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The News Air - Breaking News - जब बैलट पेपर्स से वोटिंग होती थी तो क्या होता था हम जानते हैं… EVM के खिलाफ बहस पर…

जब बैलट पेपर्स से वोटिंग होती थी तो क्या होता था हम जानते हैं… EVM के खिलाफ बहस पर…

बोला Supreme Court

The News Air Team by The News Air Team
मंगलवार, 16 अप्रैल 2024
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय, सियासत
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Supreme Court On Evm
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नई दिल्ली, 16 अप्रैल (The News Air):: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से वोटिंग और वीवीपैट पर्चियों से मिलान की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने सीक्रेट बैलट के जरिए वोटिंग समस्याओं की ओर इशारा किया। जस्टिस संजीव खन्ना ने याचिकाकर्ता एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के वकील प्रशांत भूषण से कहा कि हम अपनी जिंदगी के छठे दशक में हैं। हम सभी जानते हैं कि जब बैलट पेपर्स से मतदान होता था, तब क्या समस्याएं हुआ करती थी। हो सकता है आपको पता नहीं हो, लेकिन हम भूले नहीं हैं। प्रशांत भूषण यह तर्क दे रहे थे कि कैसे अधिकांश यूरोपीय देश, जिन्होंने ईवीएम के माध्यम से मतदान का विकल्प चुना था, वापस कागज के मतपत्रों पर लौट आए हैं।

प्रशांत भूषण बोले- हम मतपत्रों पर फिर जा सकते हैं

प्रशांत भूषण ने कहा कि हम वापस पेपर बैलट्स (मतपत्रों) पर जा सकते हैं। दूसरा विकल्प ये है कि ईवीएम से वोटिंग के दौरान मतदाताओं को हाथ में वीवीपैट की पर्ची देना। ये भी हो सकता है कि स्लिप मशीन में गिर जाए और इसके बाद वोटर के ये स्लिप मिले। इसके बाद इसे बैलट बॉक्स में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये VVPAT पर्चियां वोटर के हाथ में दी जानी चाहिए। हालांकि, वीवीपैट का डिजाइन बदल दिया गया, यह पारदर्शी ग्लास होना चाहिए था। लेकिन इसे गहरे अपारदर्शी मिरर ग्लास में बदल दिया गया। इसमें केवल तब तक सब दिखाई देता है जब लाइट 7 सेकंड के लिए जलती है।

SC में ईवीएम पर बहस के दौरान कैसे आया जर्मनी का जिक्र

जब प्रशांत भूषण ने जर्मनी का उदाहरण दिया, तो जस्टिस दीपांकर दत्ता ने पूछा कि जर्मनी की जनसंख्या कितनी है। प्रशांत भूषण ने जवाब दिया कि यह लगभग 6 करोड़ है, जबकि भारत में 50-60 करोड़ मतदाता हैं। जस्टिस खन्ना ने कहा कि देश में कुल रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 97 करोड़ है। हम सभी जानते हैं कि जब बैलट पेपर से वोटिंग होती थी तब क्या हुआ था। जब याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि ईवीएम पर डाले गए वोटों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान किया जाना चाहिए। इस पर जस्टिस खन्ना ने जवाब दिया कि आप कहना चाहते हैं कि 60 करोड़ वीवीपैट पर्चियों की गिनती की जानी चाहिए। सही? जस्टिस खन्ना ने कहा कि हां, समस्या तब उत्पन्न होती है जब मानवीय हस्तक्षेप होता है, इसी से समस्या बढ़ जाती है। अगर इंसानी दखल नहीं हो तो वोटिंग मशीन सटीक जवाब देगी। अगर आपके पास ईवीएम में छेड़छाड़ रोकने के लिए कोई सुझाव है, तो आप हमें दे सकते हैं।

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ईवीएम से छेड़छाड़ पर प्रशांत भूषण ने पढ़ा रिसर्च पेपर

इसके बाद प्रशांत भूषण ने ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावना पर एक रिसर्च पेपर पढ़ा। उन्होंने कहा कि ‘वे प्रति विधानसभा केवल 5 वीवीपैट मशीनों की गिनती कर रहे हैं जबकि ऐसी 200 मशीनें हैं, यह केवल 5 फीसदी है और इसमें कोई औचित्य नहीं हो सकता है। सात सेकंड की रोशनी भी हेरफेर का कारण बन सकती है। मतदाता को वीवीपैट पर्ची लेने और इसे मतपेटी में डालने की अनुमति दी जा सकती है। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि मैं प्रशांत भूषण की हर बात को मानता हूं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि ईवीएम को लेकर कोई दुर्भावना है। एकमात्र मुद्दा मतदाता के अपने डाले गए वोट पर विश्वास का है।

वीवीपैट यानी वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल

वीवीपैट पर्ची मतदाता को यह देखने में सक्षम बनाता है कि वोट सही तरीके से डाला गया था और वह जिस उम्मीदवार का समर्थन करता है, उसे गया है। वीवीपैट से एक कागज की पर्ची निकलती है जिसे सीलबंद लिफाफे में रखा जाता है। विवाद होने पर उसे खोला जा सकता है। ईवीएम मतदान प्रणाली के बारे में विपक्ष के सवालों और आशंकाओं के बीच, याचिकाओं में हर वोट के क्रॉस-वेरिफिकेशन की मांग की गई है। याचिकाएं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और कार्यकर्ता अरुण कुमार अग्रवाल की ओर से दायर की गई हैं। अरुण अग्रवाल ने सभी वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती की मांग की है। एडीआर की याचिका में कोर्ट से चुनाव आयोग और केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि मतदाता वीवीपैट के जरिए यह सत्यापित कर सकें कि उनका वोट ‘रिकॉर्डेड के रूप में गिना गया है’।

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