Kerala Name Change : दक्षिण भारत की राजनीति में चुनाव से पहले एक बड़ा और प्रतीकात्मक बदलाव हो सकता है। केरल सरकार ने राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिस पर आज (24 फरवरी) केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मुहर लग सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह फैसला हो सकता है।
यह प्रस्ताव सिर्फ नाम बदलने का नहीं, बल्कि पहचान, भाषा और इतिहास को फिर से स्थापित करने का सवाल है। 2024 में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य का मूल नाम मलयालम में ‘केरलम’ है और अब वक्त आ गया है कि संविधान में भी वही नाम दर्ज हो।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 2023 में भी ऐसा प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन तकनीकी आधार पर उसे लौटा दिया गया था। उसके बाद संशोधित प्रस्ताव 2024 में दोबारा विधानसभा से पारित हुआ। खास बात यह रही कि यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ, यानी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक स्वर में कहा कि राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता को उसका मूल नाम मिलना चाहिए।
अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है। अगर कैबिनेट हरी झंडी देती है, तो संसद में बिल पेश किया जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार है।
क्यों बदलना चाहते हैं नाम?
समर्थकों का कहना है कि ‘केरलम’ राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सही तरीके से दर्शाता है। मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा केरलम ही कहा गया है। अंग्रेजी और हिंदी में ‘केरल’ नाम प्रचलित हो गया, लेकिन अब मूल नाम को आधिकारिक मान्यता देने की मांग उठ रही थी।
यह सिर्फ एक शब्द का फर्क नहीं, बल्कि केरल से केरलम तक की पहचान की यात्रा है। सरकारी दस्तावेजों, आधिकारिक मोहरों, बोर्ड, वेबसाइट, पासपोर्ट रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन में भी यह बदलाव दिखेगा।
राजनीति की भी है परत
इस मुद्दे पर दुर्लभ राजनीतिक सहमति देखने को मिल रही है। जनवरी 2026 में केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि ‘केरलम’ हमारी विरासत और परंपरा को दिखाता है। मुख्यमंत्री ने भी इस समर्थन का स्वागत किया था।
लेकिन चुनाव से ठीक पहले इस फैसले की टाइमिंग कई सवाल भी खड़े करती है। क्या यह सांस्कृतिक सम्मान का कदम है या चुनावी रणनीति का हिस्सा? क्या इससे मतदाताओं के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा? विशेषज्ञ मानते हैं कि दक्षिण भारत में भाषाई पहचान हमेशा से एक मजबूत राजनीतिक कारक रही है। ‘केरलम’ नाम को आधिकारिक मान्यता देना उस भावना को सीधा स्पर्श करता है।
पहले भी बदले जा चुके हैं नाम
देश में पहले भी कई शहरों और राज्यों के नाम बदले जा चुके हैं। बॉम्बे से मुंबई, मद्रास से चेन्नई, उड़ीसा से ओडिशा, कलकत्ता से कोलकाता। हर बदलाव के पीछे एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक तर्क था। अब केरल से केरलम की बारी है।
अगर संसद से मंजूरी मिलती है, तो बदलाव सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। हालांकि, समर्थकों का कहना है कि प्रशासनिक बदलाव मुश्किल नहीं है, पहचान की बहाली ज्यादा जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Points)
केरल सरकार ने राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था।
2024 में विधानसभा में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो चुका है।
आज (24 फरवरी) केंद्रीय कैबिनेट में इस पर फैसला हो सकता है।
BJP समेत कई दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।








