Southwest Monsoon 2026 Kerala में 26 मई को दस्तक देने वाला है। India Meteorological Department यानी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 15 मई 2026 को यह अहम जानकारी जारी की है। देखा जाए तो यह खबर किसानों से लेकर आम जनता तक सभी के लिए राहत भरी है, खासकर जब देश के कई हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून के आगमन में प्लस-माइनस चार दिन का अंतर हो सकता है।
Ministry of Earth Sciences के तहत काम करने वाले मौसम विभाग ने साफ किया है कि अगले 24 घंटों के भीतर दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। वहीं उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में आने वाले कई दिनों तक लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी।
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां देश के उत्तरी और मध्य हिस्से गर्मी से तप रहे हैं, वहीं पूर्वोत्तर भारत में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और कर्नाटक के दक्षिणी आंतरिक हिस्सों में भी अगले 3-4 दिनों में भारी बारिश की संभावना है।

पिछले 24 घंटों में क्या रहा मौसम का हाल
14 मई की सुबह 8:30 बजे से लेकर 15 मई की सुबह 8:30 बजे तक के दौरान मौसम का मिजाज काफी उग्र रहा। असम और मेघालय के कुछ इलाकों में अति भारी बारिश (27 सेंटीमीटर तक) दर्ज की गई। अगर गौर करें तो असम के बी पी घाट में 27 सेमी बारिश हुई, जो चिंता का विषय है।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, तटीय और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश (7-11 सेमी) देखी गई। वहीं तूफानी हवाओं का भी कहर जारी रहा।
| राज्य/क्षेत्र | स्थान | तूफानी हवा की रफ्तार (किमी/घंटा) |
|---|---|---|
| राजस्थान | फतेहपुर | 80 |
| राजस्थान | जयपुर | 72 |
| पंजाब | फरीदकोट | 72 |
| जम्मू-कश्मीर | रामबम | 72 |
| छत्तीसगढ़ | बिलासपुर | 68 |
| उत्तर प्रदेश | मुजफ्फरनगर | 63 |
| अंडमान-निकोबार | श्री विजयपुरम | 58 |
समझने वाली बात यह है कि 50-75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी-तूफान किसी भी कच्चे मकान, पेड़-पौधे और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा सकती है। राजस्थान के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई और धूल भरी आंधी का भी सामना करना पड़ा।
तापमान ने तोड़े रिकॉर्ड, महाराष्ट्र का अकोला सबसे गर्म
14 मई को देश के मध्य भारत और उत्तरी प्रायद्वीपीय हिस्सों, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा के कई इलाकों में तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र के अकोला में सबसे अधिक तापमान 45.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
गुजरात, दक्षिण राजस्थान, उत्तरी आंतरिक महाराष्ट्र और आस-पास के मध्य प्रदेश के कई स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 2-5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में सामान्य से 3.1-5.0 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।
मानसून 2026: किसानों के लिए राहत की उम्मीद
भारतीय कृषि का आधार मानसून है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के केरल में 26 मई को पहुंचने की संभावना से किसानों में खुशी की लहर है। बीते कुछ सालों में जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव देखा गया है, लेकिन इस बार मौसम विभाग ने अपेक्षाकृत सटीक भविष्यवाणी की है।
अगले 24 घंटों में दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन चुकी हैं। इसका मतलब है कि जल्द ही देश के अन्य हिस्सों में भी मानसूनी बारिश शुरू हो सकती है।
मौसम प्रणालियां और चेतावनी: क्या है स्थिति
15 मई 2026 को सुबह 8:30 बजे तक मौसम विभाग ने कई महत्वपूर्ण मौसम प्रणालियों की पहचान की है:
- दक्षिण-पश्चिम और आस-पास की पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है
- पश्चिमी विक्षोभ मध्य क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं में एक द्रोणी के रूप में मौजूद है
- जम्मू और आसपास के उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर निचले क्षोभमंडलीय स्तर में एक चक्रवाती परिसंचरण है
- पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण है
उत्तर-पश्चिम भारत: बारिश और तूफान का अलर्ट
जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 15 और 16 मई को हल्की से मध्यम बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार) की संभावना है।
पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिम राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 15 मई को हल्की से मध्यम बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की संभावना है। वहीं पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 15 मई को तूफानी हवाएं (50-60 किमी प्रति घंटे से 70 किमी प्रति घंटे तक) चल सकती हैं।
पश्चिम राजस्थान में 15 मई को धूल भरी आंधी की भी संभावना है।
पूर्वोत्तर भारत में भारी से अति भारी बारिश का खतरा
नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 15-17 मई के दौरान छिटपुट से काफी व्यापक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। साथ ही आकाशीय बिजली और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटे) भी चल सकती हैं।
अरुणाचल प्रदेश में 15-17 मई और 20-21 मई को भारी बारिश की संभावना है। असम और मेघालय में 15-21 मई के दौरान भारी बारिश का अनुमान है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम में 15, 20 और 21 मई को भारी बारिश हो सकती है।
खास बात यह है कि दक्षिण असम में 15 मई को अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इससे बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
पूर्वी भारत: बंगाल, बिहार, झारखंड में मौसम का मिजाज
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 15-19 मई के दौरान छिटपुट से काफी व्यापक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। साथ ही आकाशीय बिजली और तेज/तूफानी हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटे) भी चल सकती हैं।
बिहार, झारखंड और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 15-21 मई के दौरान ऐसी ही मौसमी स्थिति रहेगी। गंगीय पश्चिम बंगाल में 15 और 16 मई को, तथा ओडिशा में 15-19 मई के दौरान बारिश होगी।
| क्षेत्र | तारीख | चेतावनी |
|---|---|---|
| अंडमान-निकोबार | 15-18 मई | तूफानी हवाएं 50-70 किमी/घंटा |
| बिहार | 15, 16, 20, 21 मई | तूफानी हवाएं 50-70 किमी/घंटा |
| झारखंड | 17-18 मई | तूफानी हवाएं 50-70 किमी/घंटा |
| ओडिशा | 15 मई | तूफानी हवाएं 50-70 किमी/घंटा |
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में 15-18 मई के दौरान भारी बारिश की संभावना है। अंडमान-निकोबार में 16 और 17 मई को अति भारी बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 17 मई को अति भारी बारिश की चेतावनी है।
मध्य भारत: छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मौसम
पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 मई को हल्की से मध्यम बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) की संभावना है। छत्तीसगढ़ में 15-17 मई के दौरान ऐसी ही स्थिति रहेगी।
छत्तीसगढ़ में 15 मई को तूफानी हवाएं (50-60 किमी प्रति घंटे से 70 किमी प्रति घंटे तक) चल सकती हैं।
पश्चिम भारत: महाराष्ट्र और गोवा में बारिश
कोंकण और गोवा में 15-17 मई के दौरान हल्की से मध्यम बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 15-18 मई के दौरान ऐसी ही मौसमी स्थिति रहेगी।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक
केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और आंतरिक कर्नाटक में 15-19 मई के दौरान छिटपुट से काफी व्यापक आकाशीय बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे) के साथ बारिश की संभावना है। लक्षद्वीप में 15 और 16 मई को ऐसी ही स्थिति रहेगी।
तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 15-17 मई के दौरान भारी बारिश की संभावना है। केरल में 16 और 17 मई को भारी बारिश हो सकती है। लक्षद्वीप में 15 मई को भारी बारिश की संभावना है। दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 15-18 मई के दौरान भारी बारिश हो सकती है।
केरल में 15 मई को अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 15 मई को ओलावृष्टि की भी संभावना है।
तापमान में बदलाव: कहां गर्मी बढ़ेगी, कहां राहत मिलेगी
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में तापमान में महत्वपूर्ण बदलाव होने वाले हैं:
- पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 21 मई तक अधिकतम तापमान में 4-6 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि संभव है
- उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 18 मई तक अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होगी
