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The News Air - Breaking News - Ozempic India Launch: डायबिटीज की दवा भारत में लॉन्च, जानें कौन ले सकता है

Ozempic India Launch: डायबिटीज की दवा भारत में लॉन्च, जानें कौन ले सकता है

ओजेमपिक के फायदे-नुकसान, AIIMS की नई स्टडी में अचानक मौतों का खुलासा और रामफल खाने के गजब फायदे

The News Air Team by The News Air Team
मंगलवार, 16 दिसम्बर 2025
in Breaking News, NEWS-TICKER, हेल्थ
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Ozempic India Launch
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Ozempic India Launch : डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नोडिस्क ने 12 दिसंबर 2025 को भारत में ओजेमपिक लॉन्च कर दी है। यह इंजेक्शन टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के इलाज के लिए बना है। दुनियाभर में ईलॉन मस्क, ओपरा विनफ्री और सेरेना विलियम्स जैसी हस्तियां इससे वजन घटा चुकी हैं। अब भारत में भी लोग इसे ट्राई करना चाहते हैं लेकिन यह कोई आइसक्रीम का फ्लेवर नहीं है जिसे हर कोई ट्राई कर सके।


ओजेमपिक क्या है और कैसे काम करती है

ओजेमपिक एक इंजेक्शन है जिसमें सेमाग्लूटाइड नाम की दवा होती है। यह डायबिटीज और मोटापे दोनों के इलाज में काम आती है।

यह दवा जीएलपी-1 रिसेप्टर एनालॉग की तरह काम करती है। इसका मतलब है कि यह दो तरीके से असर करती है। पहला यह शरीर में इंसुलिन का स्राव बढ़ाती है जिससे इंसुलिन अपना काम बेहतर तरीके से कर पाता है। दूसरा यह ग्लूकागॉन का स्राव कम करती है।

खास बात यह है कि यह दोनों प्रक्रियाएं शरीर में मौजूद ग्लूकोज के हिसाब से अपने आप एडजस्ट होती हैं।


कौन ले सकता है ओजेमपिक

यथार्थ हॉस्पिटल फरीदाबाद में इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल के मुताबिक ओजेमपिक हर किसी के लिए नहीं है। इसे सिर्फ खास मरीजों को ही दिया जाता है।

पहला ग्रुप उन लोगों का है जिनकी टाइप-2 डायबिटीज कई दवाओं, डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद कंट्रोल में नहीं आ रही है। ऐसे मरीजों में डॉक्टर ओजेमपिक को एक अतिरिक्त दवा के रूप में जोड़ते हैं।

दूसरा ग्रुप उन मरीजों का है जिन्हें दिल की बीमारी पहले से है और साथ में टाइप-2 डायबिटीज भी है। इनमें भी ओजेमपिक दी जा सकती है।

तीसरा ग्रुप उन लोगों का है जो ओवरवेट हैं और बॉर्डरलाइन डायबिटिक हैं। इनमें भी धीरे-धीरे डोज बढ़ाते हुए ओजेमपिक दी जाती है। याद रखें यह वजन घटाने का कोई शॉर्टकट नहीं है।


ओजेमपिक की सही डोज क्या है

ओजेमपिक की डोजिंग बहुत धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है ताकि शरीर इसे सह सके।

शुरुआत में 0.25 मिलीग्राम की डोज हफ्ते में एक बार दी जाती है। फिर हर चार से पांच हफ्ते बाद डोज में 0.25 मिलीग्राम की बढ़ोतरी की जाती है।

इस तरह 12 हफ्तों के अंदर डॉक्टर देखते हैं कि मरीज को किस डोज पर सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है। फिर उसी डोज पर मरीज को सेट कर दिया जाता है।


ओजेमपिक के साइड इफेक्ट्स

डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल के मुताबिक ओजेमपिक के ज्यादातर साइड इफेक्ट्स मामूली होते हैं और कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होता।

ये सभी पेट से जुड़े साइड इफेक्ट्स हैं। मरीजों में जी मिचलाना यानी उबकाई आना देखा जाता है। कुछ लोगों को उल्टी भी होती है। दस्त लगना भी एक आम साइड इफेक्ट है। पेट में दर्द या मरोड़ की शिकायत भी हो सकती है। कुछ मरीजों में कब्ज की समस्या भी देखी गई है।


