पंजाब कांग्रेस कैप्टन और सिद्धू में बंटी, मामला सुलझाने के लिए आलाकमान ने तीन सदस्यीय पैनल का किया गठन

चंडीगढ़, 24 मई

पंजाब कांग्रेस पार्टी में मानो भूचाल सा आ गया है। राज्य में विधानसभा चुनाव से एक साल पहले कांग्रेस की अंदरूनी कलह दिन प्रति दिन गंभीर ही होती जा रही है। ऐसे में पार्टी के विवाद को खत्म करने के लिए कांग्रेस आलाकमान को आगे आना पड़ा है। आलाकमान ने तय किया है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक कमेटी बनाई जाएगी, जो कि राज्य में पार्टी इकाई की सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हुए कदम उठाएगी। खबर ये भी है कि पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी राज्य के सभी कांग्रेस विधायकों और सांसदों के साथ बैठक भी कर सकते हैं। इसके अलावा वह राज्य इकाई के अध्यक्ष और जिला नेताओं के अलावा 37 पार्टी नेताओं से भी मिल सकते हैं, जो पिछले विधानसभा चुनावों में हार गए थे।

दरअसल कांग्रेस की पंजाब इकाई के बीच की लड़ाई दो दलों में बंट गई है। एक में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह तो दूसरी ओर नवजोत सिंह सिद्धू समेत अन्य नेता नजर आ रहे हैं। पिछले महीनों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के बाद से राज्य कांग्रेस इकाई में ज्यादा तनातनी देखी गई। इसमें मुख्यमंत्री ने खुले तौर पर अपनी ही पार्टी के सहयोगी और वर्तमान में उनके ‘बड़े आलोचक’ नवजोत सिंह सिद्धू को उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी।
इसके अलावा कुछ मंत्रियों, सांसदों और यहां तक कि विधायकों सहित पार्टी के कई शीर्ष नेता बेअदबी के मामलों में दोषियों को दंडित करने में अपनी विफलता पर पार्टी की अपनी सरकार पर सवाल उठाने के लिए सामने आए। जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, पर्यटन मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, लुधियाना के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह डुल्लो, वरिष्ठ कांग्रेस विधायक परगट सिंह समेत अन्य ने सरकार की खुलकर आलोचना की, वहीं दूसरी ओर सिद्धू ने सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए आलोचनात्मक ट्वीट्स के साथ इंटरनेट पर हमला जारी रखा।
इसके बाद बंद कमरे में कई बैठकें हुईं, जिसके बाद सिद्धू के खिलाफ विजिलेंस जांच, चन्नी के खिलाफ एक पुराने मामले को फिर से खोलने की खबरें सामने आईं, जबकि परगट सिंह ने सीएम के राजनीतिक सलाहकार पर उन्हें जांच की धमकी देने का आरोप लगाया। मामला शांत होने तक पार्टी आलाकमान ने नेताओं से संयम बरतने और एक-दूसरे के खिलाफ मीडिया में न जाने को कहा है। दूसरी ओर कथित तौर पर मुख्यमंत्री से शांति बनाए रखने के लिए भी कहा है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, आलाकमान की सब पर नजर है। नेता ने कहा कि यह एक संगठनात्मक मुद्दा है और आलाकमान सही समय पर इस पर फैसला करेगा। यह पता चला है कि आलाकमान ने तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया है, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और पार्टी के राज्य मामलों के प्रभारी हरीश रावत शामिल हैं, जो राज्य में मौजूदा संकट को देखते हैं।
उधर, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हस्तक्षेप पर गठित समिति, सांसदों, विधायकों, जिला इकाई प्रमुखों और राज्य अध्यक्ष सहित पार्टी नेताओं के साथ आमने-सामने बैठक करने के लिए राज्य का दौरा करेगी। इसके बाद स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को सौंपी जाएगी। दरअसल इससे पहले पैनल विधायकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक करना चाहता था, लेकिन गोपनीयता का हवाला देते हुए कुछ आपत्तियों के बाद एक-एक बैठक करने का निर्णय लिया गया।

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