- मध्य भारत में 17 मई तक कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन 18 और 19 मई को 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी
- पूर्वी भारत में 17 मई तक 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि होगी
- गुजरात में 16 मई तक 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट होगी
- महाराष्ट्र में 18 मई तक कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन 19-21 मई के दौरान 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होगी
लू की चेतावनी: कहां रहना होगा सावधान
यह सबसे अहम और चिंताजनक पहलू है। देश के कई हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू की चेतावनी जारी की गई है:
पश्चिम राजस्थान: 15-21 मई के दौरान लू की स्थिति रहेगी। 18-21 मई को कुछ स्थानों पर भीषण लू चलेगी।
उत्तर प्रदेश: 16-21 मई के दौरान लू की स्थिति रहेगी। 18 और 19 मई को कुछ स्थानों पर भीषण लू चलेगी।
पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: 17-21 मई के दौरान लू की स्थिति रहेगी।
पूर्वी राजस्थान: 16-21 मई के दौरान लू की स्थिति रहेगी।
मध्य प्रदेश और विदर्भ: 15-21 मई के दौरान लू की स्थिति रहेगी।
छत्तीसगढ़: 18-21 मई के दौरान लू की स्थिति रहेगी।
झारखंड: 16-18 मई के दौरान लू की स्थिति रहेगी।
मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र और कच्छ: 15 मई को लू की स्थिति रहेगी।
कोंकण और गोवा में 15 और 16 मई को गर्म और आर्द्र मौसम रहेगा। मध्य प्रदेश और विदर्भ में 15 और 16 मई को गर्म रात की स्थिति रहेगी।
मछुआरों के लिए खास चेतावनी
मछुआरों को 15 मई से 20 मई 2026 के दौरान निम्नलिखित क्षेत्रों में समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है:
बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण बंगाल की खाड़ी के कई हिस्से, पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी पर विशेष ध्यान देना होगा। 15-19 मई के दौरान इन क्षेत्रों में समुद्र उफान पर रहेगा।
अंडमान सागर में 15 से 20 मई के दौरान मछली पकड़ने से बचना चाहिए।
अरब सागर: केरल, कर्नाटक तटों के साथ-साथ, लक्षद्वीप के ऊपर, मालदीव के आस-पास के क्षेत्रों में 15 और 16 मई को नहीं जाना चाहिए। सोमालिया तट के साथ-साथ, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में 15 से 20 मई के दौरान मछुआरों को नहीं जाना चाहिए।
दिल्ली/एनसीआर का मौसम पूर्वानुमान (15-18 मई 2026)
राजधानी दिल्ली और एनसीआर के लोगों के लिए भी खास जानकारी है:
15 मई 2026: मुख्य रूप से साफ आसमान, दोपहर/शाम की ओर आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। शाम/रात के दौरान बहुत हल्की से हल्की बारिश के साथ आकाशीय बिजली/बिजली कड़कने और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटे से 60 किमी प्रति घंटे तक) की संभावना है। अधिकतम तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
16 मई 2026: मुख्य रूप से साफ आसमान। अधिकतम तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23-25 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
17 मई 2026: मुख्य रूप से साफ आसमान। दोपहर/शाम की ओर आकाशीय बिजली की संभावना। दिन के दौरान तेज हवाएं 20-30 किमी प्रति घंटे से कभी-कभी 40 किमी प्रति घंटे तक चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 41-43 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
18 मई 2026: मुख्य रूप से साफ आसमान। दिन के दौरान तेज हवाएं 20-30 किमी प्रति घंटे से कभी-कभी 40 किमी प्रति घंटे तक चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 42-44 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25-27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
13 मई 2026: उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान का कहर
मौसम विभाग ने 13 मई 2026 को उत्तर प्रदेश में आए विनाशकारी आंधी-तूफान की विस्तृत रिपोर्ट भी जारी की है। यह घटना बेहद चिंताजनक रही।
13 मई 2026 को सुबह के समय उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश में कई मध्यम से गंभीर आंधी-तूफान की कोशिकाएं विकसित हुईं और दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ते हुए मध्य उत्तर प्रदेश को पार करते हुए राज्य के कई जिलों को प्रभावित किया। जैसे-जैसे ये तूफानी कोशिकाएं दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ीं, वैसे-वैसे और तेज होती गईं। इसलिए दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश के जिलों में ज्यादा नुकसान हुआ।
