CJ Punjab DA Arrears – पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने के दो घंटे से भी कम समय बाद, जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को महत्वपूर्ण CJ Punjab DA Arrears मामले की सुनवाई करते हुए अपने कार्यकाल का सख्त रुख स्पष्ट कर दिया। उन्होंने साफ किया कि अदालत किसी भी आलोचना या दबाव के आगे नहीं झुकेगी।
देखा जाए तो यह बयान उस समय आया जब मुख्य न्यायाधीश मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर के डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को बकाया DA/DR की अदायगी संबंधी अदालत के आदेशों की पालना से जुड़ी अर्जियों की सुनवाई के दौरान राज्य के वकील की ऊंची आवाज में बोलने पर सख्त आपत्ति जताई।
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कानून के राज के तहत चलेगी अदालत
मुख्य न्यायाधीश मिश्रा ने कहा, “यह अदालत कानून के राज के अधीन चलेगी और यह संस्था किसी भी किस्म के हथकंडों के आगे नहीं झुकेगी। इसलिए, हम पूरी तरह से कानून के मुताबिक चलेंगे। हमने संविधान की शपथ ली है और हम जानते हैं कि अपनी शपथ को कैसे निभाना है और इसकी रक्षा कैसे करनी है।”
समझने वाली बात यह है कि यह कोई सामान्य टिप्पणी नहीं थी। यह एक स्पष्ट संदेश था कि नए चीफ जस्टिस किसी भी तरह के दबाव को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर गौर करें तो शपथ ग्रहण के दिन ही इस तरह का सख्त रुख असामान्य है।
किसी पक्ष की दलीलों से प्रभावित नहीं होंगे
बेंच ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी पक्ष की दलीलों से प्रभावित नहीं होगा। जस्टिस मिश्रा ने कहा, “किसी भी पक्ष की ओर से टिप्पणी न की जाए! आपके पास कहने या करने के लिए बहुत कुछ हो सकता है, पर हम कानून के मुताबिक चलेंगे। हमने संविधान की शपथ ली है।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह टिप्पणी तब आई जब पंजाब सरकार के वकील ने कुछ तर्क रखने की कोशिश की। दिलचस्प बात यह है कि मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।
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DA मामले की पृष्ठभूमि
ये टिप्पणियां बेंच के उस अगस्त महीने के आदेश से पैदा हुई अर्जियों की सुनवाई के दौरान आईं, जिसमें पंजाब को अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को DA/DR की सारी बकाया किस्तें 31 अगस्त तक जारी करने और पालना हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे।
अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि जब तक बकाए क्लियर नहीं किए जाते, राज्य सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर विज्ञापन अभियानों जैसे गैर-उत्पादक खर्चे न करे।
समझने वाली बात यह है कि इस आदेश को बाद में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। एक अर्जीकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर वकील संजय कौशल ने बताया कि पंजाब ने 31 अगस्त के बाद अपनी चुनौती दाखिल की है और सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा निकाली गई खामियों को अभी दूर किया जाना बाकी है।
सरकार अभी भी विज्ञापन दे रही
कौशल ने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा अखबारों में अभी भी विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं के लिए करोड़ों रुपये जारी करने का हवाला भी दिया।
अगर गौर करें तो यह अदालत के आदेशों की खुली अवहेलना है। जब अदालत ने गैर-उत्पादक खर्चों पर रोक लगाई थी, तब भी सरकार विज्ञापनों पर पैसा खर्च कर रही है।
पालना हलफनामा अभी तक दाखिल नहीं
एक अन्य अर्जीकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर वकील चेतन मित्तल ने बताया कि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट द्वारा निर्देशित पालना हलफनामा अभी तक दाखिल नहीं किया है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह राज्य सरकार की ओर से अदालत के आदेशों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। हालांकि, बेंच ने कहा कि वह केस की फाइल देखने के बाद ही अर्जियों पर सुनवाई करेगा।
गुरुवार को अगली सुनवाई
यह मामला अब गुरुवार को आगे की सुनवाई के लिए आने की संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि शपथ ग्रहण वाले दिन ही आए इस बयान ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि मुख्य न्यायाधीश मिश्रा हाई कोर्ट में किस प्रकार का संस्थागत रुख अपनाने का इरादा रखते हैं।
कर्मचारियों के लिए राहत की उम्मीद
हजारों सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स इस मामले पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि नए चीफ जस्टिस के सख्त रुख से उन्हें उनके बकाया DA/DR मिल सकेंगे।
समझने वाली बात यह है कि यह केवल पैसे का मामला नहीं है, बल्कि यह न्याय और कर्मचारियों के अधिकारों का मामला है। अगर सरकार अदालत के आदेशों की अवहेलना करती है, तो यह कानून के राज पर सवाल खड़ा करता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- शपथ के दो घंटे बाद ही चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने DA मामले की सुनवाई की
- अदालत ने कहा कि किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगी
- पंजाब सरकार को 31 अगस्त तक DA/DR बकाए देने के आदेश थे
- सरकार ने अभी तक पालना हलफनामा दाखिल नहीं किया
- राज्य सरकार अभी भी विज्ञापनों पर खर्च कर रही है
- सुप्रीम कोर्ट में सरकार की चुनौती में खामियां बाकी
- गुरुवार को अगली सुनवाई













