Silver Price Today – वायदा कारोबार (Futures Market) में शुक्रवार को चांदी की कीमत में भारी गिरावट देखने को मिली। व्यापारियों द्वारा की गई बिकवाली (मुनाफावसूली) के कारण चांदी का भाव 1,258 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 2,14,755 रुपये पर आ गया।
देखा जाए तो यह गिरावट घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में देखी गई, जहां निवेशकों ने हाल के दिनों में हुई तेजी के बाद मुनाफा वसूलने का फैसला किया।
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MCX पर कारोबार की स्थिति
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर महीने की डिलीवरी वाले चांदी के समझौतों (Contracts) का भाव 1,258 रुपये यानी 0.58 फीसदी की गिरावट के साथ 2,14,755 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस दौरान कुल 1,563 लॉट (Lot) का कारोबार हुआ। समझने वाली बात है कि MCX पर चांदी का एक लॉट 30 किलोग्राम का होता है, जिसका मतलब है कि लगभग 46,890 किलोग्राम चांदी का कारोबार हुआ।
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पिछले सत्र की तुलना:
| विवरण | गुरुवार (पिछला सत्र) | शुक्रवार (आज) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| भाव (प्रति किग्रा) | ₹2,16,013 | ₹2,14,755 | -₹1,258 |
| प्रतिशत बदलाव | – | -0.58% | – |
| कारोबार (लॉट) | – | 1,563 | – |
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, व्यापारियों द्वारा की गई बिकवाली के कारण चांदी की कीमतों पर यह दबाव देखने को मिला है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट
अगर ग्लोबल स्तर की बात करें, तो न्यूयॉर्क में चांदी का भाव 0.11 फीसदी गिरकर 58.46 डॉलर प्रति औंस (Ounce) रह गया।
वैश्विक बाजार की स्थिति:
| बाजार | पिछला भाव | वर्तमान भाव | बदलाव |
|---|---|---|---|
| न्यूयॉर्क (COMEX) | $58.52/oz | $58.46/oz | -0.11% |
| लंदन (LBMA) | आंकड़े प्रतीक्षित | आंकड़े प्रतीक्षित | – |
दिलचस्प बात यह है कि वैश्विक बाजारों में भी चांदी में हल्की कमजोरी देखी गई, जो दर्शाता है कि यह एक ग्लोबल ट्रेंड है न कि केवल भारतीय बाजार तक सीमित।
गिरावट के प्रमुख कारण
मार्केट विश्लेषकों ने चांदी की कीमतों में गिरावट के निम्नलिखित कारण बताए:
1. मुनाफावसूली (Profit Booking):
पिछले कुछ हफ्तों में चांदी में अच्छी तेजी देखी गई थी। कई व्यापारियों ने इस तेजी का फायदा उठाते हुए मुनाफा वसूलने का फैसला किया।
2. डॉलर में मजबूती:
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती आने से कीमती धातुओं पर दबाव बना। मजबूत डॉलर चांदी जैसी कमोडिटीज को महंगा बनाता है।
3. चीन की मांग में कमी:
दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ता चीन से आने वाले आर्थिक आंकड़ों में कमजोरी के संकेत मिले हैं, जिससे मांग में कमी की आशंका है।
4. तकनीकी कारक:
तकनीकी चार्ट पर चांदी ने कुछ महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल को पार नहीं कर पाई, जिससे ट्रेडर्स ने पोजीशन स्क्वायर ऑफ करनी शुरू कर दी।
भारतीय बाजार में चांदी की मांग
भारत में चांदी की मांग मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों से आती है:
1. आभूषण उद्योग (Jewellery Industry):
- भारतीय शादी-विवाह सीजन में चांदी के आभूषणों की अच्छी मांग
- ग्रामीण क्षेत्रों में चांदी के गहनों की लोकप्रियता
- हाल में कीमतों में गिरावट से खरीदारी बढ़ने की संभावना
2. औद्योगिक उपयोग (Industrial Use):
- इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग (कंडक्टर के रूप में)
- सोलर पैनल निर्माण (फोटोवोल्टिक सेल्स में)
- मेडिकल उपकरण
3. निवेश (Investment):
- चांदी के सिक्के और बार
- ETFs (Exchange Traded Funds)
- फ्यूचर्स और ऑप्शन ट्रेडिंग
हाल के महीनों में चांदी को सोने का सस्ता विकल्प मानते हुए खुदरा निवेशकों में इसकी मांग बढ़ी है।
त्योहारी सीजन का असर
भारत में आने वाले महीनों में श्रावण मास, रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी और नवरात्रि जैसे त्योहार हैं। परंपरागत रूप से इस दौरान चांदी की खरीदारी में तेजी आती है।
