UPI Payment Charge – देश में डिजिटल पेमेंट को लेकर एक बड़ा बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर साफ कर दिया है कि UPI के जरिए 2,000 रुपये से ज्यादा की पेमेंट करने पर अब 0.4 फीसदी का चार्ज लगेगा। देखा जाए तो यह फैसला करोड़ों UPI यूजर्स को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, बल्कि दुकानदारों यानी व्यापारियों से वसूला जाएगा। हालांकि 2,000 रुपये तक की पेमेंट पूरी तरह से फ्री रहेगी और इस पर किसी तरह का कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा।
Finance Ministry ने जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया है कि इस फीस की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। यानी अगर आप 1 लाख रुपये का भुगतान भी UPI से करते हैं, तो भी व्यापारी को अधिकतम 300 रुपये ही देने होंगे। RuPay Debit Card से होने वाले भुगतान को भी इस छूट में शामिल किया गया है।
क्यों लाया गया यह नया नियम?
समझने वाली बात यह है कि सरकार ने यह फैसला अचानक नहीं लिया। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को UPI के जरिए करीब 198 लाख करोड़ रुपये मिले। इनमें से 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन की संख्या महज 4 फीसदी थी। लेकिन गौर करें तो इन ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू 131 लाख करोड़ रुपये थी, जो कुल भुगतान का 66 फीसदी है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि UPI की बढ़ती लोकप्रियता के साथ इसकी सुरक्षा, साइबर फ्रॉड रोकना, तकनीक अपग्रेड करना और पूरे भुगतान सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में लगातार खर्च होता है। सरकार का कहना है कि कानून में यह बदलाव इसी लंबी अवधि की जरूरत को ध्यान में रखकर किया गया है।
MDR क्या है और यह किससे लिया जाता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate। आसान भाषा में समझें तो यह डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले दुकानदार या व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क है। कार्ड से होने वाले भुगतानों में इस तरह की फीस पहले से ही मौजूद है। अब इसे UPI पर भी लागू किया जा रहा है।
और बस यहीं से शुरू हुई असली बहस। विपक्ष का कहना है कि यह चार्ज आखिरकार ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा, क्योंकि व्यापारी अपनी बढ़ी हुई लागत को सामान की कीमत में जोड़ सकते हैं।
ग्राहक पर पड़ेगा असर या व्यापारी पर?
MDR मर्चेंट से जुड़ा है, इसलिए इसका सीधा असर दुकानदार या व्यापारी की भुगतान लागत पर पड़ेगा। हालांकि, अगर व्यापारी की लागत बढ़ती है तो वह इसे अपनी व्यापारिक लागत में शामिल कर सकता है।
इसका असर सामान या सेवा की कीमत पर पड़ेगा या नहीं, यह आगे के नियमों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार का कहना है कि इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।
छोटे दुकानदारों को मिली राहत
छोटे व्यापारियों के लिए राहत की बात यह है कि जिन दुकानदारों का महीने का टर्नओवर 21 लाख रुपये या इससे कम है, उन्हें MDR नहीं देना होगा। यह कदम छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देने और उन्हें डिजिटल पेमेंट अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।
जून 2026 तक देश में करीब 55.5 करोड़ UPI यूजर्स थे। इतनी बड़ी संख्या में यूजर्स होने के कारण ही यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
व्यापारियों से कितना लिया जाएगा शुल्क?
