Sanjeev Arora Case में एक नया मोड़ आ गया है। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की कंपनी ‘मैसर्स हैंपटन स्काई रियलटी लिमिटेड’ द्वारा विदेशों में सप्लाई किए गए हजारों मोबाइल फोन की असली खरीद का मामला उलझ गया है। जमानत अर्जी रद्द होने के बाद अरोड़ा अब 26 जून तक न्यायिक हिरासत में हैं।
एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने हरियाणा में पहली मई को दर्ज एफआईआर नंबर 137 के आधार पर संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 9 मई को गिरफ्तार किया था।
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ED की जांच में क्या निकला
ED की जांच के मुताबिक मैसर्स एसके एंटरप्राइजेज के कमाल अहमद और मैसर्स ग्लोबल ट्रेडर्स के अजहर हैदर ने माना कि उन्होंने अरोड़ा परिवार की कंपनी को मोबाइल सप्लाई नहीं किए।
समझने वाली बात यह है कि कंपनी की ओर से उनकी फर्मों के बैंक खातों में RTGS के जरिए जो पैसा भेजा जाता था, उसे उसी दिन बैंक से निकालकर अपना मामूली कमीशन काटने के बाद अरोड़ा को वापस सौंप दिया जाता था। यानी एक हाथ से फर्जी बिल देते थे और दूसरे हाथ से कमीशन काटकर कैश वापस कर देते थे।
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फर्जी बिलों से करोड़ों का खेल
जांच के मुताबिक फर्जी खरीद बिलों के आधार पर फर्जीवाड़ा हुआ है। फर्जी कंपनियों के जरिए कागजों में खरीद-बिक्री दिखाई गई, जबकि असल में कोई सामान सप्लाई ही नहीं किया गया।
ED ने सवाल उठाए हैं कि अगर बिल देने वाली फर्मों ने कोई सामान दिया ही नहीं, तो संजीव अरोड़ा स्पष्ट करें कि उन्होंने विदेश सप्लाई किए हजारों मोबाइल असल में किससे खरीदे। ED ने अब तक इस मामले में 102.5 करोड़ की रकम की शिनाख्त की है।
इसी तरह फर्जी बिलिंग और सप्लाई दिखाकर करोड़ों रुपए का GST रिफंड भी लिया गया। ED को यह भी पता चला कि अरोड़ा की कंपनी ने नियमों की अनदेखी करके यह कारोबार मेमोरैंडम ऑफ एसोसिएशन में इस कारोबार को शामिल करने की अधिकृत संशोधन से 107 दिन पहले ही शुरू कर दिया था।
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संजीव अरोड़ा के वकीलों का पक्ष
दूसरी ओर संजीव अरोड़ा के वकीलों का पक्ष है कि अरोड़ा की कंपनी के पास एक्सपोर्ट लाइसेंस है और कंपनी ने कस्टम विभाग की हरी झंडी के बाद 43 शिपमेंट के जरिए मोबाइल बाहर भेजे थे।
वकीलों ने कमाल अहमद और अजहर हैदर के बयानों को झूठा बताया है। उनके अनुसार अरोड़ा की कंपनी ने इन दोनों के खिलाफ मई 2025 को एफआईआर 83 दर्ज कराई थी और अब ये दोनों पुरानी दुश्मनी निकालने के लिए गलत बयान दे रहे हैं। वकीलों का यह भी कहना है कि ED ने इतने बड़े एक्सपोर्ट ट्रेल की कोई निष्पक्ष जांच नहीं की और चार दिनों के अंदर ही कैबिनेट मंत्री अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया।
एक नजर में पूरा मामला
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल पहचानी गई रकम | 102.5 करोड़ रुपए |
| गिरफ्तारी की तारीख | 9 मई |
| न्यायिक हिरासत | 26 जून तक |
| FIR नंबर | 137 (1 मई, हरियाणा) |
| शिपमेंट | 43 |
| नियम-उल्लंघन | संशोधन से 107 दिन पहले कारोबार शुरू |
आम आदमी पर क्या असर
यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह मामला सिर्फ एक मंत्री तक सीमित नहीं है। फर्जी GST रिफंड और शेल कंपनियों के जरिए होने वाला फर्जीवाड़ा अंततः सरकारी खजाने यानी आम जनता के टैक्स के पैसे को ही नुकसान पहुंचाता है। ऐसे मामले देश की कर व्यवस्था पर भरोसे का सवाल भी खड़ा करते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा 26 जून तक न्यायिक हिरासत में।
- ED ने अब तक 102.5 करोड़ की रकम की शिनाख्त की।
- फर्जी बिलों और शेल कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप।
- अरोड़ा के वकीलों ने आरोपों को झूठा और दुश्मनी का नतीजा बताया।













