Punjab Flood Control: पंजाब के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने 23 अप्रैल को श्री आनंदपुर साहिब जिले के लोदीपुर, अगमपुर, हरसाबेला और अजौली क्षेत्रों का दौरा कर सतलुज नदी के किनारे चल रहे बाढ़-रोधी कार्यों का जायजा लिया। देखा जाए तो यह परियोजना न केवल बाढ़ सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक और क्षेत्रीय जुड़ाव को भी मजबूत करने में सहायक होगी।
मंत्री ने सतलुज नदी के किनारे चल रहे कार्यों की प्रगति के बारे में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और सभी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
लोदीपुर में 4.62 करोड़ की बाढ़ सुरक्षा परियोजना
अगर गौर करें तो लोदीपुर गांव, जो सतलुज नदी के बाएं किनारे पर स्थित है, वहां भविष्य में नदी किनारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2026 में व्यापक बाढ़ सुरक्षा कार्य किया जा रहा है।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि कुल 1700 फुट लंबाई में कार्य किया जा रहा है:
- चरण गंगा नदी पर 300 फुट का पुनर्निर्माण
- सतलुज नदी पर 1400 फुट रिवेटमेंट (Revetment)
- 13 स्टड (Spurs) का निर्माण
समझने वाली बात यह है कि इस परियोजना की कुल लागत लगभग 4.62 करोड़ रुपये है। इससे लोदीपुर और बुर्ज सहित आसपास के क्षेत्रों को बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी और कृषि भूमि की रक्षा मजबूत होगी।
अगमपुर पुल: धार्मिक और क्षेत्रीय महत्व
दिलचस्प बात यह है कि अगमपुर का पुल केवल एक सामान्य पुल नहीं है। कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने इसके महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा:
क्षेत्रीय जुड़ाव: यह पुल मालवा/पुआध क्षेत्रों को दोआबा और माझा क्षेत्रों से जोड़ता है।
धार्मिक महत्व: यह तख्त श्री केशगढ़ साहिब को श्री अकाल तख्त साहिब से जोड़ता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सिख धर्म में पांच तख्त (सिंहासन) अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। तख्त श्री केशगढ़ साहिब उन्हीं में से एक है, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसलिए यह पुल प्रदेश के लोगों की धार्मिक भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
2025 में आया था गंभीर खतरा
कहने का मतलब साफ है कि इस पुल का महत्व समझते हुए सरकार ने इसकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान इस पुल को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।
लेकिन सरकार द्वारा तुरंत कार्रवाई कर इसे सुरक्षित रखा गया। इस अनुभव से सीख लेते हुए अब पुल के आसपास बड़े स्तर पर बाढ़-रोधी कार्य करवाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी नुकसान से बचाव किया जा सके।
कुल 19.72 करोड़ रुपये का निवेश
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इस वर्ष कुल 6570 फुट (लगभग 2 किलोमीटर) लंबाई में बाढ़-रोधी कार्य करवाए जा रहे हैं। इन कार्यों पर लगभग 19.72 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
यह एक बड़ा निवेश है जो दर्शाता है कि पंजाब सरकार बाढ़ सुरक्षा को कितनी गंभीरता से ले रही है।
अगमपुर में 12.05 करोड़ का कार्य
अगमपुर स्लाइस-वन और पुल के ऊपरी हिस्से में कुल:
- 3920 फुट लंबाई में कार्य
- 12.05 करोड़ रुपये की लागत
- 3280 फुट रिवेटमेंट (नदी के किनारे की सुरक्षा)
- 31 स्टड (पानी के बहाव को नियंत्रित करने वाली संरचनाएं)
समझने वाली बात है कि इससे अगमपुर और क्रशर जोन क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा। पुल की नींव मजबूत होगी और बाढ़ का खतरा काफी कम हो जाएगा।
हरसाबेला में 7.67 करोड़ का कार्य
हरसाबेला में भी व्यापक बाढ़-रोधी कार्य चल रहे हैं:
- 2650 फुट लंबाई में कार्य
- 7.67 करोड़ रुपये की लागत
- 2300 फुट रिवेटमेंट
- 23 स्टड का निर्माण
मंत्री ने दोहराया कि सरकार बाढ़ से बचाव के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और सभी परियोजनाएं उच्च गुणवत्ता के साथ समय पर पूरी की जाएंगी।
अजौली में 3.45 करोड़ की मंजूरी
बाढ़ सुरक्षा के तहत अजौली में:
- 1500 फुट रिवेटमेंट
- 14 स्टड का निर्माण
- 3.45 करोड़ रुपये की लागत
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह परियोजना सतलुज नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने और भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
इससे अजौली, दबखेड़ा और कलितरा गांवों के निवासियों तथा कृषि भूमि को बड़ी राहत मिलेगी।
रिवेटमेंट और स्टड क्या हैं?
