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The News Air - Breaking News - Iran War Middle East Crisis: ईरान की मिसाइलों ने पूरे मध्यपूर्व को अपनी जद में लिया

Iran War Middle East Crisis: ईरान की मिसाइलों ने पूरे मध्यपूर्व को अपनी जद में लिया

अमेरिका-इसराइल के हमले के जवाब में ईरान ने UAE, कतर, बहरेन, इराक और सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बरसाईं मिसाइलें, साइबर वॉर भी शुरू

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 28 फ़रवरी 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय
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Iran War Middle East Crisis
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Iran War Middle East Crisis: जो आशंका पूरी दुनिया को थी, वह हकीकत बन गई। अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर व्यापक सैन्य हमला कर दिया है। लेकिन जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया वह ईरान का तुरंत और भयंकर जवाब है — ईरान ने हमले के तुरंत बाद पूरे मध्यपूर्व में जहां-जहां अमेरिकी वायु सेना के अड्डे हैं, जहां-जहां उसकी नौसेना की मौजूदगी है, हर उस ठिकाने पर मिसाइलें बरसानी शुरू कर दीं।

यूएई, कतर, सऊदी अरब, बहरेन, जॉर्डन और इराक — एक-एक करके पूरा मध्यपूर्व इस युद्ध की जद में आ गया है। तीनों देशों ने शुरुआती दौर में ही अपना संदेश दे दिया है — डोनाल्ड ट्रंप ने कहा ईरान के पूरे मिसाइल कार्यक्रम को मिट्टी में मिला देंगे, बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा यह ‘ऑपरेशन शेर’ है, और ईरान ने कहा — “युद्ध आपने शुरू किया है, लेकिन खत्म इसे हम करेंगे।”


पूरे मध्यपूर्व में अमेरिकी बेस पर ईरानी मिसाइलों की बारिश

ईरान की प्रतिक्रिया जिस पैमाने पर आई है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। ईरान ने साफ ऐलान किया कि इस पूरे इलाके में जहां-जहां अमेरिका की मौजूदगी है, वह पूरी मौजूदगी खत्म कर दी जाएगी। और इसके ठीक बाद ईरान ने अपने शब्दों को अमल में बदलना शुरू कर दिया।

इराक में अमेरिकी ठिकानों पर स्ट्राइक हुई। अबू धाबी में हमला हुआ। बहरेन में अमेरिकी नौसेना के बेस पर मिसाइलें दागी गईं। जो एयरबेस अस्थाई (टेम्परेरी) तौर पर भी काम कर रहे थे, उन पर भी हमले हुए। कई देशों ने इन हमलों के बाद अमेरिकी एयरबेस को अस्थाई तौर पर बंद करने का फैसला लिया — यह अपने आप में बताता है कि ईरान के जवाबी हमले ने कितनी गहरी दहशत फैला दी है।

पहली बार ऐसा हुआ है कि जो मध्यपूर्वी देश अब तक कह रहे थे कि “हम अपनी जमीन युद्ध के लिए नहीं देंगे” — उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया गया और जवाब में वही जमीन ईरान की मिसाइलों का निशाना भी बन गई।


ईरान के अंदर इमरजेंसी: खामेनई ने छोड़ा तेहरान

ईरान के भीतर के हालात बेहद गंभीर हैं। हमले शुरू होते ही पूरे देश में इमरजेंसी लगा दी गई। इस इमरजेंसी के तहत सिर्फ जरूरी सेवाओं को ही चालू रखा गया है, बाकी सब कुछ बंद कर दिया गया है।

सुप्रीम लीडर आयातुल्ला खामेनई ने तेहरान छोड़ दिया है और एक ऐसे सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गए हैं जहां अमेरिका या इसराइल के हमले पहुंच नहीं सकते। यह कदम बता रहा है कि ईरान का नेतृत्व इस युद्ध को लंबा खिंचने की तैयारी के साथ चल रहा है।

जहां सबसे भीषण हमले हो रहे हैं उनमें कराज का क्षेत्र, कौम, इस्फहान और करमानशाह प्रमुख हैं। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के जितने भी ठिकाने हैं, उन सब पर मिसाइलें बरसाई जा रही हैं। सुप्रीम लीडर खामेनई के ऑफिस, रक्षा मंत्रालय और खुफिया मंत्रालय के दफ्तर — सभी पर सीधे हमले हुए हैं।

अमेरिका और इसराइल का टारगेट बिल्कुल साफ है — ईरान की मिसाइलों को नष्ट करना और उसके पूरे मिसाइल कार्यक्रम को जड़ से मिटा देना।


ट्रंप का 8 मिनट का वीडियो: ‘ईरान से डील की कोशिश की, नहीं बनी बात’

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर 8 मिनट का एक वीडियो जारी कर इस हमले को सबके सामने सही ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि “थोड़ी देर पहले अमेरिकी मिलिट्री ने ईरान में बड़ा कॉम्बैट ऑपरेशन शुरू किया है और हमारा मकसद ईरानी शासन से मिल रही धमकियों से अमेरिकी नागरिकों की रक्षा करना है।”

ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कई तरीकों से डील करने की कोशिश की। एक-दो नहीं बल्कि तीन बैठकें हुईं, लेकिन जब कोई परिणाम नहीं निकला तो यह मान लिया गया कि ईरान की मौजूदा सत्ता खतरनाक है और उसे हटाना ही होगा।

ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। उन्होंने ईरान की सत्ता को “बुरी कट्टरपंथी तानाशाही” करार दिया और कहा कि इसे अमेरिका के लिए और बड़ा खतरा बनने से पहले ही रोकना जरूरी था।

लेकिन ट्रंप ने एक और बात कही जो गौर करने वाली है — “जब युद्ध होता है तो किसी भी चीज का रिस्क होता है, अच्छा और बुरा दोनों।” इसके बाद उन्होंने ईरान के लोगों को सीधे संबोधित करते हुए कहा — “आपकी आजादी का समय करीब है।”


नेतन्याहू का खून का बदला: ‘हम पीछे नहीं हटेंगे’

इसराइल की तरफ से नेतन्याहू ने भी अपना बयान जारी किया। इसराइल के विदेश मंत्री इसराइल कात्ज ने पूरे इसराइल में विशेष और अस्थाई आपातकाल की स्थिति घोषित की। इसराइल और ईरान दोनों ने अपने हवाई क्षेत्र नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिए।

नेतन्याहू ने खुले तौर पर कहा — “उन्होंने हमारा खून बहाया है, हम इस युद्ध से पीछे नहीं हटेंगे।” यह बयान बता रहा है कि इसराइल इस युद्ध को किसी भी कीमत पर रोकने के मूड में नहीं है।

वह पूरा इलाका जो इस वक्त युद्धग्रस्त है — जिसके दायरे में इराक आता है, मिस्र आता है, पूरे मध्यपूर्वी देश आते हैं और एक हद तक यूरोप की सीमा को छूता है — उस पूरे इलाके में नागरिक विमान रोक दिए गए हैं। आम लोगों की उड़ानें ठप हो गई हैं और लाखों यात्री अटके हुए हैं।


साइबर वॉर: ईरान की आवाज को दबाने की कोशिश

यह युद्ध सिर्फ मिसाइलों और बमों तक सीमित नहीं रहा। BBC और CNN की रिपोर्ट के मुताबिक इसके साथ-साथ एक बड़ा साइबर ऑपरेशन भी शुरू हो चुका है।

ईरान के कई बड़े घरेलू मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारी रुकावट आ गई है। ऑपरेशनल दिक्कतें इतनी बढ़ गई हैं कि ईरान से बाहर कोई जानकारी निकलकर नहीं आ पा रही। बीबीसी मॉनिटरिंग वेरिफिकेशन ने पुष्टि की है कि ईरान की आधिकारिक मीडिया और समाचार एजेंसियों की वेबसाइटें विदेश से एक्सेस नहीं हो पा रही हैं। वहां की सभी लोकल एजेंसियां जो खबरें दे रही थीं, उन सब पर रोक लग गई है।

इस साइबर ऑपरेशन का मकसद साफ है — ईरान जिन बातों का जिक्र कर रहा है, खासतौर से मध्यपूर्वी देशों में जो तबाही मच रही है, वह दुनिया तक न पहुंचे। ईरान की आवाज को दबाना और उसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया से काट देना — यह इस साइबर वॉर का असली उद्देश्य है।


ईरान ने खेला हाइपरसोनिक कार्ड: ‘अमेरिका रोक नहीं पाएगा’

ईरान ने इस युद्ध में एक बड़ा दावा किया है जिसने अमेरिका और इसराइल दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया। ईरान ने कहा कि इस युद्ध में हर तरह के हथियारों का इस्तेमाल होगा। हालांकि किसी ने खुलकर न्यूक्लियर वॉर का जिक्र नहीं किया, लेकिन ईरान ने साफ कहा कि उसकी हाइपरसोनिक मिसाइलों को अमेरिका रोक नहीं सकता।

हाइपरसोनिक मिसाइलें ध्वनि की रफ्तार से पांच गुना से भी ज्यादा तेज चलती हैं और अपना रास्ता बदलने में सक्षम होती हैं, जिससे इन्हें बीच हवा में मारकर गिराना बेहद मुश्किल होता है। अगर ईरान का यह दावा सच है, तो अमेरिका का तीन अरब डॉलर का युद्धपोत और इसराइल का आयरन डोम — दोनों इन मिसाइलों के सामने बेअसर साबित हो सकते हैं। यही वह बात है जिसने इस युद्ध के समीकरण को एकतरफा होने से रोक दिया है।


चीन और रूस की खामोशी: क्या है असली खेल?

इस पूरे घटनाक्रम में चीन और रूस की भूमिका सबसे रहस्यमय है। दोनों देशों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन ईरान की तरफ से जो जानकारी आ रही है उसमें यह बताया गया कि रूस और चीन ने ईरान को हथियारों की मदद पहले से ही की है।

ट्रंप भी इस बात से चिंतित दिखे कि रूस और चीन ने ईरान को जो सैन्य सहायता दी है, वह अमेरिका के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है — क्या चीन और रूस सिर्फ हथियार देकर पीछे रह जाएंगे या आगे चलकर इस युद्ध में सीधे कूदेंगे?

