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The News Air - Breaking News - पर्सनैलिटी कल्ट में फंसा अमेरिकी समाज कैसे जा रहा ट्रंपवाद 2.0 की ओर,

पर्सनैलिटी कल्ट में फंसा अमेरिकी समाज कैसे जा रहा ट्रंपवाद 2.0 की ओर,

जानिए वोटर पर कैसे हुआ कब्जा

The News Air Team by The News Air Team
शुक्रवार, 19 जुलाई 2024
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, सियासत
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ट्रंपवाद
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नई दिल्ली, 19 जुलाई (The News Air): कान से बहते खून वाली ट्रंप की तस्वीर अमेरिका में ट्रंपवाद 2.0 के आगमन का संकेत दे चुकी है। एक ऐसी तस्वीर जिसने अमेरिकी राजनीति को बदल दिया है। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सारा डिस्कोर्स ट्रंप के इर्द गिर्द सिमट गया है। ट्रंप को जानने वाले ये समझते हैं कि पापुलिज्म को राजनीति की मुख्यधारा में ले आना और असल मुद्दों को पीछे धकेल देना, ट्रंप को बहुत अच्छे से आता है। लेकिन जख्मी ट्रंप की ये तस्वीर बीते 40 साल में अमेरिका में हुए बदलावों को भी अपने में समेटे है। खासतौर से 1980s में रोनल्ड रीगन के वक्त के बाद से अमेरिकी जनमानस बहुत बदला है।

फ्री इकोनमी और राजनीति की बारीक कड़ियां इस तरह आपस में इस तरह से गुंथ गई हैं जहां चुनाव की अतिरेकता में सब पीछे छूट जाता है, 2016 के चुनावों के दौरान पर्सनैलिटी कल्ट पॉलिटिक्स का इस्तेमाल कर ट्रंप ने मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार से लेकर दंगों तक पर आक्रामक बयान दिए थे। उन्होंने उस वक्त उग्र राष्ट्रवाद की जो लकीर पकड़ी थी, वो उनके जैसे एक अनजाने नाम को व्हाइट हाउस के सत्ता के गलियारे तक ले गई थी। इस बार ट्रंप सहज तौर पर बाइडेन से आगे दिख रहे हैं।

जानकार बार बार कह रहे हैं कि वो चुनाव में बाइडेन पर लीड बनाए हुए हैं। इन दिनों रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय कन्वेशन में ऐसा होते दिख भी रहा है, ट्रंप पर मीडिया की स्पॉटलाइट लगातार बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट कह रही हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता भी दबे छुपे शब्दों में मान रहे हैं कि ट्रंप को हराना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनियर राजनेता और पूर्व हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी भी बाइडन के साथ निजी तौर पर एक बातचीत में कहा कि वो डोनल्ड ट्रंप को हरा नहीं पाएंगे।

पॉलिटिकल कल्ट की राजनीति की जड़ें अमेरिकी समाज में गहरे पसरी

80 के दशक में रोनाल्ड रीगन पर कमोबेश ऐसा ही हमला हुआ था, जैसा कुछ दिन पहले ट्रंप की रैली में दिखा। लेकिन तब से लेकर अब तक अमेरिकी वोटर और समाज में बहुत बदलाव आया है। जानकार मानते हैं कि ये चुनाव इस मायने में भी खास है कि अमेरिकी जनता ने देश की सबसे ताकतवर पोजिशन के लिए जिन दो लोगों को सामने रखा है, उनके व्यक्तिव बहुत उम्मीद जताने वाले नहीं है.

