Punjab Farmers Protest Ends की खबर किसानों और सरकार दोनों के लिए राहत लेकर आई है। पंजाब सरकार और संयुक्त किसान मोर्चे के बीच बनी सहमति के बाद चंडीगढ़ की सीमा पर पिछले सात दिनों से चल रहा किसानों का धरना आज आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है। देखा जाए तो यह पंजाब सरकार की किसान हितैषी नीतियों का प्रमाण है।
पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने खुद धरने वाले स्थान पर पहुंचकर किसान नेताओं को पंजाब सरकार का स्वीकृति पत्र सौंपा। स्टेज से सरकार ने सभी मांगों को स्वीकार करने का ऐलान किया।
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पानी समझौतों को रद्द करने के लिए विशेष सत्र
इस मौके पर कृषि मंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पंजाब के पानी के समझौतों को रद्द करने के लिए राज्य सरकार इसी महीने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएगी। अगर गौर करें तो यह किसानों की सबसे बड़ी मांग थी।
समझने वाली बात यह है कि पंजाब के पानी को लेकर दशकों से विवाद चल रहा है। किसानों का मानना है कि पंजाब के पानी पर पंजाब का ही अधिकार होना चाहिए। सरकार द्वारा मांगें मानने और स्वीकृति पत्र मिलने के बाद संयुक्त किसान मोर्चे के सभी नेताओं और धरने में शामिल हजारों किसानों ने राहत की सांस ली है।
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क्या-क्या मांगें स्वीकार की गईं
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि रविवार रात पंजाब भवन में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के साथ हुई बैठक में किसान संगठनों की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया गया था।
दिलचस्प बात यह है कि किसानों की मुख्य मांग दरियाई पानी के समझौतों की कुछ धाराओं को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर रद्द करने की थी, जिसे पंजाब सरकार ने मान लिया। इसके साथ-साथ बिजली संशोधन बिल, बीज बिल और किसानों के कर्जों के लिए वन टाइम सेटलमेंट सहित कुछ अन्य मांगें भी स्वीकार की गईं।
| मांग | स्थिति |
|---|---|
| पानी समझौतों को रद्द करना | स्वीकृत – विशेष सत्र बुलाया जाएगा |
| बिजली संशोधन बिल | स्वीकृत |
| बीज बिल | स्वीकृत |
| किसानों के कर्जों का वन टाइम सेटलमेंट | स्वीकृत |
| गन्ने का भाव बढ़ाना | स्वीकृत |
गन्ने के भाव में वृद्धि की मांग भी मानी
किसानों की मांगों में गन्ने के भाव में वृद्धि भी शामिल थी, जिसे भी सरकार ने स्वीकार कर लिया है। यह किसानों के लिए आर्थिक राहत का संकेत है।
समझने वाली बात यह है कि गन्ना उगाने वाले किसानों को लंबे समय से उचित मूल्य नहीं मिल रहा था। अब सरकार द्वारा भाव बढ़ाने से उन्हें फायदा होगा।
हजारों किसान घर लौटे
सरकार द्वारा मांगें मानने और सहमति पत्र मिलने के बाद हजारों की संख्या में चंडीगढ़ सीमा पर पहुंचे किसान अपने-अपने घरों को रवाना हो गए हैं। इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चे के सभी नेता फेज-11 के एक होटल में मीटिंग करने के बाद पंडाल की ओर रवाना हुए थे।
कृषि मंत्री के ऐलान के बाद पिछले सात दिनों से चंडीगढ़ की सीमा पर चल रहा किसानों का धरना आज समाप्त हो गया। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि धरना शांतिपूर्ण तरीके से चला और अब शांतिपूर्ण तरीके से ही समाप्त हुआ।
पहले भी हुई थी बातचीत
उल्लेखनीय है कि कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के साथ रविवार रात पंजाब भवन में हुई बैठक में समझौता हुआ था। उस बैठक में किसान नेताओं ने अपनी मांगें रखी थीं और सरकार ने उन्हें सकारात्मक रूप से सुना।
अगर गौर करें तो यह बातचीत से समस्या सुलझाने का बेहतरीन उदाहरण है। सरकार ने किसानों की बात सुनी और उनकी वाजिब मांगों को स्वीकार किया।
किसान संगठनों की प्रतिक्रिया
किसान नेताओं ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह पंजाब सरकार की किसान हितैषी सोच को दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि किसान नेताओं ने यह भी कहा कि वे सरकार के फैसलों पर नजर रखेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वादे पूरे किए जाएं।
विधानसभा सत्र की तैयारी
अब सभी की नजरें इसी महीने बुलाए जाने वाले विधानसभा के विशेष सत्र पर हैं। इस सत्र में पानी समझौतों से संबंधित प्रस्ताव पारित किए जाने की उम्मीद है। यह पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- चंडीगढ़ बॉर्डर पर सात दिनों से चल रहा किसानों का धरना समाप्त
- कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने स्वीकृति पत्र सौंपा
- पानी समझौतों को रद्द करने के लिए इसी महीने विधानसभा का विशेष सत्र
- बिजली संशोधन बिल, बीज बिल और कर्ज माफी की मांगें स्वीकृत
- गन्ने के भाव में वृद्धि की मांग भी मानी गई
- हजारों किसान अपने-अपने घरों को रवाना













