Sonam Wangchuk की 170 दिनों की हिरासत के बाद केंद्र सरकार ने आखिरकार 13 मार्च को उनकी रिहाई का आदेश जारी कर दिया, लेकिन इस फैसले से लद्दाख का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई के बावजूद लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने साफ कर दिया है कि 16 मार्च के लिए तय विरोध प्रदर्शन रद्द नहीं किया जाएगा। LAB अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरुक ने कहा कि संघर्ष सिर्फ एक व्यक्ति की रिहाई तक सीमित नहीं है। वहीं कांग्रेस ने इस मामले में मोदी सरकार को जमकर घेरा है और प्रधानमंत्री से लद्दाख की जनता से माफी मांगने की मांग की है।
170 दिन हिरासत में रहे वांगचुक, रिहाई से भी नहीं शांत हुआ गुस्सा
Sonam Wangchuk को करीब 6 महीने पहले लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई थी। सितंबर 2025 से हिरासत में बंद वांगचुक की रिहाई का आदेश सरकार ने 13 मार्च 2026 को जारी किया।
लेकिन लद्दाख की जनता और नागरिक समाज समूहों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। उनका स्पष्ट कहना है कि वांगचुक की रिहाई उनकी मांगों का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा थी। असल मांगें अभी भी अधूरी हैं और जब तक उन्हें पूरा नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। 170 दिन की हिरासत ने लद्दाख के लोगों में सरकार के प्रति गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है।
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लद्दाख की वो चार बड़ी मांगें जो अभी अधूरी हैं
Sonam Wangchuk की रिहाई के बाद भी लद्दाख आंदोलन जारी रहने की सबसे बड़ी वजह वे चार प्रमुख मांगें हैं जो अभी तक पूरी नहीं हुई हैं:
पहली मांग: लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। 2019 में जब जम्मू-कश्मीर से अलग करके लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तब से यहां के लोग पूर्ण राज्य की मांग कर रहे हैं।
दूसरी मांग: संविधान की छठी अनुसूची के तहत जनजातीय सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि लद्दाख की अनूठी संस्कृति, भाषा और जमीन की रक्षा हो सके।
तीसरी मांग: लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटें दी जाएं, ताकि दोनों क्षेत्रों का संसद में उचित प्रतिनिधित्व हो सके।
चौथी मांग: सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं की भर्ती को प्राथमिकता दी जाए। लद्दाख के युवा लंबे समय से रोजगार की कमी से जूझ रहे हैं और बाहर से आने वाले लोगों को नौकरी मिलने से स्थानीय आबादी में नाराजगी है।
LAB अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरुक बोले: संघर्ष एक व्यक्ति तक सीमित नहीं
Sonam Wangchuk की रिहाई पर लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरुक ने बेहद स्पष्ट और सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ एक व्यक्ति की रिहाई के लिए नहीं चल रहा। यह लद्दाख की पूरी जनता के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है।
लकरुक ने यह भी मांग उठाई कि सिर्फ वांगचुक ही नहीं, बल्कि सितंबर 2025 से हिरासत में बंद पूर्व विधायक डिल्डन नामग्याल और कार्यकर्ता स्मानला दरजे की भी तुरंत रिहाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक सभी कार्यकर्ता रिहा नहीं होते और मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
16 मार्च को कारगिल में जुटेंगे हजारों लोग
Sonam Wangchuk की रिहाई के बावजूद 16 मार्च को लद्दाख में बड़ा विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सज्जाद कारगिल ने बताया कि 16 मार्च को कारगिल में हजारों लोग जुटेंगे और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
सज्जाद ने कहा कि NSA हटाना एक अच्छा कदम है, लेकिन यह काफी नहीं है। उनकी साफ मांग है कि दूसरे कार्यकर्ताओं पर लगे आरोप भी बिना शर्त हटाए जाएं। जब तक सरकार सभी कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगे मामले वापस नहीं लेती, तब तक लद्दाख की जनता पीछे हटने को तैयार नहीं है। यह प्रदर्शन लेह और कारगिल दोनों जगह एक साथ होगा, जो सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है।
कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा, जयराम रमेश बोले: सरकार बेनकाब