आंधी-तूफान के साथ निम्नलिखित मौसमी घटनाएं हुईं:
- कई जिलों में तूफानी/तेज हवाएं
- राज्य के कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि
- मध्यम से तीव्र बिजली गतिविधि
- प्रभावित जिलों में हल्की से मध्यम बारिश
बरेली के जी चुल्हरा गौशाला में 130 किमी/घंटा, प्रयागराज के गांव डोगराई में 130 किमी/घंटा, प्रयागराज के गांव बधिया में 117 किमी/घंटा, चंदौली के तहसील परिसर नौगढ़ में 113 किमी/घंटा, बदायूं के गांव गुलरिया में 109 किमी/घंटा की रफ्तार वाली तूफानी हवाएं दर्ज की गईं।
समझने वाली बात यह है कि इतनी तेज हवाओं का असर बेहद विनाशकारी होता है। पेड़ उखड़ जाते हैं, अस्थायी संरचनाएं/दीवारें/खंभे/होर्डिंग और शेड क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) के अनुसार, इस विनाशकारी मौसम के कारण राज्य के कई जिलों में व्यापक व्यवधान और नुकसान हुआ। मीडिया सूत्रों के अनुसार, मुख्य रूप से पेड़ उखड़ने, अस्थायी संरचनाओं/दीवारों/खंभों/होर्डिंग और शेड के क्षतिग्रस्त होने/गिरने से संबंधित घटनाओं के कारण कई लोगों की मौत की खबरें भी आई थीं।
क्या थी तूफान के पीछे की मौसमी प्रणालियां
13 मई 2026 को तीव्र आंधी-तूफान गतिविधि का कारण बनने वाली मौसमी प्रणालियां:
- दक्षिण हरियाणा और आस-पास के क्षेत्र के ऊपर समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण था
- उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आस-पास के उत्तराखंड के ऊपर समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर तीसरा ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण था
- ये सभी चक्रवाती परिसंचरण ऊपर की ओर गति के लिए ट्रिगरिंग मैकेनिज्म प्रदान करते थे
- पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में तीव्र गर्मी थी
- बंगाल की खाड़ी से निचले क्षोभमंडलीय गर्म और नम पूर्वी हवाओं के कारण मजबूत नमी का प्रवेश था
- उपरोक्त गर्म और नम पूर्वी हवा ने ऊपरी क्षोभमंडलीय उप-उष्णकटिबंधीय पछुआ जेट (STWJ) के साथ मध्य क्षोभमंडलीय ठंडी और शुष्क पछुआ हवाओं के साथ परस्पर क्रिया की
मौसम विभाग ने कैसे दी थी चेतावनी
मौसम केंद्र, लखनऊ ने डॉपलर मौसम रडार (DWR), उपग्रह इमेजरी और अन्य मौसम विज्ञान उत्पादों जैसे विभिन्न मौसम विज्ञान उपकरणों और उत्पादों का उपयोग करके संवहनी विकास की निरंतर निगरानी की। उप-दैनिक लघु-श्रेणी पूर्वानुमान के अलावा, सभी हितधारकों को सोशल मीडिया, ईमेल, वेबपेज और SACHET पोर्टल सहित संचार के विभिन्न तरीकों के माध्यम से उचित रंग कोड और पर्याप्त लीड टाइम के साथ आवश्यक नाउकास्ट चेतावनियां जारी की गईं।
दिलचस्प बात यह है कि 13 मई 2026 को दोपहर लगभग 2:30 बजे आईएसटी के आसपास, राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के लिए ओलावृष्टि और 60 किमी प्रति घंटे से अधिक की तेज हवा के साथ आकाशीय बिजली के साथ आंधी के लिए चेतावनी को येलो से ऑरेंज में अपग्रेड किया गया था।
मौसम केंद्र, लखनऊ ने जारी किया था:
- कुछ संभावित क्षेत्रों के लिए लघु/मध्यम श्रेणी दैनिक जिला स्तरीय चेतावनियां
- पर्याप्त अग्रिम समय (लीड टाइम) के साथ उचित रंग कोड के साथ नाउकास्ट चेतावनियों की वास्तविक समय निगरानी और जारी करना
3 घंटे की NOWCAST में भदोही (संत रविदास नगर), फतेहपुर, जौनपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कौशाम्बी, लखनऊ, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, उन्नाव के लिए अलग-अलग समय पर अगले 3 घंटे के लिए 80 किमी/घंटे की अधिकतम हवा की गति की भविष्यवाणी की गई थी।
इसी तरह अलीगढ़, अम्बेडकर नगर, अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलरामपुर, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, गोंडा, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, शाहजहांपुर, शामली, सीतापुर, सोनभद्र, वाराणसी के लिए 70 किमी/घंटे की अधिकतम हवा की गति की भविष्यवाणी की गई थी।
लू से बचाव: क्या करें और क्या न करें
लू के दौरान निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां:
- लंबे समय तक धूप में रहने या भारी काम करने वाले लोगों में हीट इलनेस के लक्षणों की संभावना बढ़ जाती है
- कमजोर लोगों जैसे शिशुओं, बुजुर्गों, पुरानी बीमारियों वाले लोगों के लिए उच्च स्वास्थ्य चिंता
- गर्मी के संपर्क से बचें – ठंडा रहें। निर्जलीकरण से बचें
