चंडीगढ़ 02मई (The News Air) : शिरोमणी अकाली दल ने आज स्पष्ट किया है कि वह पंजाब के जल संसाधनों की लूट कतई बर्दाश्त नही करेगा और कहा कि हरियाणा को अतिरिक्त 8500 क्यूसेक पानी छोड़ने का नवीनतम कदम संघवाद के खिलाफ है और इसे तुरंत वापिस लिया जाना चाहिए।
जल बंटवारे पर सर्वदलीय मीटिंग में शामिल वरिष्ठ अकाली नेता सरदार बलविंदर सिंह भूंदड़ और डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब के साथ पहले भी भेदभाव किया गया है , जिसमें पड़ोसी राज्यों को रिपेरियन सिद्धांत के खिलाफ मनमाने ढ़ंग से दरिया का पानी दिया गया है। उन्होने कहा,‘‘ अब भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब सरकार से मंजूरी लिए बिना हरियाणा को उसके कोटे से अधिक पानी आवंटित कर दिया है। इस कदम को आसान बनाने के लिए बीबीएमबी के अधिकारियों को भी बदला जा रहा है।’’
इस बात पर जोर देते हुए कि यह संघवाद की भावना के खिलाफ है, अकाली नेताओं ने कहा,‘‘ हमने पहले भी हमारे दरिया के पानी का अधिकार न छीने जाने को सुनिश्चित करने के लिए मोर्चा निकाला है। उन्होनेे कहा कि पिछली अकाली सरकार के दौरान सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर की जमीन किसानों को लौटा दी गई थी। हम किसानों के हितों की रक्षा के लिए वचनबद्ध हैं और इसीलिए हरियाणा में पानी की एक भी अतिरिक्त बंूंद नही जाने देंगें।’’
अकाली नेताओं ने पंजाब सरकार को आश्वासन दिया कि अकाली दल राज्य के दरिया के पानी की सुरक्षा के लिए उसके प्रयासों में सहयोग करेगा। उन्होने कहा,‘‘ हम पंजाब के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए वचनबद्ध हैं। इस मसले का समाधान बातचीत यां कानूनी सहारा लेकर हो सकता है। केंद्र सरकार को पंजाब के साथ न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।’’
अकाली नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा बीबीएमबी के पुनर्गठन को चुनौती देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होने कहा कि आम आदमी पार्टी को बीबीएमबी के पुनर्गठन को अदालत में चुनौती देनी चाहिए थी। ऐसा न करने के कारण ही पंजाब के साथ वर्तमान में अन्याय हुआ है। उन्होने बीबीएमबी में पंजाब के अधिकारों को राज्य के खिलाफ फैसलों को प्रभावित करने के लिए महत्वपूर्ण पदों से हटाने के तरीके की भी निंदा की है।
भूंदड़ और डाॅ. चीमा ने चंडीगढ़ के स्टे्टस, चंडीगढ़ में नियुक्तियों के मामले में पंजाब के साथ भेदभाव और पंजाबी भाषा को लागू न करने सहित राज्य के सभी विवादास्पद मुददों पर केंद्र के साथ व्यापक चर्चा का आहवाहन किया है।
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