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The News Air - Breaking News - Punjab State Debt: देश में कर्जे के मामले में पंजाब 12वें नंबर पर, तमिलनाडु टॉप पर

Punjab State Debt: देश में कर्जे के मामले में पंजाब 12वें नंबर पर, तमिलनाडु टॉप पर

मार्च 2026 तक पंजाब का कर्जा 4.13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है जबकि तमिलनाडु 10.42 लाख करोड़ के साथ सबसे ऊपर, चुनावी साल में तेज हुई कर्जा लेने की रफ्तार

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
गुरूवार, 30 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Punjab State Debt
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Punjab State Debt : देश में कर्जे की बात जब भी होती है तो पंजाब का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि असलियत कुछ और ही कहानी बयान करती है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि कर्जा चुकाने के मामले में पंजाब का देश भर में 12वां नंबर है। मार्च 2026 तक पंजाब पर कुल 4.13 लाख करोड़ रुपये का कर्जा हो गया है, जबकि तमिलनाडु 10.42 लाख करोड़ रुपये के कर्जे के साथ देश में पहले नंबर पर काबिज है।

देखा जाए तो राजनीतिक बहस और हकीकत के बीच का फासला काफी चौड़ा है। पंजाब में कर्जे को लेकर जितना शोर मचता है, उससे कहीं ज्यादा गंभीर हालात कई दूसरे बड़े राज्यों के हैं। महाराष्ट्र 9.37 लाख करोड़, उत्तर प्रदेश 8.83 लाख करोड़ और कर्नाटक 8.14 लाख करोड़ के कर्जे के बोझ तले दबे हुए हैं।

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पंजाब से भी कम कर्जे में हरियाणा और बिहार

केंद्रीय वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब पर जितना कर्जा है, उससे थोड़ा कम बिहार पर है। बिहार पर 4.03 लाख करोड़ रुपये का कर्जा है जबकि पंजाब पर 4.13 लाख करोड़ रुपये। गुआंढी सूबे हरियाणा की बात करें तो वहां 4.02 लाख करोड़ रुपये का कर्जा है।

समझने वाली बात यह है कि पिछले दो वर्षों में हरियाणा ने 63 हजार करोड़ रुपये का नया कर्जा चुक्का है, जबकि पंजाब ने 67 हजार करोड़ रुपये का कर्जा लिया है। यानी दोनों राज्यों में कर्जा लेने की रफ्तार लगभग बराबर है।

अगर गौर करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात पर भी 5.34 लाख करोड़ रुपये का कर्जा है। वहीं पश्चिम बंगाल 7.90 लाख करोड़ रुपये के कर्जे के बोझ तले है। 28 राज्यों में देश का सबसे कम कर्जा 14,516 करोड़ रुपये मिजोरम पर है।

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2027 तक 4.47 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है पंजाब का कर्जा

साल 2022 में पंजाब का कुल कर्जा 2.82 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया था। लेकिन आने वाले समय की तस्वीर और भी चिंताजनक दिख रही है। अनुमान है कि 31 मार्च 2027 तक यह कर्जा बढ़कर 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।

भारतीय रिजर्व बैंक के संकेतक कैलेंडर के अनुसार, पंजाब सरकार चालू वित्तीय वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान 13,900 करोड़ रुपये का नया कर्जा चुकेगी। पहली तिमाही में 9,500 करोड़ रुपये कर्जा चुकने की व्यवस्था थी, लेकिन हकीकत में पंजाब ने करीब 7,800 करोड़ रुपये ही लिए।

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चुनावी साल में बढ़ती है कर्जे की रफ्तार

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हर सूबे में जब चुनाव नजदीक आते हैं, तो उस वर्ष कर्जे की रफ्तार बढ़ जाती है। पंजाब में भी चुनाव नजदीक हैं, जिसकी वजह से विकास को रफ्तार देने के लिए सरकार हर महीने कर्जा चुक रही है।

पंजाब सरकार चालू वित्तीय वर्ष के दौरान मार्केट उधार के जरिए 43,798.38 करोड़ रुपये का कर्जा चुकना चाहती है। दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) के दौरान देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 3.18 लाख करोड़ रुपये का लोन लिया जाना है, जिसमें पंजाब की हिस्सेदारी 4.35 फीसदी बनती है।

