Punjab AAP Crisis गहराता जा रहा है। राज्यसभा के सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के तुरंत बाद अब पंजाब में भी बड़ा राजनीतिक तूफान आने की आशंका है। आम आदमी पार्टी हरियाणा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने बड़ा दावा किया है कि आने वाले दिनों में पंजाब के करीब 28 विधायक भी आम आदमी पार्टी छोड़ सकते हैं।
अगर ऐसा हुआ तो यह भगवंत मान की सरकार के लिए सबसे बड़ा झटका होगा। पंजाब विधानसभा में 117 सीटें हैं और AAP के पास फिलहाल बहुमत है। लेकिन 28 विधायकों के जाने से सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगेंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने के बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल मच गया है।
नवीन जयहिंद का बड़ा दावा
नवीन जयहिंद ने साफ कहा है कि जो सांसद पार्टी छोड़कर गए हैं, उनमें से कई के साथ पहले दुर्व्यवहार हुआ, कई के साथ मारपीट भी हुई और दबाव बनाया गया।
दिलचस्प बात यह है कि जयहिंद ने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पार्टी के अंदर गंभीर खींचतान चल रही है। उनके 28 विधायकों वाले दावे ने पंजाब की राजनीति का तापमान और बढ़ा दिया है।
उनके इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सभी पार्टियां इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
सिसोदिया की सक्रियता, दिल्ली में मीटिंग्स का दौर
समझने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी में हलचल बढ़ गई है। AAP के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया कल ही गुजरात से लौटे थे, जिसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट से सीधे वह AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचे थे।
शनिवार सुबह ही पंजाब के मंत्री डॉ. बलवीर सिंह ने दिल्ली में सिसोदिया से मुलाकात की। डॉ. बलवीर सिंह ने कहा कि पंजाब में बीजेपी ‘ऑपरेशन लोटस’ चला रही है। सांसदों ने पंजाब से विश्वासघात किया।
यह मीटिंग्स का दौर साफ इशारा करता है कि पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने की पूरी कोशिश में जुटा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या विधायकों को रोका जा सकेगा?
हरपाल चीमा का बड़ा ऐलान: दलबदल कानून के तहत कार्रवाई
देखा जाए तो AAP की रणनीति साफ दिख रही है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी जल्द राज्यसभा के सभापति को पत्र देगी और दलबदल कानून के तहत राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल की सदस्यता खत्म करने की मांग करेगी।
इसके लिए सांसद संजय सिंह उपराष्ट्रपति को ज्ञापन देंगे। चीमा ने यह भी दावा किया कि सिर्फ 3 ही सांसद भाजपा में गए हैं। 2 सांसदों स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता के फर्जी साइन किए गए हैं।
यह आरोप अगर सच साबित हुआ तो यह मामला और गंभीर हो जाएगा। AAP का कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश है पार्टी को कमजोर करने की।
ऑपरेशन लोटस का आरोप, भाजपा पर निशाना
अगर गौर करें तो AAP लगातार यह आरोप लगा रही है कि बीजेपी ने ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाया है। यह वही तरीका है जिसमें विपक्षी दलों के विधायकों और सांसदों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल किया जाता है।
पंजाब के मंत्री बलवीर सिंह ने साफ कहा कि यह पंजाब से विश्वासघात है। लेकिन दूसरी तरफ बीजेपी का कहना है कि लोग AAP की तानाशाही और आंतरिक कलह से तंग आकर खुद ही पार्टी छोड़ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर 28 विधायक वाकई पार्टी छोड़ते हैं तो यह भारतीय राजनीति में एक बड़ी घटना होगी। पंजाब में AAP ने 2022 में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की थी।
भगवंत मान सरकार पर संकट के बादल?
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। बहुमत के लिए 59 सीटों की जरूरत होती है। AAP के पास फिलहाल 92 सीटें हैं। अगर 28 विधायक चले जाते हैं तो AAP के पास सिर्फ 64 सीटें बचेंगी।
लेकिन यहां दलबदल कानून का पेच है। अगर एक तिहाई से कम विधायक पार्टी छोड़ते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है। इसलिए अगर 28 विधायक एक साथ जाते हैं (जो कुल संख्या का करीब 30% है) तो वे दलबदल कानून से बच सकते हैं।
यह एक बहुत ही नाजुक स्थिति है। अगर ऐसा होता है तो पंजाब में सरकार गिर सकती है और राष्ट्रपति शासन या मध्यावधि चुनाव की स्थिति बन सकती है।
AAP के भीतर असंतोष क्यों बढ़ा?
समझने वाली बात यह है कि आखिर AAP के भीतर इतना असंतोष क्यों है? नवीन जयहिंद के बयान से कुछ संकेत मिलते हैं।
उनका कहना है कि कई नेताओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ, मारपीट हुई और दबाव बनाया गया। यह एक गंभीर आरोप है। अगर यह सच है तो यह पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल खड़े करता है।
दूसरा, दिल्ली और पंजाब के बीच नेतृत्व का मुद्दा भी है। कई पंजाब के नेताओं को लगता है कि निर्णय दिल्ली से थोपे जाते हैं और स्थानीय नेतृत्व को महत्व नहीं दिया जाता।
तीसरा, टिकट वितरण और मंत्री पदों को लेकर भी असंतोष की खबरें आती रही हैं। कई विधायक नाराज हैं कि उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल रहा।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे क्या होगा? क्या वाकई 28 विधायक पार्टी छोड़ेंगे? या यह सिर्फ एक डराने की रणनीति है?
AAP की तरफ से सिसोदिया और केजरीवाल की सक्रियता बताती है कि पार्टी इस संकट को गंभीरता से ले रही है। दलबदल कानून का सहारा लेना भी एक रणनीति है।
लेकिन अगर असंतोष वाकई गहरा है तो सिर्फ कानूनी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। पार्टी को अपने विधायकों से बात करनी होगी, उनकी शिकायतें सुननी होंगी।
अगले कुछ दिन पंजाब की राजनीति के लिए बेहद अहम होंगे।
मुख्य बातें
• AAP हरियाणा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने दावा किया कि पंजाब के 28 विधायक AAP छोड़ सकते हैं
• राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद पंजाब में भी उथल-पुथल
• पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल और पंजाब के मंत्रियों से मुलाकात की, डैमेज कंट्रोल की कोशिश
• वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा दलबदल कानून के तहत सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की जाएगी
• अगर 28 MLA पार्टी छोड़ते हैं तो भगवंत मान सरकार पर संकट आ सकता है