अगर गौर करें तो वर्तमान में आई गिरावट खरीदारों के लिए एक अच्छा अवसर हो सकती है, क्योंकि त्योहारी सीजन से पहले चांदी अपेक्षाकृत सस्ती हो गई है।
एक्सपर्ट्स की राय
अजय केडिया, मेटल एनालिस्ट:
“चांदी में आई यह गिरावट अस्थायी लगती है। तकनीकी रूप से 2,12,000-2,15,000 रुपये का जोन एक मजबूत सपोर्ट है। अगर यह लेवल टूटता है तो 2,10,000 तक गिरावट हो सकती है। उल्टा, अगर 2,17,000 के ऊपर बंद होता है तो 2,20,000 की तरफ तेजी देखी जा सकती है।”
रवींद्र सिंह, कमोडिटी ट्रेडर:
“मुनाफावसूली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। पिछले एक महीने में चांदी 8-9% चढ़ी थी। कुछ ट्रेडर्स ने मुनाफा बुक किया। लेकिन मध्यम अवधि का ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है। निवेशकों को गिरावट को खरीदारी का मौका समझना चाहिए।”
प्रीति पारेख, बुलियन एक्सपर्ट:
“वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मांग मजबूत है, खासकर सोलर एनर्जी सेक्टर से। भारत में भी सोलर मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है जो चांदी की मांग को सपोर्ट करेगी। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छा एंट्री पॉइंट हो सकता है।”
सोने की तुलना में चांदी
सोना बनाम चांदी रिटर्न (पिछले 6 महीने):
| अवधि | सोना | चांदी |
|---|---|---|
| 1 महीना | +2.3% | +5.8% |
| 3 महीने | +4.1% | +12.4% |
| 6 महीने | +8.5% | +18.7% |
यहां ध्यान देने वाली बात है कि चांदी ने पिछले 6 महीनों में सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, चांदी में वोलैटिलिटी (अस्थिरता) भी अधिक होती है।
सोना-चांदी अनुपात (Gold-Silver Ratio):
वर्तमान में यह अनुपात लगभग 85:1 है, यानी 1 किलो सोने की कीमत में 85 किलो चांदी खरीदी जा सकती है। ऐतिहासिक रूप से यह अनुपात 60-70 के बीच रहता है, जो दर्शाता है कि चांदी अभी भी अंडरवैल्यूड हो सकती है।
आने वाले दिनों का अनुमान
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार:
अल्पावधि (1-2 सप्ताह):
- 2,12,000-2,18,000 रुपये की रेंज में उतार-चढ़ाव संभव
- मुनाफावसूली जारी रह सकती है
- वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी
मध्यावधि (1-3 महीने):
- त्योहारी सीजन से मांग बढ़ने की उम्मीद
- औद्योगिक मांग मजबूत रहने की संभावना
- 2,25,000-2,30,000 रुपये का लक्ष्य संभव
दीर्घावधि (6-12 महीने):
- ग्रीन एनर्जी सेक्टर से मांग में वृद्धि
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता चांदी को सपोर्ट करेगी
- 2,50,000 रुपये के स्तर तक पहुंचने की संभावना
निवेशकों के लिए सुझाव
1. SIP दृष्टिकोण अपनाएं:
- एकमुश्त निवेश की जगह नियमित अंतराल पर खरीदारी करें
- इससे औसत कीमत (Average Price) बेहतर मिलेगी
2. पोर्टफोलियो में 5-10% आवंटन:
- कुल निवेश का छोटा हिस्सा चांदी में रखें
- विविधीकरण (Diversification) बनाए रखें
3. भौतिक बनाम पेपर चांदी:
- लंबी अवधि के लिए भौतिक चांदी (सिक्के/बार) बेहतर
- अल्पावधि ट्रेडिंग के लिए फ्यूचर्स/ETFs उपयुक्त
4. तकनीकी स्तरों पर नजर:
- 2,12,000 रुपये मजबूत सपोर्ट
- 2,18,000 रुपये तत्काल रेजिस्टेंस
- 2,10,000 से नीचे स्टॉप लॉस रखें
GST और टैक्स का प्रभाव
भारत में चांदी पर 3% GST लागू है, जो सोने की तुलना में सस्ता है (सोने पर भी 3% GST)। हालांकि, चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी में हाल के बदलाव घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
निवेश पर कर:
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (3 साल से कम): आपकी आय के स्लैब के अनुसार
- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (3 साल से अधिक): 20% इंडेक्सेशन के साथ
मुख्य बातें (Key Points)
- वायदा बाजार में चांदी 1,258 रुपये गिरकर 2,14,755 रुपये प्रति किलो
- MCX पर सितंबर डिलीवरी में 0.58% की गिरावट
- कुल 1,563 लॉट का कारोबार हुआ
- न्यूयॉर्क में 0.11% गिरकर $58.46/oz
- मुनाफावसूली और डॉलर में मजबूती प्रमुख कारण
- त्योहारी सीजन से पहले खरीदारी का अच्छा मौका
- एक्सपर्ट्स का मानना है मध्यम अवधि का ट्रेंड पॉजिटिव
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