कौन नहीं ले सकता ओजेमपिक

कुछ मरीजों को ओजेमपिक बिल्कुल नहीं दी जाती। इन्हें कॉन्ट्राइंडिकेशन कहते हैं।

जिन लोगों को पहले कभी थायराइड कैंसर रहा हो उन्हें यह दवा नहीं दी जाती। जिन्हें पहले पैंक्रियाटाइटिस यानी अग्नाशय की सूजन हुई हो उन्हें भी यह इंजेक्शन नहीं लगाया जाता। जिन मरीजों को गॉल ब्लैडर की कोई बीमारी है उन्हें भी ओजेमपिक से दूर रहना चाहिए।

इन तीनों स्थितियों में डॉक्टर ओजेमपिक देने से मना कर देते हैं। बाकी मरीजों के लिए यह एक सुरक्षित दवा है।

1 दिसंबर 2025 को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने ओजेमपिक जैसी जीएलपी-1 दवाओं पर कुछ गाइडलाइंस जारी की थीं। इनमें बताया गया है कि इस दवा के साथ डाइट और एक्सरसाइज से जुड़ी कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।


AIIMS Study: अचानक मौतों की असली वजह आई सामने


कोविड वैक्सीन नहीं बल्कि दिल की बीमारी है वजह

पिछले कुछ सालों में युवाओं में हार्ट अटैक और अचानक मौत के मामले तेजी से बढ़े हैं। जिम में एक्सरसाइज करते हुए 37 साल का इंसान गिर पड़ता है। फंक्शन में डांस करती 23 साल की महिला को हार्ट अटैक आ जाता है। ऐसी खबरें अब आम हो गई हैं।

लोगों ने इसका कसूरवार कोविड-19 वैक्सीन को ठहराया था। लेकिन एम्स की ताजा स्टडी ने इस धारणा को सिरे से नकार दिया है।

एम्स की नई स्टडी में साफ हुआ है कि युवाओं में अचानक मौत और कोविड-19 वैक्सीन का कोई सीधा संबंध नहीं है। असली वजह है कोरोनरी आर्टरी डिजीज।


AIIMS स्टडी की अहम जानकारी

यह स्टडी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR की जर्नल इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में 8 दिसंबर 2025 को छपी है।

यह स्टडी एम्स नई दिल्ली के पैथोलॉजी और फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट में हुई। स्टडी का समय मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच था। इस दौरान कुल 214 मामले सामने आए जिनमें से 180 मामले अचानक हुई मौत से जुड़े थे।

इन 180 मृतकों में से 130 लोग 18 से 45 साल के बीच के थे जबकि बाकी 77 लोग 46 से 65 साल के बीच के थे। इस स्टडी में एक्सीडेंट, जहर, नशे की लत, हत्या, आत्महत्या या किसी गंभीर बीमारी से हुई मौतों को शामिल नहीं किया गया।


स्टडी कैसे हुई

सभी मृतकों की जांच बहुत विस्तार से की गई। पहले वर्बल ऑटोप्सी हुई यानी परिवार से बातचीत करके जानकारी ली गई। फिर पोस्टमार्टम इमेजिंग की गई।

इसके बाद वर्चुअल ऑटोप्सी हुई। इसमें बिना चीरा लगाए सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी तकनीकों से मौत की वजह पता लगाई गई। फिर पारंपरिक ऑटोप्सी भी हुई जिसमें चीरा लगाकर अंगों की जांच की गई।

जिन अंगों में दिक्कत या बीमारी देखी गई उन सभी से टिश्यू के नमूने लिए गए। इन्हें एक ऑटोमेटिक मशीन में रात भर प्रोसेस किया गया और अच्छी तरह जांचा गया।

आखिर में डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स की टीम ने मिलकर सभी मामलों का विश्लेषण किया।


