Strait of Hormuz Crisis के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पाकिस्तान को करारा झटका दिया है और भारत की कूटनीतिक ताकत को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पाकिस्तान के लिए जा रहे एक जहाज “सेलेन” को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रोककर वापस मोड़ दिया, जबकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की विशेष व्यवस्था दी गई है। यह एक घटना नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों की एक बड़ी तस्वीर है।
क्या हुआ जहाज सेलेन के साथ?
सेंट किट्स एंड नेविस के झंडे तले चलने वाला कंटेनर जहाज “सेलेन” संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह बंदरगाह से कराची के लिए रवाना हुआ था। लेकिन जैसे ही यह जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दाखिल हुआ, IRGC नौसेना ने इसे घेर लिया। ईरान का कहना था कि इस जहाज के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं थी। IRGC नौसेना कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसिरी ने स्पष्ट किया कि जहाज “कानूनी प्रोटोकॉल” का पालन करने में विफल रहा और ईरान की समुद्री अथॉरिटी से बातचीत किए बिना कोई भी जहाज यहां से नहीं गुजर सकता।
नतीजा यह हुआ कि कराची जाने वाला जहाज सेलेन अब भारत के मुंबई बंदरगाह की ओर मोड़ दिया गया। VesselFinder और MarineTraffic के डेटा के अनुसार यह जहाज भारत की ओर बढ़ रहा है और लगभग 9 या 10 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।
भारत के लिए रेड कारपेट, पाकिस्तान के लिए सख्त नो
Strait of Hormuz Crisis में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ईरान ने भारत और पाकिस्तान के साथ जिस अलग-अलग तरीके से पेश आया है, उसने दोनों देशों के साथ ईरान के रिश्तों की असलियत उजागर कर दी है। एक तरफ पाकिस्तान का जहाज रोककर वापस भेज दिया गया, तो दूसरी तरफ भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने इसे बिल्कुल साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता सिर्फ उन देशों के लिए बंद है जिनसे ईरान की लड़ाई है। भारत जैसे मित्र राष्ट्रों के लिए ईरान ने एक “विशेष व्यवस्था” तैयार की है ताकि उनके व्यापारिक जहाजों को कोई आंच न आए। इसी व्यवस्था के तहत हाल के दिनों में कई भारतीय जहाज एलपीजी और अन्य ऊर्जा संसाधन लेकर होर्मुज से सुरक्षित गुजरे हैं और भारत पहुंच चुके हैं।
ईरान पाकिस्तान पर सख्त क्यों और भारत पर मेहरबान क्यों?
इसके पीछे कई गहरे कारण हैं। सबसे पहली बात तो यह है कि ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को सीधे तौर पर ठुकरा दिया था। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच “शटल डिप्लोमेसी” करने की कोशिश की, लेकिन ईरान को लगा कि पाकिस्तान अमेरिका की तरफदारी कर रहा है। ईरान ने पाकिस्तान के प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया।
दूसरी तरफ भारत ने शुरू से ही संतुलित रुख अपनाया है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार ईरान के साथ संपर्क में हैं। भारत ने युद्ध में किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया और ईरान के साथ अपने रिश्तों को बखूबी संभाला। ईरान ने भी भारत के इस संतुलित रुख की कद्र की और उसे अपना “मित्र राष्ट्र” मानते हुए व्यापारिक मार्ग पर विशेष सुविधा दी।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा: कूटनीतिक जीत
Strait of Hormuz Crisis के बीच जहां दुनिया भर के देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, भारत की स्थिति कहीं बेहतर है। ईरान की विशेष व्यवस्था के तहत एलपीजी लेकर कई भारतीय जहाज पहले ही सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं और आने वाले दिनों में और भी जहाज होर्मुज पार कर भारत पहुंचने वाले हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह मित्र देशों के जहाजों को रास्ता देगा, बशर्ते वे ईरान के खिलाफ किसी सैन्य गतिविधि में शामिल न हों और ईरान के तय नियमों का पालन करें।
यह भारत की कूटनीति की बड़ी जीत है। जिस समय पूरी दुनिया डरी हुई है और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, उस समय भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है।
पाकिस्तान की बढ़ती मुश्किलें: अनाज संकट भी गहराया
जहाज सेलेन का कराची न पहुंच पाना पाकिस्तान के लिए एक और बड़ा झटका है। पाकिस्तान पहले से ही भीषण अनाज संकट से जूझ रहा है। यह जहाज जो सामान लेकर कराची जा रहा था, वह अब मुंबई पहुंचेगा। इसका मतलब है कि पाकिस्तान को सप्लाई में और देरी होगी और वहां महंगाई का बोझ और बढ़ेगा।
ईरान की तरफ से जो नियम बनाए गए हैं, उनके तहत अब हर जहाज को होर्मुज से गुजरने से पहले ईरान की समुद्री अथॉरिटी से कोऑर्डिनेशन करना अनिवार्य है। जो जहाज बिना अनुमति के आएगा, उसे रोका जाएगा या वापस भेजा जाएगा। सेलेन जहाज इसी सख्त नीति का शिकार हुआ।
बदलते वैश्विक समीकरण: सेलेन का मुड़ना सिर्फ एक जहाज की कहानी नहीं
सेलेन जहाज का मुंबई की ओर मुड़ना सिर्फ एक जहाज का रास्ता बदलना नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक समीकरणों की एक बड़ी तस्वीर है। ईरान ने दुनिया को साफ संदेश दिया है कि भारत के साथ उसके रिश्ते अटूट हैं। जहां पाकिस्तान को उसके अपने पड़ोसियों से ही झटके मिल रहे हैं, वहीं भारत की धाक सात समंदर पार भी बरकरार है। यह घटना बताती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कूटनीति और संतुलित विदेश नीति की ताकत किसी सैन्य शक्ति से कम नहीं होती।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान की IRGC ने पाकिस्तान जा रहे जहाज “सेलेन” को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रोककर वापस भेज दिया, जो अब मुंबई की ओर बढ़ रहा है।
- ईरान के राजदूत ने साफ कहा कि भारत जैसे मित्र देशों के जहाजों के लिए विशेष व्यवस्था है, होर्मुज सिर्फ दुश्मन देशों के लिए बंद है।
- भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीति रंग लाई, कई भारतीय जहाज एलपीजी लेकर सुरक्षित होर्मुज से गुजरे।
- यह घटना भारत की कूटनीतिक ताकत और पाकिस्तान की बिगड़ती अंतरराष्ट्रीय स्थिति को स्पष्ट करती है।