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अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार कमर आगा कहते हैं कि दोनों ही उम्मीदवारों के पास ना कोई योजना और ना ही कोई पर्सनल करिज्मा। वहीं समाज के एक बड़े तबके का विश्वास भी इन दोनों ही उम्मीदवारों के साथ नहीं है। दुनिया भर की जिम्मेदारियों को कथित तौर पर अपने ऊपर ओढ़ने वाले अमेरिका के लिए राष्ट्रपति का पद बेहद अहम है और फिलहाल में तो लीडरशिप का संकट नजर आ ही रहा है।’ दो अप्रभावी व्यक्तित्वों की रेस में ट्रंप कदम कदम पर खुद को बीस साबित करने की कोशिश में हैं। वो भी तब जबकि अमेरिकी लोग एक सामाजिक निराशा के हालात में हैं। वरिष्ठ अमेरिकन जर्नलिस्ट क्रिस हेज्स कहते हैं, ‘आम अमेरिकी अप्रवासियों से असुरक्षित और आर्थिक संकटों से घिरा महसूस कर रहे हैं।

ऐसे में वो लार्जर दैन लाइफ की इमेज वाले लीडर की ओर खिचें चले आते हैं।’ कूटनीति के क्षेत्र में अमेरिका के लिए अपनी चौधराहट बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। मिडिल ईस्ट में युद्ध और चीन की ओर से कड़ा मुकाबले में अमेरिकी जनता खुद को एक अस्थिरता के बीच पाती है,ऐसे हालातों में अतिरेक फैसलों वाले आक्रामक नेता सहजता से स्पॉटलाइट में आ जाते हैं।

अमेरिका को गौरव की ऊंचाई पर ले जाने वाले ट्रंप को लेकर बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके पूर्वज खुद अमेरिकी मूल के नहीं थे । उनके दादा फ्रेडरिक और दादी एलिज़ाबेथ जर्मनी में पैदा हुए और अमेरिका में आ कर बस गए थे यहीं नहीं पैन अमेरिकनिज्म के पैरोकार ट्रंप की मां भी स्कॉटिश मूल की हैं । । भाषणों में चीन का मखौल उड़ाने वाले ट्रंप असल ज़िंदगी में चीन में ही बनी कमीज़ और टाई पहनते हैं ।

अब प्रतिद्वंदी भी कर रहे समर्थन

मिलवॉकी में चल रहे रिपब्लिकन पार्टी के कन्वेशन में ट्रंप की उम्मीदवारी को लेकर जहां उनके परिवार और समर्थक हरसंभव कोशिश कर कर रहे हैं, वहीं अब उनके प्रतिद्वंदी भी उनके समर्थन में आ गए हैं। ट्रंप की बहू और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी की सह अध्यक्ष चुनी गई लारा ट्रंप ने भीड़ को भावनात्मक तौर पर संबोधित करते हुए कहा कि ट्रंप परिवार ने जान की कई धमकियों का सामना किया है। ट्रंप के रनिंग मेट की दावेदारी के रेस में रहे फ्लोरिडा के सेनेटर मार्को रूबियो भी कन्वेंशन में ट्रंप के समर्थन में बोलते नजर आए, उन्होंने कहा प्रेसिडेंट ट्रंप ने ना सिर्फ पार्टी को रिफॉर्म किया है, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत की है। हालांकि रिपब्लिकन कन्वेंशन का सबसे बड़ा लम्हा रहा ट्रंप की प्रतिद्वंदी निकी हेली का उनके समर्थन में खड़े होना, इसके साथ ही उन्हें रॉन डिसैंटिस और विवेक रामास्वामी भी ट्रंप के पक्ष में लामबंद हो गए हैं। याद रहे कि ये वही निक्की हेली हैं जो दावेदारी की शुरुआती रेस में ट्रंप को इस पद के लिए अयोग्य ठहरा चुकी हैं।

उन्होंने तो पहले ट्रंप को टॉक्सिक तक करार दे दिया था, लेकिन मंच से उन्होंने रिपब्लिकन समर्थकों से ट्रंप के पीछे खड़े होने की अपील की। भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ने ट्रंप के समर्थन में कई अहम बातें की। उन्होंने कहा कि ट्रंप इकोनमी को गति देने में अहम साबित होंगे। जाहिर है, हत्या के प्रयास के बाद पहले से ही ट्रंप के पक्ष में जा रहे अमेरिकी चुनाव को धीरे धीरे एकपक्षीय होता देखा जा सकता है। पार्टी का चार दिनों का राष्ट्रीय कन्वेंशन गुरुवार को खत्म हो जाएगा और माना जा रहा है कि ट्रंप इसमें पहले से ज्यादा मजबूत होकर निकलेंगे।

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