8th Pay Commission Assam: केंद्रीय कर्मचारी जहां आठवें वेतन आयोग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं असम सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के लिए आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) गठित कर दिया है। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, इस आयोग की अध्यक्षता पूर्व अपर मुख्य सचिव सुभाष चंद्र दास करेंगे। आयोग में सात अन्य सदस्य भी शामिल होंगे।
राज्य में पिछला वेतन संशोधन 1 अप्रैल 2016 से लागू हुआ था, जो सातवें असम पे एंड प्रोडक्टिविटी वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित था। अब करीब दस साल बाद राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी है। आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
सिर्फ वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि सुधारों पर भी जोर
सरकारी अधिसूचना में साफ किया गया है कि सरकार सिर्फ वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। उनका लक्ष्य वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना, सेवा वितरण में सुधार लाना और प्रशासनिक क्षमता बढ़ाना भी है। इसके लिए मानव संसाधन प्रबंधन, नई तकनीकों को अपनाने, नतीजों पर आधारित प्रशासन और श्रम बल को संतुलित करने जैसे ढांचागत सुधारों पर भी जोर दिया जाएगा।
आयोग राज्य के पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे की भी समीक्षा करेगा। खासकर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में उतार-चढ़ाव के आधार पर महंगाई राहत (DA) , पेंशन में बदलाव और वित्तीय संतुलन को लेकर नई सिफारिशें दी जाएंगी।
किन पर लागू नहीं होगा आयोग?
हालांकि, इस आयोग के दायरे में कुछ वर्गों को शामिल नहीं किया गया है। इनमें अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी, यूजीसी, एआईसीटीई या तकनीकी वेतनमान वाले शैक्षणिक संस्थानों के पद और शेट्टी आयोग व अन्य राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग के तहत वेतन पाने वाले न्यायिक अधिकारी शामिल नहीं होंगे।
राज्यों के अपने वेतन आयोग का महत्व
दरअसल, जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है तो सबसे पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को लाभ मिलता है। राज्य सरकारों के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए तस्वीर अलग होती है। माना जा रहा है कि जब केंद्रीय आठवां वेतन आयोग लागू हो जाएगा, उसके बाद ही राज्यों के कर्मचारियों की बढ़ी हुई सैलरी पर विचार होगा। हर राज्य की आर्थिक स्थिति, राजस्व और बजट क्षमता अलग होती है। इसलिए राज्य धीरे-धीरे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की बजाय अपना स्टेट पे कमीशन बनाते हैं, ताकि वेतन, पेंशन और भत्तों को राज्य की अर्थव्यवस्था के हिसाब से तय किया जा सके।
असम ने यह कदम उसी दिशा में उठाया है। ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि अलग-अलग आयोग होने के बावजूद केंद्र और राज्यों का पे स्ट्रक्चर लगभग समान रहता है। ज्यादातर मामलों में फिटमेंट फैक्टर केंद्र जैसा ही होता है, हालांकि राज्यों में थोड़ा कम या ज्यादा भी हो सकता है।
‘क्या है पूरा मामला’
देशभर में जहां केंद्रीय कर्मचारी 8वें वेतन आयोग के गठन का इंतजार कर रहे हैं, वहीं असम सरकार ने अपने स्तर पर यह कदम उठाकर राज्य कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। यह पहला मौका नहीं है जब किसी राज्य ने केंद्र से अलग अपना वेतन आयोग बनाया हो। केरल में इस समय 11वां, कर्नाटक में सातवां और पंजाब में छठा वेतन आयोग कार्यरत है। हर राज्य अपनी आर्थिक क्षमता के अनुरूप वेतन संशोधन करता है। असम का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक संकेत हो सकता है, खासकर उन राज्यों के लिए जहां कर्मचारी लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
8th Pay Commission Assam का गठन कर दिया गया है, अध्यक्ष पूर्व अपर मुख्य सचिव सुभाष चंद्र दास होंगे।
आयोग 18 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिससे लाखों कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने की उम्मीद है।
पिछला वेतन संशोधन 2016 में हुआ था, अब करीब 10 साल बाद बदलाव की तैयारी।
वेतन वृद्धि के अलावा आयोग प्रशासनिक सुधारों, तकनीक अपनाने और वित्तीय स्थिरता पर भी देगा सुझाव।
अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी और न्यायिक अधिकारी इस आयोग के दायरे में शामिल नहीं होंगे।








