Punjab Secretariat Staff Transfer ने कर्मचारी आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया है। पंजाब सरकार ने कर्मचारियों की दूसरे दौर की हड़ताल से ठीक पहले ‘पंजाब सिविल सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन’ के प्रधान सुशील कुमार का तबादला कर दिया है। देखा जाए तो यह कदम विवादास्पद माना जा रहा है।
साझा तालमेल समिति ने महंगाई भत्ते के बकाए सहित कर्मचारियों की मांगों को लेकर 8 सितंबर की हड़ताल का पहले ही आह्वान दिया हुआ था। समझने वाली बात यह है कि ऐसे में कर्मचारी नेताओं का तबादला संदेश देता है कि सरकार आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
सुशील कुमार ने की थी हड़ताल के लिए लामबंदी
आज कर्मचारी संगठन के प्रधान सुशील कुमार ने सचिवालय की विभिन्न शाखाओं में मीटिंगें करके कर्मचारियों को हड़ताल के लिए लामबंद किया था। अगर गौर करें तो इसके तुरंत बाद ही उनका तबादला आदेश आ गया।
सामान्य राज्य प्रशासन विभाग ने आज प्रधान सुशील कुमार को सचिवालय की लेखा-1 शाखा से बदलकर अधीन सेवाएं चयन बोर्ड, पंजाब में भेज दिया है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बोर्ड का कार्यालय मोहाली में स्थित है, जो चंडीगढ़ से दूर है।
पहले चेयरमैन का भी हो चुका है तबादला
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले पंजाब सरकार ने कर्मचारी संगठन के चेयरमैन सुखचैन सिंह खहिरा का तबादला किया था। कर्मचारी नेताओं के तबादलों ने कर्मचारी संघर्ष को और तेज कर दिया है।
समझने वाली बात यह है कि कर्मचारी संगठन इन तबादलों को अपने आंदोलन को कमजोर करने की सरकारी साजिश मान रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि ये नियमित प्रशासनिक तबादले हैं।
चार अधिकारियों/कर्मचारियों के तबादले
आज पंजाब सरकार ने कुल चार अधिकारी/कर्मचारियों के तबादले किए हैं। इनमें से सुशील कुमार का तबादला सबसे चर्चित है क्योंकि वे कर्मचारी संगठन के प्रधान हैं और हड़ताल की तैयारियों में सक्रिय थे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तबादले का समय संदेह पैदा करता है। जब कर्मचारी 8 सितंबर को हड़ताल की तैयारी में हैं, ठीक उसी समय उनके नेताओं के तबादले किए जा रहे हैं।
महंगाई भत्ते के बकाए की मुख्य मांग
कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांग महंगाई भत्ते (DA) के बकाए का भुगतान है। अगर गौर करें तो पंजाब के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में कम DA मिल रहा है। कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें भी केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर DA मिले।
इसके अलावा अन्य मांगों में वेतन विसंगतियों को दूर करना, पदोन्नति में देरी की समस्या का समाधान और सेवा शर्तों में सुधार शामिल है।
कर्मचारी आंदोलन का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब पंजाब के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई बार कर्मचारियों ने हड़तालें की हैं। दिलचस्प बात यह है कि हर बार सरकार ने आश्वासन दिए लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकला।
समझने वाली बात यह है कि कर्मचारी अब और इंतजार नहीं करना चाहते। उनका मानना है कि उनकी मांगें जायज हैं और सरकार को तुरंत इन पर ध्यान देना चाहिए।
8 सितंबर को होगी हड़ताल
साझा तालमेल समिति ने 8 सितंबर को हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल में सरकारी विभागों के हजारों कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है। अगर हड़ताल सफल रही तो सरकारी काम-काज प्रभावित हो सकता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि नेताओं के तबादले के बाद कर्मचारी और अधिक उत्साह से हड़ताल में भाग ले सकते हैं। वे इसे अपने संघर्ष को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि ये नियमित प्रशासनिक तबादले हैं और इनका कर्मचारी आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि कर्मचारी संगठन इस बात पर विश्वास नहीं कर रहे।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन के प्रधान सुशील कुमार का तबादला
- लेखा-1 शाखा से अधीन सेवाएं चयन बोर्ड, मोहाली भेजा गया
- 8 सितंबर की हड़ताल से ठीक पहले तबादला
- पहले चेयरमैन सुखचैन सिंह खहिरा का भी हो चुका है तबादला
- महंगाई भत्ते के बकाए की मुख्य मांग
- आज चार अधिकारियों/कर्मचारियों के तबादले
- कर्मचारी आंदोलन और तेज होने की आशंका













