Sonam Wangchuk hunger strike को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार से तत्काल जवाब मांगा है। मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने वकील और कार्यकर्ता राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर इस याचिका पर गंभीरता दिखाते हुए दोनों सरकारों को गुरुवार तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने साफ कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वह इस पर तुरंत सुनवाई के लिए तैयार है।
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वांगचुक की सेहत बिगड़ी, 8.5 किलो वजन घटा
याचिका में दावा किया गया है कि भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से सोनम वांगचुक का करीब 8.5 किलो वजन कम हो गया है। उनकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है और स्थिति जानलेवा हो सकती है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि वांगचुक को तत्काल सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उन्हें चिकित्सीय सहायता दी जाए, जिसमें जरूरत पड़ने पर पोषण संबंधी सहायता भी शामिल हो।
दिलचस्प बात यह है कि जब यह मामला कोर्ट में उठाया गया तो केंद्र सरकार की ओर से कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था। इसे देखते हुए बेंच ने कहा कि गंभीरता को समझते हुए वह याचिका पर विचार करने को तैयार है। अदालत ने केंद्र को अगली सुनवाई से पहले जरूरी निर्देश प्राप्त करने और याचिका की प्रति संबंधित कानूनी अधिकारियों को सौंपने का आदेश दिया।
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शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग क्यों
समझने वाली बात यह है कि सोनम वांगचुक ने यह हड़ताल क्यों शुरू की। दरअसल, उन्होंने काकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शनों में शामिल होकर यह मांग उठाई है कि कथित परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में हो रही अनियमितताओं के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया जाए और उनसे इस्तीफा मांगा जाए। यह प्रदर्शन अभियान 20 जून को शुरू हुआ था।
अगर गौर करें तो पिछले कुछ महीनों में NEET और NET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के कई मामले सामने आए हैं, जिससे देश भर के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया। इसी को लेकर छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
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याचिका में क्या मांगें
याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा है कि वांगचुक की सेहत को बिना दखल दिए बिगड़ने देना गंभीर नतीजे पैदा करेगा। उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि कार्यकर्ता को तुरंत चिकित्सीय देखभाल मुहैया कराई जाए, भले ही ऐसा इलाज उनकी सहमति के बिना ही क्यों न देना पड़े। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह किसी भी नागरिक की जान की रक्षा करे।
देखा जाए तो यह पहली बार नहीं है जब सोनम वांगचुक किसी मुद्दे को लेकर इतने लंबे समय तक आंदोलन कर रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण और विशेष संवैधानिक दर्जे के लिए कई बार उपवास किया है।
कोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वह न्यायपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारी को समझती है और जीवन की रक्षा सर्वोपरि है। बेंच ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वे कार्यकर्ता को किसी भी अपूरणीय नुकसान से बचाने के लिए तुरंत कदम उठाएं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कोर्ट ने किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया, बल्कि सिर्फ इतना कहा कि मानवीय जीवन सबसे महत्वपूर्ण है और उसकी रक्षा की जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होनी है।
मुख्य बातें (Key Points):
- सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं
- दिल्ली हाई कोर्ट ने PIL पर केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
- भूख हड़ताल के बाद 8.5 किलो वजन घटा, सेहत चिंताजनक
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
- अदालत ने तत्काल चिकित्सीय सहायता देने का आदेश दिया