| लेन-देन राशि | MDR दर | वसूली जाने वाला शुल्क |
|---|---|---|
| ₹3,000 | 0.4% | ₹12 |
| ₹50,000 | 0.4% | ₹200 |
| ₹75,000 | 0.4% | ₹300 |
| ₹1,00,000 | 0.4% (₹400 बनता है) | ₹300 (अधिकतम सीमा) |
यानी चाहे आप 1 लाख रुपये का भुगतान करें या 10 लाख का, MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये ही रहेगी।
कांग्रेस ने लगाया ‘मोदी टैक्स’ का आरोप
Congress ने UPI लेन-देन पर फीस को ‘मोदी टैक्स’ करार दिया है और सरकार पर जमकर हमला बोला है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi ने दावा किया कि 2,000 रुपये से ज्यादा के व्यापारिक UPI लेन-देन की गिनती भले ही 5 फीसदी हो, लेकिन UPI के कुल लेन-देन में इनकी हिस्सेदारी 65 फीसदी के करीब है।
राहुल गांधी का कहना है कि इसका बोझ आखिर में कीमतें बढ़ने से ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौता कर चुके प्रधानमंत्री Narendra Modi ने व्यापार समझौते की तरह इस मामले में भी अमेरिका के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एक्स पर लिखा कि महंगाई से परेशान जनता को राहत देने की जगह सरकार उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी कर रही है। जयराम रमेश ने कहा कि 2,000 रुपये से ज्यादा के लेन-देन पर कानून में कोई स्पष्ट सुरक्षा नहीं है।
BJP का पलटवार: कांग्रेस फैला रही झूठ
Bharatiya Janata Party (BJP) ने UPI भुगतान पर फीस को लेकर कांग्रेस पर ‘फेक न्यूज’ फैलाने का आरोप लगाया है। भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस को ‘झूठ की दुकान’ करार देते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि MDR का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि 2,000 रुपये तक का 96 फीसदी UPI व्यापारी लेन-देन पूरी तरह से मुफ्त है। RuPay डेबिट कार्ड भुगतानों पर भी कोई चार्ज नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI लेन-देन भी पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
सवाल उठता है कि क्या इस नए नियम का असर आम लोगों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर व्यापारियों पर MDR का बोझ बढ़ता है, तो वे इसे अपने प्रोडक्ट की कीमत में शामिल कर सकते हैं। खासकर बड़ी खरीदारी जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, या महंगे कपड़ों में यह अंतर नजर आ सकता है।
हालांकि छोटी दुकानों और रोजमर्रा की खरीदारी पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ज्यादातर लेन-देन 2,000 रुपये से कम के ही होते हैं। और यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि किराना दुकान, सब्जी विक्रेता, छोटे रेस्तरां जैसी जगहों पर आमतौर पर 2,000 रुपये से कम का ही भुगतान होता है।
क्या व्यक्तिगत UPI ट्रांजैक्शन पर भी लगेगा चार्ज?
नहीं। यह बेहद महत्वपूर्ण बात है। P2P यानी Person to Person UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे। अगर आप अपने दोस्त को पैसे भेज रहे हैं, किराया दे रहे हैं, या किसी रिश्तेदार को गिफ्ट कर रहे हैं, तो उस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
यह नियम सिर्फ Merchant Payments यानी व्यापारी को किए जाने वाले भुगतान पर लागू होगा।
डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम या बोझ?
इस फैसले को लेकर अर्थशास्त्रियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ का मानना है कि UPI जैसी सेवा को लंबे समय तक चलाने के लिए फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी जरूरी है। बैंक और पेमेंट कंपनियां इस सेवा को चलाने में भारी खर्च कर रही हैं, और MDR से उन्हें कुछ राहत मिलेगी।
दूसरी तरफ, विरोधियों का तर्क है कि सरकार ने UPI को कैशलेस इकोनॉमी का हथियार बनाया और लोगों को डिजिटल पेमेंट अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। अब जब लोग इसे अपना चुके हैं, तो इस पर चार्ज लगाना उचित नहीं है।
क्या यह कदम सही है?
इस सवाल का जवाब समय के साथ मिलेगा। अगर सरकार सख्ती से यह सुनिश्चित करती है कि यह चार्ज ग्राहकों तक न पहुंचे और व्यापारियों पर ही रहे, तो यह व्यवस्था काम कर सकती है। लेकिन अगर व्यापारी इसे अपने प्रोडक्ट की कीमत में जोड़ने लगे, तो आखिरकार आम आदमी की जेब पर ही असर पड़ेगा।
फिलहाल, एक बात तो साफ है कि डिजिटल पेमेंट अब पूरी तरह से फ्री नहीं रहने वाला। हालांकि छोटे लेन-देन करने वालों के लिए अभी भी कोई चिंता नहीं है।
मुख्य बातें (Key Points)
✅ 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर 0.4% MDR चार्ज लागू
✅ अधिकतम शुल्क 300 रुपये तय, चाहे लेन-देन कितना भी बड़ा हो
✅ यह शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा, ग्राहकों से नहीं
✅ 2,000 रुपये तक का भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा
✅ 21 लाख रुपये से कम टर्नओवर वाले दुकानदारों को छूट
✅ P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) UPI ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे
✅ RuPay डेबिट कार्ड भुगतान भी शुल्क मुक्त
✅ कांग्रेस ने इसे ‘मोदी टैक्स’ करार दिया, BJP ने फेक न्यूज बताया