- पर्याप्त पानी पिएं – भले ही प्यास न लगे
- ओआरएस, घर पर बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का पानी), नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें
कृषि संबंधी सलाह:
- राजस्थान में हरे चने और ग्रीष्मकालीन कद्दूवर्गीय फसलों जैसे लौकी, कद्दू, तोरी, तोरई, खीरा, करेला, काचरा, ककड़ी और ग्रीष्मकालीन भिंडी, पालक और आम, आंवला, अनार, बेल और आलूबुखारा जैसे युवा फलों के पौधों को आवश्यकतानुसार सिंचाई दें
- मध्य प्रदेश में मक्का, मूंग, उड़द, मूंगफली और सब्जी फसलों को आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई दें
- गुजरात में क्लस्टर बीन, मूंगफली, हरे चने, काले चने और सब्जियों जैसे खीरा, तोरई, लौकी, तोरी और करेला को सुबह या शाम के समय हल्की और बार-बार सिंचाई दें
आंधी-तूफान और ओलावृष्टि से बचाव
अपेक्षित प्रभाव:
- पेड़ की शाखाओं का टूटना, बड़े रास्ते के पेड़ उखड़ना
- खड़ी फसलों को नुकसान
- केला और पपीता के पेड़ों को मामूली से बड़ा नुकसान
- शाखाओं के टूटने से बिजली और संचार लाइनों को मामूली से बड़ा नुकसान
- तेज हवा/ओले बागान, बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं
- ओले खुले स्थानों पर लोगों और मवेशियों को घायल कर सकते हैं
- तेज हवाओं से कमजोर संरचनाओं को आंशिक नुकसान
- कच्चे घरों/दीवारों और झोपड़ियों को मामूली नुकसान
सुझाए गए कदम:
- लोगों को सलाह दी जाती है कि बिगड़ती परिस्थितियों पर नजर रखें और तदनुसार सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें
- घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद करें और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें
- सुरक्षित आश्रय लें; पेड़ों के नीचे आश्रय न लें
- कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों के खिलाफ न झुकें
- विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग करें
- तुरंत जल निकायों से बाहर निकलें
- बिजली का संचालन करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें
भारी बारिश से होने वाले प्रभाव और सुझाए गए कदम
अपेक्षित प्रभाव:
- सड़कों की स्थानीयकृत बाढ़, निचले इलाकों में जल भराव और मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में अंडरपास का बंद होना
- भारी बारिश के कारण कभी-कभी दृश्यता में कमी
- जल भराव के कारण प्रमुख शहरों में यातायात में व्यवधान जिससे यात्रा का समय बढ़ जाता है
- कच्ची सड़कों को मामूली नुकसान
- कमजोर संरचना को नुकसान की संभावनाएं
- स्थानीयकृत भूस्खलन/कीचड़ स्खलन
- डूबने के कारण कुछ क्षेत्रों में बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान
सुझाए गए कदम:
- अपने गंतव्य के लिए जाने से पहले अपने मार्ग पर यातायात भीड़ की जांच करें
- इस संबंध में जारी किसी भी यातायात सलाह का पालन करें
- ऐसे क्षेत्रों में जाने से बचें जो अक्सर जल भराव की समस्या का सामना करते हैं
- कमजोर संरचना में रहने से बचें
पशुधन/मुर्गी पालन/मत्स्य पालन संबंधी सलाह
- ओलावृष्टि/भारी बारिश के दौरान जानवरों को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित चारा प्रदान करें
- खराब होने से बचाने के लिए चारे और चारे को सुरक्षित स्थान पर स्टोर करें
- तालाबों के आस-पास उचित जाल के साथ एक आउटलेट का निर्माण करें ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके, जिससे अतिप्रवाह की स्थिति में मछली के भागने से रोका जा सके
- उच्च तापमान और लू वाले क्षेत्रों में जानवरों के लिए स्वच्छ, स्वच्छ और पर्याप्त पीने का पानी प्रदान करें, और प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए मुर्गी पालन शेड की छतों को घास से ढकें
मुख्य बातें (Key Points)
- Southwest Monsoon 2026 केरल में 26 मई को पहुंचने की संभावना है (±4 दिन का अंतर हो सकता है)
- पश्चिम राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 18-21 मई को भीषण लू की चेतावनी
- असम-मेघालय में 15 मई को 27 सेमी तक बारिश दर्ज की गई
- पूर्वोत्तर भारत में अगले सप्ताह भारी से अति भारी बारिश की संभावना
- 13 मई 2026 को उत्तर प्रदेश में 130 किमी/घंटा की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं से व्यापक नुकसान
- मछुआरों को 15-20 मई के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कई हिस्सों में न जाने की सलाह
- दिल्ली में 18 मई को 42-44 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच सकता है