ईरान का मानना है कि इस बार चीन और रूस का साथ मिलेगा और मध्यपूर्वी देशों के भीतर जो घबराहट फैली है, उसने इसराइल और अमेरिका के पैर उखाड़ने शुरू कर दिए हैं। यह ईरान का आत्मविश्वास है या हकीकत — यह आने वाले दिनों में ही साफ होगा।


तीन देश, तीन मकसद: कौन क्या चाहता है?

इस युद्ध में तीन परिस्थितियां बिल्कुल साफ हैं और तीनों देशों के मकसद अलग-अलग हैं।

अमेरिका चाहता है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो। ट्रंप ने यह बात छिपाई भी नहीं — उन्होंने खुलकर कहा कि ईरान के लोगों की आजादी का वक्त आ गया है। वह वहां के शासन को उखाड़ फेंकना चाहते हैं।

इसराइल चाहता है कि उसकी विस्तारवादी नीति आगे बढ़े। गजा, लेबनान, सीरिया के बाद अब ईरान — इसराइल एक-एक करके अपने पड़ोस के हर उस देश को कमजोर करता जा रहा है जो उसके लिए खतरा बन सकता है। इसराइल ने अमेरिका को आगे करके अपना काम करवाया है या अमेरिका ने इसराइल को आगे किया है — यह सवाल अभी भी बना हुआ है।

ईरान मानकर चल रहा है कि चीन-रूस का साथ और मध्यपूर्व में फैली दहशत ने अमेरिका-इसराइल की स्थिति कमजोर कर दी है। ईरान का दांव यह है कि अगर पूरा मध्यपूर्व इस युद्ध में जलने लगा तो अमेरिका को पीछे हटना ही होगा।


मध्यपूर्वी देशों का सबसे बड़ा डर सच हुआ

इस युद्ध ने मध्यपूर्वी देशों को उस खाई में धकेल दिया है जिससे वे बचने की कोशिश कर रहे थे। ये वो देश हैं जिन्होंने अपनी जमीन पर अमेरिकी सैन्य अड्डे बनने दिए थे, लेकिन साथ ही यह भी कहते रहे कि वे युद्ध में नहीं उतरेंगे। अब स्थिति यह है कि उनकी जमीन से ईरान पर हमला हुआ और जवाब में ईरान की मिसाइलें उन्हीं की जमीन पर गिर रही हैं।

नाटो देश और पूरे यूरोपीय देश अमेरिका के साथ खड़े हैं, लेकिन उनकी इस खामोश सहमति ने मध्यपूर्व के आम लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। अबू धाबी से लेकर बहरेन तक, इराक से लेकर जॉर्डन तक — हर जगह के लोग इस युद्ध की आग में झुलस रहे हैं, भले ही उनका इस लड़ाई से कोई सीधा लेना-देना नहीं।

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यह युद्ध छोटा नहीं होगा

जिस तरह से तीनों पक्षों ने अपने-अपने इरादे जाहिर किए हैं, उससे एक बात बिल्कुल साफ है — यह युद्ध जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। अमेरिका सत्ता परिवर्तन चाहता है जो रातों-रात नहीं होता। इसराइल विस्तार चाहता है जो एक लंबी प्रक्रिया है। और ईरान ने ठान लिया है कि अमेरिका की मध्यपूर्व से मौजूदगी खत्म करके ही रहेगा।

ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों का जिक्र किया, हर तरह के हथियारों के इस्तेमाल की बात कही और पूरे मध्यपूर्व को इस युद्ध की जद में ले लिया। दूसरी तरफ अमेरिका ने साइबर वॉर शुरू करके ईरान को दुनिया से काट दिया है। यह युद्ध सिर्फ मिसाइलों का नहीं रहा — यह अब सूचना, तकनीक और रणनीति की एक बहुस्तरीय लड़ाई बन चुका है।

आने वाले दिन बताएंगे कि इस आग में कितने और देश झुलसते हैं और दुनिया का नक्शा कितना बदलता है। लेकिन एक बात तय है — इस युद्ध की कीमत सबसे ज्यादा वो आम लोग चुकाएंगे जिनका इस लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं।


मुख्य बातें (Key Points)
  • ईरान ने अमेरिका-इसराइल के हमले के जवाब में पूरे मध्यपूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागीं — UAE, बहरेन, कतर, इराक, सऊदी अरब और जॉर्डन तक युद्ध की आग पहुंची।
  • ईरान में इमरजेंसी लगा दी गई और सुप्रीम लीडर खामेनई तेहरान छोड़कर सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गए।
  • साइबर वॉर शुरू हो चुका है — ईरान के मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार एजेंसियां बाहर से एक्सेस नहीं हो पा रहीं, ईरान की आवाज दबाने की कोशिश जारी।
  • ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों का दावा किया जिन्हें अमेरिका रोक नहीं सकता, और कहा कि “हर तरह के हथियारों का इस्तेमाल होगा।”
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अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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