‘हिंदू सेना’ ने गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक पोस्टर लगाए, मचा हंगामा


गाज़ियाबाद, 30 अक्टूबर (The News Air)
केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों (Agricultural Laws) के विरोध में किसान आंदोलन (Farmer Protest) के बीच शनिवार को एक विवादित पोस्टर सामने आया है। ये पोस्टर दिल्ली-यूपी के गाज़ीपुर बॉर्डर (Gazipur Border) पर लगाए गए हैं। किसानों का कहना है कि सुबह ही बैरिकेडिंग के पास हाइवे के डिवाइडर पर हिंदू सेना के नाम ये पोस्टर चस्पा किए गए हैं। इनमें लिखा था-‘दुष्कर्मी किसान, हत्यारा किसान आंदोलन बंद करो।’हालांकि जैसे ही इन पोस्टर की जानकारी पुलिस को मिली तो ये पोस्टर वहाँ से हटा दिए गए।

गाज़ियाबाद स्थित दिल्ली-यूपी गेट (गाज़ीपुर बॉर्डर) पर किसानों के आंदोलन का मामले में नया मोड़ आ गया है। एक तरफ़ शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने टीकरी बॉर्डर से बैरिकेड हटाए तो दूसरी ओर शनिवार को गाज़ीपुर बॉर्डर पर आपत्तिजनक पोस्टर लगा दिए गए। इन पोस्टरों में लिखा है – दुष्कर्मी किसान आंदोलन बंद करो’, आतंकवादी किसान आंदोलन बंद करो’, ‘हत्यारे किसान आंदोलन बंद करो’, ‘दंगाई किसान आंदोलन बंद करो।’वहीं, समय रहते पुलिस ने यह पोस्टर वहाँ से हटा दिए हैं। दूसरी ओर इस पोस्टर में साफ़ तौर पर हिंदू सेना लिखा है। इसके साथ ही सुरजीत यादव नामक व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर भी पोस्टर पर लिखा गया था।

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खोले रास्ते

दरअसल, केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में दिल्ली के बॉर्डर पर सालभर से किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसानों के हाइवे पर डटे होने से पिछले 11 महीने से रास्ता बंद पड़ा था। गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने टीकरी बॉर्डर से बैरिकेडिंग हटाकर एक रास्ता बहाल कर दिया था। इसके बाद शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने गाज़ीपुर बॉर्डर पर लगे बैरिकेडिंग हटा दिए थे। पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाइवे-9 को खोल दिया गया है।

राकेश टिकैत बोले- बॉर्डर खुलने से अब ट्रैक्टर सीधे संसद तक जा सकेंगे

गाज़ीपुर बॉर्डर खोलने पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि देश के किसानों ने कभी भी बॉर्डरों को बंद नहीं किया। ये बॉर्डर तो सरकार ने बंद कर रखे थे और अब सरकार ख़ुद ही खोल रही है। बॉर्डर खुलने से किसान आंदोलन को फ़ायदा होगा और अब उनके ट्रैक्टर सीधे संसद तक जा सकेंगे। सरकार ने क़ानून बनाया है कि किसान कहीं भी फ़सल बेच सकता है। इसलिए अब किसान अपनी फ़सल संसद में ही बेचेंगे और अपने ट्रैक्टर, ट्रॉली, आटा-चक्की साथ लेकर जाएंगे।


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