पड़ोसी राज्यों की तुलना में पंजाब की स्थिति

गुआंढी सूबों की बात करें तो हरियाणा सरकार दूसरी तिमाही के दौरान 19,000 करोड़ रुपये का कर्जा चुकेगी। वहीं हिमाचल प्रदेश 2,100 करोड़ रुपये का कर्जा लेगा। राजस्थान सरकार 15,000 करोड़, बिहार 14,000 करोड़ और गुजरात 12,500 करोड़ रुपये का कर्जा चुक रही है।

इन आंकड़ों से साफ होता है कि पंजाब अकेला नहीं है जो कर्जे के दलदल में फंसा हुआ है। बल्कि लगभग सभी बड़े राज्य इसी रास्ते पर चल रहे हैं।

वित्त मंत्री चीमा का पक्ष: विरासत में मिले कर्जे को उतारने के लिए ले रहे हैं कर्जा

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का तर्क है कि वह तो विरासत में मिले कर्जे को उतारने के लिए ही कर्जा चुक रहे हैं और तय सीमा में ही कर्जा ले रहे हैं। सरकार का कहना है कि पिछली सरकारों ने जो कर्जा छोड़ा है, उसे चुकाने के लिए नए कर्जे लेने पड़ रहे हैं।

हालांकि विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा सरकार भी कर्जे की रफ्तार कम नहीं कर पा रही है और आने वाले समय में स्थिति और गंभीर होने वाली है।

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राज्यवार कर्जे की पूरी तस्वीर
क्रम संख्याराज्यकर्जा (रुपये में)
1तमिलनाडु10.42 लाख करोड़
2महाराष्ट्र9.37 लाख करोड़
3उत्तर प्रदेश8.83 लाख करोड़
4कर्नाटक8.14 लाख करोड़
5पश्चिम बंगाल7.90 लाख करोड़
6गुजरात5.34 लाख करोड़
7पंजाब4.13 लाख करोड़ (12वां स्थान)
8बिहार4.03 लाख करोड़
9हरियाणा4.02 लाख करोड़
10मिजोरम14,516 करोड़ (सबसे कम)
आम लोगों पर क्या होगा असर?

राज्य का बढ़ता कर्जा सीधे तौर पर जनता की जेब पर असर डालता है। विकास कार्यों के लिए पैसा कम मिलता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च घटता है। ब्याज चुकाने में ही राज्य की आमदनी का बड़ा हिस्सा चला जाता है।

राहत की बात यह है कि पंजाब की स्थिति अभी भी कई बड़े राज्यों से बेहतर है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि आने वाले सालों में यह कर्जा और तेजी से बढ़ सकता है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • तमिलनाडु देश में सबसे ज्यादा कर्जे वाला राज्य है, जिस पर 10.42 लाख करोड़ रुपये का कर्जा है
  • पंजाब देश में कर्जे के मामले में 12वें नंबर पर है, मार्च 2026 तक कुल कर्जा 4.13 लाख करोड़ रुपये
  • पिछले दो सालों में पंजाब ने 67 हजार करोड़ रुपये का नया कर्जा लिया है
  • 31 मार्च 2027 तक पंजाब का कर्जा 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान
  • मिजोरम पर देश में सबसे कम 14,516 करोड़ रुपये का कर्जा है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पंजाब का कुल कर्जा कितना है 2026 में?

उत्तर: मार्च 2026 तक पंजाब पर कुल 4.13 लाख करोड़ रुपये का कर्जा हो गया है, और 2027 तक यह 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

प्रश्न 2: भारत में सबसे ज्यादा कर्जे वाला राज्य कौन सा है?

उत्तर: तमिलनाडु देश में सबसे ज्यादा कर्जे वाला राज्य है, जिस पर 10.42 लाख करोड़ रुपये का कर्जा है। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र (9.37 लाख करोड़) और तीसरे पर उत्तर प्रदेश (8.83 लाख करोड़) है।

प्रश्न 3: पंजाब की तुलना में हरियाणा और बिहार का कर्जा कितना है?

उत्तर: हरियाणा पर 4.02 लाख करोड़ रुपये और बिहार पर 4.03 लाख करोड़ रुपये का कर्जा है, जो पंजाब (4.13 लाख करोड़) से थोड़ा कम है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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