Punjab Assembly Special Session: 1 मई को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। लेकिन शिरोमणी अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि यह सत्र मजदूरों और कर्मचारियों के मुद्दों को हल करने के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ राजनीतिक स्टंट और प्रचार के लिए है।
चंडीगढ़, 29 अप्रैल – मजीठिया ने कहा कि पंजाब में एक बार फिर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। भगवंत मान सरकार 1 मई को लेबर डे पर बैठक बुलाएगी।
देखा जाए तो यह साफ हो गया है कि यह सत्र मजदूरों, कर्मचारियों और आम लोगों के मुद्दों को हल करने के लिए नहीं है, बल्कि सिर्फ राजनीतिक स्टंट और प्रचार अभियान के लिए मंच तैयार करने की कोशिश है। जहां दर्शक पंजाबी होंगे और भगवंत मान मंच पर “ऑपरेशन लोटस” का नारा लगाते दिखेंगे।
कानून व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति
लेकिन यह सत्र ऐसे समय में बुलाया जा रहा है जब पंजाब में कानून व्यवस्था डगमगा गई है। पंजाब गैंगलैंड बना हुआ है और अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है और ड्रग्स का खतरा लगातार फैल रहा है।
आम लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन इन गंभीर मुद्दों पर सोचने के बजाय भगवंत सरकार सिर्फ अपनी राजनीतिक कहानी बनाने में लगी हुई है। मकसद साफ है – पंजाबियों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाना।
ऑपरेशन लोटस की असलियत
समझने वाली बात यह है कि सबसे हैरानी की बात यह है कि इस सत्र का नाम मजदूरों के नाम पर रखा जा रहा है, लेकिन असल में चर्चा “ऑपरेशन लोटस” जैसे राजनीतिक ड्रामे पर होने वाली है। और ऑपरेशन लोटस को लेकर एक प्रस्ताव भी पास किया जाएगा।
पिछली बार भी पंजाब के खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे और सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट किया गया था, जिसका नतीजा शून्य रहा।
बिक्रम मजीठिया ने आगे कहा कि ऑपरेशन लोटस का केस दर्ज करवाने वाले सीतल अंगुराल खुद अब BJP का हिस्सा बन गए हैं। 5-5 करोड़ की कहानियां, DGP ऑफिस के चक्कर और FIR की हेडलाइन – यह सब सिर्फ मीडिया प्रबंधन का हिस्सा था, जिसकी असली सच्चाई सामने आ गई है।
भगवंत मान पंजाबियों को बताएं कि इतने सालों में ऑपरेशन लोटस के बारे में दर्ज FIR की जांच में क्या सामने आया।
खजाने की नाजुक स्थिति
तब भी विधानसभा सत्र पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए और अब 1 मई को भगवंत मान पंजाबियों के खजाने से करोड़ों रुपये खर्च करने जा रहे हैं। जबकि खजाने की हालत बहुत नाजुक हो गई है और पंजाब 5 लाख करोड़ के कर्ज की ओर बढ़ता जा रहा है।
अगर गौर करें तो उन्होंने आगे कहा कि पंजाब के लोगों को अब बेवकूफ समझना बंद कर देना चाहिए। सरकार को सीधे जवाब देना चाहिए कि क्या यह सारा ड्रामा दिल्ली के इशारे पर हो रहा है? क्योंकि आपकी मजबूरी मुख्यमंत्री की कुर्सी है, यह दिल्ली वालों के इशारे पर चलती है।
कर्मचारियों के DA का सवाल
अगर भगवंत मान सरकार सच में मजदूरों और कर्मचारियों को लेकर गंभीर है, तो उन्हें सिर्फ लेबर डे के दिन सत्र बुलाने के बजाय ठोस फैसले लेने चाहिए।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार, कर्मचारियों के DA की किश्तों और बकाया राशि के भुगतान के लिए कम से कम ₹16,000 करोड़ का ऐलान करना चाहिए। और 30 जून तक इसके पूरे भुगतान की विधानसभा में गारंटी देनी चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि आपके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल अक्सर अपने नाम की गारंटी देते हैं, जिससे अब आप और अरविंद केजरीवाल भाग रहे हैं। आप कर्मचारियों के बारे में क्या सोचते हो, इसका पता चलेगा विधानसभा के अंदर।
शिक्षा क्रांति की असलियत
इसके साथ ही, शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार की नाकामियां सामने आ रही हैं। जिस “शिक्षा क्रांति” का डंका बज रहा था, उसकी असलियत खुद मुख्यमंत्री के बयानों से सामने आ गई है।
जिसमें मुख्यमंत्री मान रहे हैं कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय मिड-डे मील की जिम्मेदारी दी जा रही है। और पंजाब के स्कूलों के आंगन में सांड और भैंसें घूम रही हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जिससे साफ है कि पंजाबियों को सिर्फ विज्ञापनों में ही स्कूलों को दिखाया गया और असल सच्चाई मुख्यमंत्री ने आप बता दी।
ड्रग्स के खिलाफ जंग का सच
इसके अलावा उन्होंने आगे कहा कि ड्रग्स के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की असलियत भी सवालों के घेरे में है। सरकार के अपने डेटा के मुताबिक, 1 मार्च 2025 को शुरू किए गए “ड्रग्स के खिलाफ जंग” अभियान के दौरान 43,317 FIR दर्ज की गईं और 61,142 ड्रग पेडलर गिरफ्तार किए गए।
इसके बावजूद सवाल उठता है कि अगर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है, तो फिर ड्रग अब भी इतनी आसानी से क्यों बिक रहा है? हर दिन मौतें क्यों हो रही हैं? जिसको लेकर हर पंजाबी चिंतित है।
बिजली संकट का मुद्दा
बिक्रम मजीठिया ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री इस सत्र में पंजाब के लोगों को बताएं कि जब मुख्यमंत्री भगवंत मान मंचों पर कहते थे कि पंजाब पावर कट फ्री हो गया है और अब बल्ब का भचका भी नहीं बजेगा, लेकिन हालात और खराब हो गए हैं।
न किसानों को बिजली मिल रही है, न व्यापारियों को, न उद्योगपतियों को। आम लोगों को भारी कटौती का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भगवंत मान अपने मजाक में बिजी हैं।
निष्कर्ष
समझने वाली बात यह है कि ऊपर बताई गई बातें साबित करती हैं कि एक तरफ कानून-व्यवस्था फेल हो रही है, दूसरी तरफ ड्रग्स नियंत्रण से बाहर हैं, और तीसरी तरफ सरकार सिर्फ विज्ञापन और प्रचार में व्यस्त है। जिससे पंजाबियों को आसानी से अंदाजा हो जाना चाहिए कि सरकार उनके मुद्दों को लेकर कितनी गंभीर है।
मुख्य बातें (Key Points):
- 1 मई को विशेष विधानसभा सत्र, मजीठिया ने बताया राजनीतिक स्टंट
- ऑपरेशन लोटस पर प्रस्ताव, लेकिन FIR जांच में कुछ नहीं मिला
- कर्मचारियों के ₹16,000 करोड़ DA का भुगतान लंबित
- ड्रग्स के खिलाफ 43,317 FIR के बावजूद मौतें जारी
- बिजली कटौती से हर वर्ग परेशान













