Rakesh Tikait CJP Alliance को लेकर दिल्ली में एक दिलचस्प मुलाकात हुई है जिसने सियासी गलियारों में हलचल मच दी है। एक तरफ थे देश के जाने-माने किसान नेता राकेश टिकैत और दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के युवा प्रतिनिधि। बात सिर्फ हालचाल पूछने की नहीं थी, बल्कि CJP एक मास्टर प्लान लेकर आई थी – देश भर के किसानों, युवाओं और छात्रों को मिलाकर एक ऐसा महामोर्चा बनाने का प्लान जो 2026 से लेकर आगे तक सरकार के लिए चुनौती बन जाए।
देखा जाए तो यह मुलाकात उस समय हुई जब दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग चल रही थी। किसान नेता अपने मुद्दों पर चर्चा में व्यस्त थे, तभी CJP के प्रतिनिधि वहां पहुंचे और सीधे राकेश टिकैत के पास गए।
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पहले शुक्रिया, फिर असली एजेंडा
CJP के लोगों ने पहले तो टिकैत का शुक्रिया अदा किया कि वह जंतर मंतर पर आए और उनके धरने को खुलकर समर्थन दिया। लेकिन असली बात धन्यवाद देने के तुरंत बाद शुरू हुई जब CJP ने अपना असली एजेंडा सामने रखा।
मीटिंग खत्म होने के बाद CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका मीडिया के सामने आए और खुलकर बताया कि वे चाहते क्या हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं से जो वादे किए थे, वे ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। और जब छात्रों ने हक की आवाज उठाई तो उन पर मुकदमों की बारिश कर दी गई।
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बिहार, बंगाल और राजस्थान में केस दर्ज
समझने वाली बात यह है कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कई राज्यों में एफआईआर दर्ज हुई हैं। बिहार में छात्रों पर मुकदमे ठोके गए, पश्चिम बंगाल में केस दर्ज हुए और राजस्थान में भी कई आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्रवाई हुई।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि CJP ने राकेश टिकैत से सीधे तौर पर मदद मांगी है कि हमारे छात्रों पर जो केस दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस करवाने में किसान मोर्चा हमारी ताकत बने।
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CJP का बड़ा प्रस्ताव: संयुक्त मोर्चा
और इसी के साथ CJP ने अपना सबसे बड़ा पत्ता फेंका। उन्होंने कहा – “आइए हम किसान, छात्र और युवा मिलकर मोदी सरकार के खिलाफ एक बहुत बड़ा संयुक्त मोर्चा यानी गठबंधन बनाते हैं।”
अगर गौर करें तो CJP का प्रस्ताव बहुत बड़ा था। लेकिन सामने बैठे थे राजनीति और आंदोलनों के पुराने खिलाड़ी राकेश टिकैत, जो हर शब्द को तौल-तौल कर बोलते हैं।
टिकैत का नपा-तुला जवाब
जब इस पूरे मामले पर मीडिया ने टिकैत साहब से बात की तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले और अपने ठेठ अंदाज में जवाब दिया। टिकैत ने साफ कहा, “देखिए, आंदोलन करने वालों को एक साथ तो होना ही चाहिए। इसमें कोई शक नहीं है। हम खुद जंतर मंतर पर गए थे और CJP को समर्थन दिया था।”
लेकिन जब बात आई नया मोर्चा बनाने की, तो टिकैत साहब ने बहुत चतुराई से बात को संभाल लिया। उन्होंने कहा, “मोर्चा तो पहले से ही बना हुआ है भाई। किसानों का अपना मोर्चा चल रहा है, छात्रों का अपना। सब अपने-अपने मंच से लड़ाई लड़ रहे हैं और सब एक दूसरे के साथ खड़े हुए हैं। अलग से नया मोर्चा बनाने की जरूरत नहीं है। एकजुटता पहले से है।”
क्या है इस मुलाकात का असली मतलब?
अगर इस पूरी मुलाकात का एकदम सीधा और सादा मतलब निकालें तो तीन बड़ी बातें समझ आती हैं:
पहला, छात्रों को बड़े चेहरे की जरूरत है। युवाओं को समझ आ गया है कि अकेले उनके प्रदर्शन से सरकार पर उतना दबाव नहीं बनता जितना किसानों के बड़े संगठन साथ आने से बनेगा।
दूसरा, एफआईआर वापस कराने का दबाव। बिहार, बंगाल और राजस्थान में फंसे छात्रों के मुकदमों को हटवाने के लिए किसान नेताओं का राजनीतिक वजन इस्तेमाल करने की कोशिश है।
तीसरा, टिकैत का संभल कर चलना। राकेश टिकैत छात्रों को पूरा समर्थन दे तो रहे हैं लेकिन अपने किसान आंदोलन को किसी दूसरे बैनर या नए राजनीतिक प्रयोग में सीधे मिलाने से बच भी रहे हैं।
CJP की रणनीति क्या है?
दिलचस्प बात यह है कि CJP पेपर लीक और नौकरियों के मुद्दे पर लगातार सक्रिय रही है। उन्हें लग रहा है कि अगर किसानों की ताकत उनके साथ जुड़ जाए तो 2026 के बाद होने वाले चुनावों में यह एक बड़ी ताकत बन सकती है।
हालांकि टिकैत ने अभी सीधे गठबंधन से इनकार नहीं किया है, लेकिन नया मोर्चा बनाने से भी मना कर दिया है। यानी वे समर्थन तो दे रहे हैं लेकिन अपनी स्वतंत्र पहचान भी बनाए रखना चाहते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- दिल्ली में राकेश टिकैत और CJP नेताओं के बीच गुप्त मुलाकात हुई
- CJP ने किसान-युवा-छात्र का संयुक्त महामोर्चा बनाने का प्रस्ताव रखा
- बिहार, बंगाल और राजस्थान में छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग
- टिकैत ने समर्थन तो दिया लेकिन नया मोर्चा बनाने से इनकार किया
- 2026 से सरकार को घेरने की तैयारी की जा रही है













