तालिबान के आंतक के बीच काबुल पहुंचे 3000 अमेरिकी सैनिक, ब्रिटेन से भी पहुंचगे 600 जवान, अफगानिस्तान में क्या है प्लान

तालिबान, 14 अगस्त (The News Air)
अफ़ग़ानिस्तान में तेज़ी से तालिबान का कब्ज़ा बढ़ने के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने शुक्रवार को 3,000 और सैनिकों को क़ाबुल हवाईअड्डे पर पहुंचाया ताकि वहाँ अमेरिकी दूतावास से अधिकारियों को निकालने में मदद मिल सके। वहीं, हज़ारों और सैनिकों को क्षेत्र में तैनाती के लिए भेजा गया है। अमेरिकी अधिकारियों और कर्मियों की सुरक्षित निकासी के लिए सैनिकों की अस्थायी तैनाती से संकेत मिलता है कि तालिबान देश के बड़े हिस्से पर तेज़ी से कब्ज़ा बढ़ाता जा रहा है। तालिबान ने शुक्रवार को अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में लगभग पूरा कब्ज़ा कर लिया, जहां उसने चार और प्रांतों की राजधानियों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। अमेरिका के सैनिकों की पूरी तरह वापसी से कुछ सप्ताह पहले तालिबान धीरे-धीरे क़ाबुल की ओर बढ़ रहा है।
अफ़ग़ानिस्तान को आखिरी बड़ा झटका हेलमंद प्रांत की राजधानी से नियंत्रण खोने के रूप में लगा है जहां अमेरिकी, ब्रिटिश और अन्य गठबंधन नाटो सहयोगियों ने पिछले दो दशक में भीषण लड़ाइयां लड़ी हैं। इस प्रांत में तालिबान को नेस्तनाबूद करने के प्रयासों में संघर्ष के दौरान पश्चिमी देशों के सैकड़ों सैनिक मारे गये। इसका मक़सद अफ़ग़ानिस्तान की केंद्र सरकार और सेना को नियंत्रण का बेहतर मौक़ा देना था।
अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा कि दूतावास काम करता रहेगा लेकिन हज़ारों अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को भेजने का गुरुवार का फ़ैसला इस बात का संकेत है कि तालिबान के दबदबे को रोकने में अफ़ग़ान सरकार की क्षमता को लेकर अमेरिका का भरोसा अब कमज़ोर हो रहा है। अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी अभियान को इस महीने के आख़िर तक समाप्त करने पर अडिग बाइडन ने गुरुवार सुबह अतिरिक्त अस्थायी सैनिकों को भेजने का आदेश दिया। इससे पहले उन्होंने रात में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों से सलाह-मशविरा किया।
विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने योजना के समन्वयन के लिए अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी से बृहस्पतिवार को फ़ोन पर बात की। अमेरिका ने तालिबान के ओहदेदारों को भी सीधी चेतावनी दी है कि अगर वह अमेरिका की अस्थायी सैन्य तैनाती के दौरान अमेरिकियों पर हमला करता है तो इसका जवाब दिया जाएगा।
वहीं, ब्रिटेन का रक्षा मंत्रालय अपने बाकी सैनिकों की सुरक्षित वापसी के लिए क़रीब 600 अतिरिक्त सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान भेजेगा। सूत्रों के अनुसार, इसी तरह क़ाबुल से कनाडाई कर्मियों की सुरक्षित निकासी के लिए कनाडा के विशेष बलों को भी तैनात किया जाएगा। प्रेंटागन के मुख्य प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि तीन इन्फैंट्री बटालियनें को हवाईअड्डे पर पहुंचाने के साथ ही पेंटागन 3,500 से 4,000 सैनिकों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के लिहाज़ से कुवैत भेजेगा। उन्होंने कहा कि क़ाबुल में जो 3,000 सैनिक भेजे जा रहे हैं, उनके अतिरिक्त अगर ज़रूरत पड़ी तो उन्हें उक्त सैनिकों में से भेजा जाएगा।
किर्बी ने कहा कि इनके अलावा अमेरिका के लिए काम करने वाले और तालिबान से डरे हुए अफ़ग़ान नागरिकों के विशेष आव्रजन वीज़ा आवेदनों के तेज़ी से निस्तारण में विदेश विभाग को मदद देने के लिए आने वाले दिनों में सेना और वायु सेना के क़रीब 1,000 जवानों को क़तर भेजा जाएगा जिनमें सेना पुलिस और चिकित्सा कर्मी शामिल होंगे।
अमेरिकी क्षेत्र में एक सैन्य अड्डा बना रहे हैं जहां ऐसे लोग ठहर सकते हैं। किर्बी ने कहा कि नये सैनिकों को बड़ी संख्या में भेजने का यह मतलब नहीं है कि अमेरिका फिर से तालिबान के साथ संघर्ष शुरू करने जा रहा है। उन्होंने पेंटागन में संवाददाताओं से कहा, ”यह एक अस्थायी मिशन है। हालांकि अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित अफ़ग़ान सेना की मौजूदगी तेज़ी से कम होती दिख रही है। एक नया सैन्य आकलन कहता है कि सितंबर में क़ाबुल तालिबान के नियंत्रण में आ सकता है और ऐसी ही स्थिति रही तो कुछ ही महीने में पूरा देश तालिबान के कब्ज़े में हो सकता है। अमेरिका की घोषणा से कुछ ही समय पहले क़ाबुल में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे तत्काल इलाक़ा छोड़ दें।

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