Sonam Wangchuk के मामले पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने वांगचुक की हिरासत को “फर्जी” करार दिया और इसे मोदी सरकार का यूटर्न बताया।
जयराम रमेश ने कहा, “सरकार पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। 170 दिन तक एक जलवायु कार्यकर्ता को NSA के तहत बिना किसी ठोस आधार के बंद रखा गया। अब जब जनता का दबाव बढ़ा तो रिहा कर दिया। प्रधानमंत्री को लद्दाख के लोगों से माफी मांगनी चाहिए।” कांग्रेस का यह हमला ऐसे समय आया है जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव करीब हैं और लद्दाख का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में गर्मा सकता है।
उच्चाधिकार समिति की बैठक का इंतजार, ठोस नतीजे की मांग
Sonam Wangchuk और लद्दाख के आंदोलनकारियों की मांगों पर केंद्र सरकार ने पहले एक उच्चाधिकार समिति गठित की थी। इस समिति की कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। स्थानीय नेताओं का साफ कहना है कि जब तक इस समिति की बैठकों का कोई ठोस और सकारात्मक परिणाम नहीं निकलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
लद्दाख की जनता को लगता है कि सरकार बातचीत के नाम पर समय खरीद रही है और उनकी मांगों को टाल रही है। पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची जैसी मांगें ऐसी हैं जिन पर सरकार ने अभी तक कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है, जो जनता की निराशा और गुस्से को और बढ़ा रहा है।
क्यों है लद्दाख का यह आंदोलन हर भारतीय के लिए अहम
Sonam Wangchuk का मामला सिर्फ लद्दाख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। 2019 में जब अनुच्छेद 370 हटाकर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तब सरकार ने कहा था कि इससे लद्दाख का विकास होगा। लेकिन छह साल बाद भी लद्दाख की जनता अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर है।
जिस शख्स ने अपनी पूरी जिंदगी लद्दाख के विकास और जलवायु संरक्षण में लगा दी, उसे NSA जैसे कड़े कानून के तहत 170 दिन हिरासत में रखना कई सवाल खड़े करता है। लद्दाख जैसा सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र जहां चीन की सीमा से लगातार तनाव बना रहता है, वहां की जनता की नाराजगी को नजरअंदाज करना सरकार के लिए दूरगामी रूप से नुकसानदायक हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Sonam Wangchuk 170 दिनों की हिरासत के बाद 13 मार्च को रिहा हुए, लेकिन लद्दाख का आंदोलन जारी, 16 मार्च को कारगिल में बड़ा प्रदर्शन।
- LAB अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरुक ने कहा कि लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, पूर्व विधायक डिल्डन नामग्याल और कार्यकर्ता स्मानला दरजे की भी रिहाई की मांग।
- लद्दाख की चार बड़ी मांगें अधूरी: पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, अलग लोकसभा सीटें और स्थानीय युवाओं की भर्ती।
- कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने वांगचुक की हिरासत को फर्जी बताया, कहा सरकार बेनकाब, PM से लद्दाख की जनता से माफी मांगने की मांग।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: Sonam Wangchuk को क्यों गिरफ्तार किया गया था?
सोनम वांगचुक को सितंबर 2025 में लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। वे लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा और स्थानीय युवाओं को रोजगार जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। 170 दिन हिरासत में रहने के बाद 13 मार्च 2026 को उन्हें रिहा किया गया।
Q2: लद्दाख आंदोलन की मुख्य मांगें क्या हैं?
लद्दाख आंदोलन की चार प्रमुख मांगें हैं: पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के तहत जनजातीय सुरक्षा, लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटें और सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं की प्राथमिकता से भर्ती।
Q3: सोनम वांगचुक कौन हैं और उन्हें 3 Idiots से क्या कनेक्शन है?
सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता हैं। उन्होंने SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की। उनकी कहानी ने बॉलीवुड फिल्म ‘3 Idiots’ में आमिर खान के किरदार ‘फुनसुक वांगडू’ को प्रेरित किया। वे Ice Stupa तकनीक के लिए भी विश्वभर में जाने जाते हैं।






