Punjab Congress Crisis – पंजाब की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान सुर्खियों में है। शनिवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-4 स्थित विधायक रणा गुरजीत सिंह की रिहाइश पर पार्टी के पंजाब इंचार्ज भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी धड़े के करीब 45 नेताओं के बीच अहम बैठक हुई। मीटिंग से पहले चन्नी का एक रहस्यमयी बयान चर्चा में है: “उडीको अते देखो कि हवा किस पासे वगदी है।”
पंजाब कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ समय से चल रही गुटबाजी अब खुलकर सामने आ रही है। देखा जाए तो यह बैठक उसी नाराजगी को दूर करने की एक कोशिश मानी जा रही है, जो चन्नी धड़े और पार्टी हाईकमान के बीच लगातार बनी हुई है।
चंडीगढ़ में हुई इस मीटिंग में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर रंधावा, ओपी सोनी, परगट सिंह समेत कई बड़े चेहरे शामिल हुए। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि चन्नी धड़े के ये नेता अब तक बघेल की बैठकों से जानबूझकर दूरी बनाए हुए थे। शनिवार की यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह पहली बार है जब दोनों धड़ों के बीच सीधी बातचीत हो रही है।
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चन्नी का रहस्यमयी बयान, क्या है इशारा?
मीटिंग वाली जगह पर पहुंचने से पहले जब मीडिया ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से सवाल किया, तो उन्होंने कहा: “उडीको अते देखो कि हवा किस पासे वगदी है।” यानी इंतजार करो और देखो कि हवा किस तरफ बहती है। इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष का संकेत मान रहे हैं। समझने वाली बात यह है कि चन्नी ने साफ तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके लहजे से लगा कि पार्टी में कुछ बड़ा बदलाव होने वाला है।
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रणा गुरजीत की रिहाइश पर क्यों हुई बैठक?
कपूरथला से विधायक रणा गुरजीत सिंह को चन्नी धड़े का करीबी माना जाता है। उनकी चंडीगढ़ स्थित रिहाइश को तटस्थ जगह मानते हुए इस मीटिंग का आयोजन किया गया। रणा गुरजीत ने मीडिया से बात करते हुए कहा: “पिछली विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सभी नेता यहां आ गए हैं। हम अपनी बात भूपेश बघेल जी के सामने रखेंगे।”
दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान रणा गुरजीत के कारोबारी संस्थानों पर छापेमारी की खबर भी सामने आई। रणा ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि यह छापेमारी उस समय हुई जब कांग्रेसी विधायक उनकी रिहाइश पर इकट्ठे हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार राजनीतिक दबाव बनाने के लिए ऐसी कार्रवाइयां कर रही है।
बघेल लगातार कर रहे नेताओं से मुलाकात
पंजाब कांग्रेस के इंचार्ज और AICC जनरल सेक्रेटरी भूपेश बघेल पिछले पांच दिनों से चंडीगढ़ में डटे हुए हैं। वे अलग-अलग नेताओं से मिलकर पार्टी के मौजूदा हालात और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की उप नेता अरुणा चौधरी से भी मुलाकात की थी।
हालांकि, चन्नी धड़े के नेताओं ने इन बैठकों से अब तक दूरी बनाए रखी थी। शनिवार की यह मीटिंग इस नाराजगी को दूर करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।
45 से ज्यादा नेता पहुंचे मौके पर
रिपोर्ट लिखे जाने तक लगभग 45 कांग्रेसी नेता रणा गुरजीत की रिहाइश पर पहुंच चुके थे और भूपेश बघेल के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इस मीटिंग में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अलावा कई विधायक भी शामिल हुए। अगर गौर करें, तो यह संख्या इस बात का संकेत है कि चन्नी धड़े के पास पार्टी में काफी मजबूत समर्थन है।
क्या है पंजाब कांग्रेस की असली समस्या?
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई दिख रही है। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का धड़ा है, तो दूसरी ओर राज्य अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य नेताओं का समूह।
हाईकमान ने इस टकराव को सुलझाने के लिए भूपेश बघेल को पंजाब का इंचार्ज बनाया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। चन्नी धड़े का आरोप है कि उन्हें पार्टी में उचित सम्मान और भागीदारी नहीं मिल रही है।
परगट सिंह ने क्या कहा?
बैठक के बारे में बात करते हुए कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा: “वे (बघेल) पंजाब के जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज हैं। वे चर्चा करने के बाद स्थिति का मूल्यांकन करेंगे और पार्टी हाईकमान को जानकारी देंगे। जो भी फैसला लिया जाएगा, वह पार्टी के हित में होगा।”
यह बयान साफ करता है कि बैठक के बाद जो भी निर्णय होगा, वह दिल्ली में बैठे कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।
क्या होगा इस बैठक का नतीजा?
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मीटिंग के बाद पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी खत्म होती है या नहीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर बघेल चन्नी धड़े की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हैं और हाईकमान उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी देता है, तो स्थिति सुधर सकती है।
लेकिन अगर यह बैठक भी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई, तो पंजाब में कांग्रेस की हालत और खराब हो सकती है। खासकर तब, जब राज्य में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार है और विपक्ष के तौर पर कांग्रेस को एकजुट रहने की सख्त जरूरत है।
मुख्य बातें (Key Points):
- पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी दूर करने के लिए चंडीगढ़ में अहम बैठक हुई
- चन्नी धड़े के 45 से ज्यादा नेता रणा गुरजीत की रिहाइश पर पहुंचे
- भूपेश बघेल पिछले 5 दिनों से नेताओं से लगातार मुलाकात कर रहे हैं
- चन्नी ने बैठक से पहले रहस्यमयी बयान दिया: “हवा किस तरफ बहती है, देखो”
- पार्टी हाईकमान को बैठक के बाद रिपोर्ट भेजी जाएगी