स्टडी में क्या पता चला

स्टडी में पता चला कि अचानक मौतों की सबसे बड़ी वजह दिल से जुड़ी बीमारियां हैं खासकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज। दूसरे नंबर पर सांस से जुड़ी बीमारियां थीं।

इसका मतलब साफ है कि कोविड वैक्सीन से इन मौतों का कोई लेना-देना नहीं है।


कोरोनरी आर्टरी डिजीज क्या है

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट दिल्ली में कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अमर सिंघल के मुताबिक यह दिल की एक गंभीर बीमारी है।

इस बीमारी में दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियां पतली हो जाती हैं या ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसा धमनियों में प्लैक जमने से होता है।

प्लैक एक चिपचिपा पदार्थ होता है जो धमनियों की दीवारों पर जम जाता है। इससे खून का बहाव कम हो जाता है और दिल को पूरा खून नहीं मिल पाता।

अगर यह प्लैक टूट जाए तो खून का थक्का बन सकता है। इससे धमनी पूरी तरह बंद हो सकती है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक पड़ सकता है।


किन लोगों को है ज्यादा खतरा

डॉ. अमर सिंघल के मुताबिक कुछ लोगों में यह बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है।

जो लोग तंबाकू खाते हैं या सिगरेट पीते हैं उनमें यह खतरा सबसे ज्यादा है। जो बहुत ज्यादा तला-भुना और जंक फूड खाते हैं उन्हें भी सावधान रहना चाहिए।

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जिन्हें डायबिटीज है या जिनका ब्लड प्रेशर हमेशा हाई रहता है उनमें भी यह बीमारी होने का रिस्क ज्यादा है। हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को भी खतरा है।

जो लोग मोटापे से जूझ रहे हैं या जो बिल्कुल भी एक्सरसाइज नहीं करते उनमें प्लैक जमने और उससे जुड़ी बीमारियां होने का रिस्क बहुत ज्यादा है।


लक्षण क्या हैं

कोरोनरी आर्टरी डिजीज होने में कई साल लगते हैं। इसलिए लक्षण भी देर से दिखते हैं।

सबसे पहला लक्षण है सीने में दर्द या जकड़न महसूस होना। कुछ लोगों को सीने में भारीपन या बोझ जैसा लगता है। थोड़ा चलने पर भी सांस फूलने लगती है।

घबराहट और बेचैनी महसूस होती है। छोटे-छोटे कामों में भी जल्दी थकान हो जाती है।

अगर आपको ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। कुछ टेस्ट्स से पता चल जाएगा कि आपको यह बीमारी है या नहीं।


इलाज और बचाव

अगर बीमारी निकलती है तो दवाइयों, स्टेंट या सर्जरी से इलाज किया जाता है। लेकिन बीमारी से बचाव बेहतर है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज से बचना है तो सबसे पहले स्मोकिंग छोड़नी होगी। तंबाकू और सिगरेट पूरी तरह बंद करने होंगे। शराब का सेवन कम करना होगा या पूरी तरह छोड़ना होगा।

तला-भुना और बाहर का जंक फूड बंद करना होगा। घर का बना साधा और हेल्दी खाना खाना होगा। हर दिन कम से कम एक घंटा एक्सरसाइज करनी होगी ताकि वजन कंट्रोल में रहे।

साथ ही डायबिटीज, हाई बीपी और हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाएं समय पर लेनी होंगी। इन बीमारियों को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है।


रामफल (Persimmon) खाने के जबरदस्त फायदे


कटरीना कैफ का पसंदीदा फल

एक जमाना था जब एवोकाडो भारतीय बाजार में किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं था। लेकिन अब इसका तख्त छीन लिया है पर्सिमन यानी रामफल ने।

आजकल सोशल मीडिया पर इसके बड़े चर्चे हैं। सेलिब्रिटीज से लेकर इन्फ्लुएंसर्स तक सब इसके गुणगान कर रहे हैं।

एक्ट्रेस कटरीना कैफ ने 2023 में एक इंटरव्यू में बताया था कि वो नाश्ते में रामफल खाती हैं और उन्हें यह काफी पसंद है। उसके बाद से लोगों की इस फल में दिलचस्पी बढ़ गई।

