Nankana Sahib Gurpurab SGPC Visa Demand: नवंबर में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब (Gurpurab) के मौके पर ननकाणा साहिब (पाकिस्तान) में होने वाले समागमों में शामिल होने के लिए 7,500 से ज्यादा सिख श्रद्धालुओं ने अपने पासपोर्ट जमा करवा दिए हैं। इसी को देखते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने मंगलवार को पाकिस्तान हाई कमीशन से गुजारिश की है कि वे निर्धारित कोटे से ऊपर जाकर अधिकतम संभव श्रद्धालुओं को वीजा जारी करें।
SGPC के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय वफ्द ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी अफेयर्स अहमद वड़ैच से मुलाकात की और सभी योग्य श्रद्धालुओं के लिए वीजा की मांग करते हुए एक लिखित अपील सौंपी। देखा जाए तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक मांग नहीं है – यह सिख समुदाय की गहरी धार्मिक भावनाओं और गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक है।
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7,500 पासपोर्ट जमा, भावनाओं का सैलाब
हाई कमीशन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए धामी ने बताया कि SGPC को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब समागमों के लिए पाकिस्तान जाने के इच्छुक श्रद्धालुओं के 7,500 से अधिक पासपोर्ट प्राप्त हुए हैं। धामी ने कहा, “हर सिख की यह हार्दिक इच्छा होती है कि वह गुरुद्वारा श्री ननकाणा साहिब में होने वाले समागमों में शामिल हो।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह गुरु नानक देव जी और उनसे जुड़े ऐतिहासिक गुरुद्वारों के प्रति सिख समुदाय की “गहरी श्रद्धा और भावनात्मक लगाव” को दर्शाती है। धामी ने तीर्थ यात्रा से जुड़ी धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान हाई कमीशन से खुले दिल से वीजा जारी करने की अपील की।
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आम तौर पर सिर्फ 1,800 को ही मिलता है वीजा
भारत-पाकिस्तान के बीच धार्मिक स्थलों की यात्रा को नियंत्रित करने वाले 1974 के समझौतों के तहत, SGPC हर साल सिख श्रद्धालुओं का एक जत्था पाकिस्तान भेजती है। धामी ने बताया कि पाकिस्तान हाई कमीशन आमतौर पर SGPC द्वारा भेजे गए लगभग 1,800 श्रद्धालुओं को ही वीजा देता है।
अगर गौर करें तो 7,500 में से सिर्फ 1,800 का चयन होना – यानी लगभग 5,700 श्रद्धालुओं को निराशा का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि SGPC ने विशेष छूट की मांग की है ताकि इस बार अधिक से अधिक श्रद्धालु अपने गुरु के जन्मस्थान के दर्शन कर सकें।
कर्तारपुर बंद होने से बढ़ी मांग
धामी ने समझाया कि मांग में आई यह बड़ी तेजी आंशिक रूप से कर्तारपुर साहिब कॉरिडोर बंद होने और कुछ समय के लिए निजी तौर पर आयोजित सिख जत्थों को वीजा न मिलने से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इन कारणों ने श्रद्धालुओं में पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करने की इच्छा को और बढ़ा दिया है।
समझने वाली बात है कि कर्तारपुर साहिब कॉरिडोर (जो पंजाब के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के कर्तारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है) 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकवादी हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आई गिरावट के बाद निलंबित कर दिया गया था। केंद्र सरकार ने पिछले महीने लोकसभा में दोहराया था कि यह कॉरिडोर निलंबित रहेगा और कहा था कि “मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य” इसे बंद रखने को मजबूर करता है।
हालांकि, सरकार ने इसे दोबारा खोलने की मांग करने वाली सिख धार्मिक संगठनों की अर्जियां प्राप्त होने की बात स्वीकार की है। वहीं, कॉरिडोर की निलंबिति के बावजूद सिख जत्थे 1974 के धार्मिक स्थलों की यात्राओं संबंधी भारत-पाकिस्तान प्रोटोकॉल के तहत महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर पाकिस्तान की यात्रा करते रहे हैं।
भारत सरकार से भी अपील
धामी ने भारत सरकार से भी अपील की कि वह पाकिस्तान के साथ वीजा का मुद्दा उठाए और अधिकतम श्रद्धालुओं की यात्रा की सुविधा प्रदान करे। उन्होंने SGPC की मांग को दोहराया कि कर्तारपुर साहिब कॉरिडोर को तुरंत दोबारा खोला जाए और कहा कि सिख समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि धामी ने दोनों सरकारों – भारत और पाकिस्तान – से सहयोग की अपील की है। यह दर्शाता है कि धार्मिक यात्राओं का मुद्दा राजनीतिक तनावों से ऊपर होना चाहिए। धामी का तर्क है कि गुरु नानक देव जी का संदेश प्रेम और मानवता का था, और दोनों देशों को इस भावना का सम्मान करना चाहिए।
ननकाणा साहिब: गुरु नानक का जन्मस्थान
गुरुद्वारा ननकाणा साहिब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है और यह गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान माना जाता है। हर साल नवंबर में (कार्तिक पूर्णिमा के दिन) यहां गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब का भव्य समागम होता है। दुनियाभर से सिख श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर आकर अपने गुरु को श्रद्धांजलि देते हैं।
अगर गौर करें तो ननकाणा साहिब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है – यह सिख इतिहास का एक जीवंत अध्याय है। 1947 के विभाजन से पहले यह क्षेत्र भारत का हिस्सा था, लेकिन बंटवारे के बाद यह पाकिस्तान में चला गया। तब से सिख समुदाय के लिए यहां की यात्रा भावनात्मक और आध्यात्मिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर असर?
यह मुद्दा केवल धार्मिक नहीं है – इसका राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व भी है। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बावजूद, धार्मिक यात्राएं एक ऐसा क्षेत्र है जहां दोनों देश कुछ सहयोग दिखाते हैं। अगर पाकिस्तान SGPC की मांग स्वीकार करता है और अधिक वीजा जारी करता है, तो यह दोनों देशों के बीच “लोगों से लोगों के संपर्क” (People-to-People Contact) को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम होगा।
वहीं, अगर मांग को खारिज कर दिया जाता है, तो सिख समुदाय में निराशा हो सकती है और यह राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील मुद्दा बन सकता है।
1974 प्रोटोकॉल: क्या है व्यवस्था?
भारत और पाकिस्तान के बीच 1974 में एक प्रोटोकॉल साइन हुआ था जिसके तहत दोनों देशों के नागरिक धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकते हैं। इस प्रोटोकॉल के तहत:
- सिख श्रद्धालु ननकाणा साहिब, पंजा साहिब और अन्य गुरुद्वारों के दर्शन कर सकते हैं
- पाकिस्तानी हिंदू भारत में धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकते हैं
- यात्रा सरकारी अनुमति और सुरक्षा मंजूरी के अधीन है
यह प्रोटोकॉल तनावों के बीच भी कायम रहा है, जो दर्शाता है कि धर्म राजनीति से ऊपर है।
मुख्य बातें (Key Points):
- SGPC ने 7,500 श्रद्धालुओं के लिए पाकिस्तान से वीजा की मांग की
- प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने पाकिस्तान हाई कमीशन से मुलाकात की
- आमतौर पर सिर्फ 1,800 श्रद्धालुओं को वीजा मिलता है
- कर्तारपुर कॉरिडोर बंद होने से मांग में बढ़ोतरी
- नवंबर में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब के लिए यात्रा













