮੰਤਰ ‘ਤੇ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਵੱਲੋਂ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਕਾਫ਼ੀ ਪਹਿਲਾਂ ਤੋਂ ਐਲਾਨਿਆ ਹੋਇਆ ਸੀ। ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਵਰਕਰ ਅਤੇ ਸਮਰਥਕ ਆਪਣੀ ਤਿਆਰੀ ਕਰ ਚੁੱਕੇ ਸਨ। ਪਰ ਕੱਲ੍ਹ ਅਦਾਲਤੀ ਫ਼ੈਸਲੇ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਜਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਆਖ਼ਰੀ ਵੇਲੇ ਦਿੱਲੀ ਪੁਲਿਸ ਰਾਹੀਂ ਮਨਜ਼ੂਰੀ ਵਾਪਸ ਲੈ ਲਈ ਗਈ, ਉਹ ਕਈ ਸਵਾਲ ਖੜ੍ਹੇ ਕਰਦਾ ਹੈ।
ਅਸੀਂ ਸੰਵਿਧਾਨ… https://t.co/k9bZdIrrXi
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) February 28, 2026
संजय सिंह बोले: CP दिल्ली का फोन तक नहीं उठ रहा
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस पूरे मामले का सबसे व्यावहारिक पहलू सामने रखा। उन्होंने बताया कि जंतर मंतर दिल्ली में आंदोलन के लिए निर्धारित जगह है, जहां आंदोलन की अनुमति देना दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है।
संजय सिंह ने कहा कि BJP की घबराहट इतनी है कि केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को जंतर मंतर पर सभा करने की इजाजत तक नहीं दी जा रही। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार दिल्ली पुलिस कमिश्नर (CP दिल्ली) को फोन किया, लेकिन उनका फोन उठाया ही नहीं गया।
यह आरोप अपने आप में बेहद गंभीर है। एक राज्यसभा सांसद जब दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारी से बात तक नहीं कर पा रहा, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या पुलिस स्वतंत्र रूप से काम कर रही है या राजनीतिक दबाव में।
दिल्ली में जंतर मंतर आंदोलन के लिए निर्धारित जगह है जहाँ आंदोलन की अनुमति देना @DelhiPolice की ज़िम्मेदारी है।
लेकिन BJP की घबराहट देखिए @ArvindKejriwal और @AamAadmiParty को जंतर मंतर पर सभा करने की इजाज़त नही।
मैंने कई बार @CPDelhi को फ़ोन किया उनका फ़ोन नही उठता।— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) February 28, 2026
कोर्ट का वो आदेश जिसने बदला पूरा खेल
AAP के तीनों बड़े नेताओं ने एक स्वर में इस रैली रद्द होने को कोर्ट के ताजा आदेश से जोड़ा है। हालांकि पोस्ट में कोर्ट के आदेश का सटीक विवरण नहीं दिया गया, लेकिन केजरीवाल का सवाल — “क्या ये कल कोर्ट के आदेश का परिणाम है?” — बता रहा है कि कोर्ट का कोई ऐसा फैसला आया है जिसके तुरंत बाद सरकार ने यह कदम उठाया।
भगवंत मान ने भी साफ शब्दों में कहा कि “अदालती फैसले के बाद” जिस तरह अनुमति वापस ली गई, वह संदेह पैदा करता है। इससे AAP का इशारा साफ है — पार्टी मानती है कि कोर्ट का फैसला BJP के खिलाफ गया और उसकी प्रतिक्रिया के रूप में सरकार ने रैली पर रोक लगवाई।
जंतर मंतर: विरोध प्रदर्शन की ‘निर्धारित’ जगह पर भी रोक?
इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि जंतर मंतर दिल्ली में आधिकारिक तौर पर विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान है। यहां अलग-अलग राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी जाती रही है।
संजय सिंह ने ठीक ही इशारा किया कि जब जंतर मंतर ही प्रदर्शन के लिए बनी जगह है, तो वहां भी अनुमति न देना यह बताता है कि मामला कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक है। अगर सत्ता पक्ष अपने विरोधियों को संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने की जगह तक नहीं देगा, तो लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर ही सवाल खड़ा हो जाता है।
BJP की चुप्पी और दिल्ली पुलिस की भूमिका
इस पूरे मामले पर अभी तक BJP की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दिल्ली पुलिस ने भी अनुमति वापस लेने की ठोस वजह स्पष्ट नहीं की है। संजय सिंह के मुताबिक दिल्ली पुलिस कमिश्नर फोन तक नहीं उठा रहे।
दिल्ली पुलिस सीधे केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। ऐसे में जब AAP यह आरोप लगाती है कि पुलिस ने राजनीतिक दबाव में रैली रद्द की, तो यह आरोप सीधे केंद्र सरकार पर जाता है। पुलिस की इस चुप्पी ने AAP के आरोपों को और मजबूत बना दिया है।
AAP की रणनीति: विरोध को और तेज करने के संकेत
तीनों नेताओं के बयानों का लहजा देखें तो साफ है कि AAP इस मामले को यहीं छोड़ने वाली नहीं है। केजरीवाल का “हमें रैली करने दी जाये” वाला बयान एक मांग भी है और चुनौती भी। भगवंत मान का “क्या BJP संविधान नहीं मानती” वाला सवाल इसे एक संवैधानिक बहस में बदलने की कोशिश है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP अब आगे क्या कदम उठाती है — क्या वह कोर्ट का रास्ता अपनाती है, सड़क पर उतरती है, या दोनों एक साथ करती है। एक बात तय है कि इस रैली रद्द होने ने AAP को एक नया मुद्दा दे दिया है — लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन। और विपक्ष के लिए इससे बड़ा मुद्दा शायद ही कोई हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP की 1 मार्च को जंतर मंतर पर होने वाली रैली की अनुमति आखिरी वक्त दिल्ली पुलिस ने रद्द कर दी।
- अरविंद केजरीवाल ने इसे “तानाशाही” बताया और कोर्ट के ताजा आदेश से इसका सीधा संबंध जोड़ा।
- भगवंत मान ने BJP पर सवाल उठाते हुए पूछा — “क्या BJP संविधान नहीं मानती?”
- संजय सिंह ने बताया कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर का फोन तक नहीं उठ रहा, जो पुलिस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।