दिखने में यह कुछ-कुछ टमाटर जैसा लगता है लेकिन स्वाद में बिल्कुल अलग है।


रामफल के स्वास्थ्य लाभ

पारस हेल्थ गुरुग्राम की डाइटीशियन दृश्या आले के मुताबिक रामफल में कई पोषक तत्व होते हैं जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

रामफल विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और बीमारियों तथा इंफेक्शन से बचाव होता है।

यह फल एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होता है। इसमें फ्लेवोनॉइड्स, कैरोटिनॉइड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं।

इसमें विटामिन ए भी होता है जो आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है। साथ ही इसमें डाइटरी फाइबर होता है जो हाजमा दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या नहीं होने देता।


स्किन, बाल और आंखों के लिए फायदेमंद

विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की वजह से रामफल स्किन और बालों के लिए बहुत अच्छा है। इसमें मौजूद विटामिन ए आंखों की रोशनी बनाए रखने में मदद करता है।

जब शरीर की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं या उन्हें कोई नुकसान पहुंचता है तब हम बीमारियों और इंफेक्शन की चपेट में आते हैं। रामफल खाने से कोशिकाएं हेल्दी रहती हैं।


पेट और पाचन के लिए वरदान

रामफल में मौजूद डाइटरी फाइबर पेट के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे हाजमा दुरुस्त रहता है और कब्ज की शिकायत नहीं होती।

फाइबर पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है। इससे गट माइक्रोबायोम भी हेल्दी रहता है।

गट माइक्रोबायोम यानी पेट में रहने वाले वो छोटे-छोटे जीव जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते। इनमें अच्छे और बुरे दोनों तरह के बैक्टीरिया होते हैं।

जब गट माइक्रोबायोम हेल्दी होता है तो हाजमा बेहतर होता है। इम्यूनिटी मजबूत बनती है। मूड अच्छा रहता है और स्ट्रेस कम होता है। शरीर पोषक तत्व भी बेहतर तरीके से सोख पाता है।


कोलेस्ट्रॉल और वजन कम करने में मददगार

रामफल में मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल घटाने में भी मदद करता है। फाइबर शरीर में अब्जॉर्ब नहीं होता बल्कि पेट, छोटी आंत और कोलन से होते हुए शरीर से बाहर निकल जाता है।

यह अकेला बाहर नहीं जाता। अपने साथ कोलेस्ट्रॉल को भी बांधकर ले जाता है। इससे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है और दिल की बीमारियों का खतरा घटता है।

रामफल में फाइबर ज्यादा और कैलोरी कम होती है। इसलिए इसे खाने के बाद पेट देर तक भरा रहता है। हम जरूरत से ज्यादा नहीं खाते और वजन घटाने में मदद मिलती है।


कितना खाएं और कौन न खाए

आप हर दिन एक रामफल खा सकते हैं। लेकिन कुछ लोगों को इससे बचना चाहिए।

जिन्हें डायबिटीज है उन्हें रामफल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें नैचुरल शुगर होती है। जिन्हें इरिटेबल बाउल सिंड्रोम है या पाचन से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है उन्हें भी इससे बचना चाहिए।

जिनका पाचन बहुत धीमा है उनके लिए भी यह ठीक नहीं है। गर्भवती महिलाओं को सावधानी से कम मात्रा में खाना चाहिए। जो लोग लो बीपी से जूझ रहे हैं उन्हें भी रामफल कम खाना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर और कम हो सकता है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • ओजेमपिक 12 दिसंबर 2025 से भारत में उपलब्ध है और यह सिर्फ टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के खास मरीजों के लिए है
  • AIIMS की स्टडी में साबित हुआ कि युवाओं में अचानक मौतों की वजह कोविड वैक्सीन नहीं बल्कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज है
  • स्मोकिंग, जंक फूड, डायबिटीज, हाई बीपी और मोटापा दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं
  • रामफल विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर से भरपूर है जो इम्यूनिटी, पाचन और दिल के लिए फायदेमंद है
  • डायबिटीज, लो बीपी और पाचन की समस्या वाले लोगों को रामफल से बचना चाहिए

 

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