रिवेटमेंट (Revetment): यह नदी के किनारे पर बनाई जाने वाली सुरक्षा दीवार है। इसे पत्थर, कंक्रीट या अन्य मजबूत सामग्री से बनाया जाता है ताकि पानी के तेज बहाव से किनारा न कटे।
स्टड (Spurs): ये नदी में किनारे से लंबवत बनाई जाने वाली संरचनाएं हैं जो पानी के बहाव को नदी के बीच में मोड़ देती हैं, जिससे किनारे की कटाव रुकती है।
अवैध खनन पर भी कार्रवाई
दिलचस्प बात यह है कि मंत्री गोयल ने बताया कि अवैध खनन को रोकने के लिए भी आधुनिकीकरण के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नदी के किनारे अवैध रेत खनन से अक्सर नदी का प्रवाह बदल जाता है और किनारे कमजोर हो जाते हैं, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ता है।
132 स्थानों पर कार्य, 30 मई तक पूरा होगा
मंत्री ने बताया कि 132 स्थानों पर कार्य चल रहा है और यह 30 मई 2026 तक पूरा हो जाएगा। यह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “लोगों की भलाई के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में लगातार कार्य किया जा रहा है।”
सतलुज नदी: पंजाब की जीवन रेखा
सतलुज नदी पंजाब की पांच प्रमुख नदियों में से एक है (पंजाब का अर्थ ही ‘पांच नदियां’ है)। यह नदी:
- तिब्बत से निकलती है
- हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होकर बहती है
- पाकिस्तान में चेनाब नदी में मिलती है
- सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है
लेकिन बारिश के मौसम में यह नदी उफान पर आ जाती है और बाढ़ का कारण बनती है। इसलिए इसके किनारे बाढ़ नियंत्रण कार्य अत्यंत आवश्यक हैं।
बाढ़ से किसानों को राहत
पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है। बाढ़ से हर साल लाखों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होती है और फसलें बर्बाद हो जाती हैं। इन बाढ़ नियंत्रण कार्यों से:
- कृषि भूमि सुरक्षित रहेगी
- फसलों का नुकसान कम होगा
- किसानों की आय में स्थिरता आएगी
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
दौरे पर मौजूद अधिकारी
इस महत्वपूर्ण दौरे में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे:
- SDM सुखपाल सिंह (श्री आनंदपुर साहिब)
- DSP जशनदीप सिंह
- चेयरमैन कमिक्कर सिंह डाढ़ी
- चेयरमैन गुरप्रीत सिंह अरोड़ा
- रमणदीप सिंह बैंस (उप इंजीनियर)
- संदीप सिंह मंगत (कार्यकारी इंजीनियर)
- वरुण (SDO, रूपनगर ड्रेनेज सब डिवीजन)
- निशात गर्ग (SDO, श्री चमकौर साहिब ड्रेनेज)
- भावुक शर्मा (कार्यकारी इंजीनियर, श्री आनंदपुर साहिब)
- नरेंद्र कुमार (SDO, नंगल)
- दिनेश गुप्ता (SDO, श्री आनंदपुर साहिब)
- गुरजीत सिंह (SDO, नूरपुर बेदी)
मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब सरकार ने अगमपुर पुल की सुरक्षा के लिए 19.72 करोड़ रुपये के बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू किए हैं।
• अगमपुर पुल मालवा/पुआध को दोआबा और माझा से जोड़ता है और तख्त श्री केशगढ़ साहिब को श्री अकाल तख्त साहिब से जोड़ने के कारण धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है।
• लोदीपुर में 4.62 करोड़, अगमपुर में 12.05 करोड़, हरसाबेला में 7.67 करोड़ और अजौली में 3.45 करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं।
• कुल 6570 फुट (लगभग 2 किलोमीटर) लंबाई में रिवेटमेंट और स्टड का निर्माण किया जा रहा है।
• 132 स्थानों पर कार्य चल रहा है जो 30 मई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
• कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने सतलुज नदी के किनारे सभी परियोजनाओं का जायजा लिया और समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।











