Project Jeevan Jyot Success: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में बच्चों को भीख मांगने जैसी गंभीर सामाजिक बुराई से मुक्त कर उन्हें बेहतर भविष्य प्रदान करने के उद्देश्य से पंजाब के सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आज मगसीपा, सेक्टर-26, चंडीगढ़ में “प्रोजेक्ट जीवनजोत – भीख मांगने में शामिल बच्चों के बचाव एवं पुनर्वास” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
देखा जाए तो इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। प्रोजेक्ट जीवनजोत के अंतर्गत अब तक 1163 बच्चों को रेस्क्यू कर शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ा जा चुका है।
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भीख मांगना नियति नहीं, मजबूरी है
अपने संबोधन में डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि “प्रोजेक्ट जीवनजोत केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बच्चों को शोषण और मजबूरी के चक्र से बाहर निकालकर उन्हें नई संभावनाओं से जोड़ने का एक सामाजिक अभियान है।”
अगर गौर करें तो उन्होंने कहा कि भीख मांगना किसी बच्चे की नियति नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक मजबूरियों का परिणाम है। ऐसे बच्चों को अवसरों और सुरक्षित वातावरण से जोड़ना पंजाब सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
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2067 विशेष जांच अभियान, 1163 बच्चे रेस्क्यू
कैबिनेट मंत्री ने परियोजना की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि जुलाई 2024 से अब तक पूरे पंजाब में 2067 विशेष जांच एवं बचाव अभियान चलाए गए हैं, जिनके दौरान 1163 बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके अतिरिक्त 15 बच्चों के DNA परीक्षण करवाकर उन्हें उनके परिवारों से मिलाया गया। रेस्क्यू किए गए 409 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया, 54 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ दिया गया तथा 15 बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा गया।
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शोषण, बाल श्रम और तस्करी का खतरा
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि भीख मांगने वाले बच्चे अक्सर शोषण, बाल श्रम, मानव तस्करी, नशे और आपराधिक गतिविधियों जैसे गंभीर खतरों का सामना करते हैं। इसलिए ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
समझने वाली बात यह है कि इस अवसर पर डॉ. बलजीत कौर ने प्रोजेक्ट जीवनजोत के लाभार्थी बच्चों और उनके परिवारों से बातचीत कर उनके अनुभव भी सुने। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट जीवनजोत पर तैयार की गई आधिकारिक डॉक्यूमेंट्री भी जारी की।
केवल रेस्क्यू नहीं, मुख्यधारा में शामिल करना लक्ष्य
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. शेना अग्रवाल ने कहा कि प्रोजेक्ट जीवनजोत का उद्देश्य केवल बच्चों को भीख मांगने से मुक्त कराना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और विकास के अवसर प्रदान कर समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों, पुलिस, मीडिया और समाज के सहयोग से यह अभियान लगातार मजबूत हो रहा है और बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे रहा है।
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मानसिक और भावनात्मक प्रभाव पर चर्चा
कार्यशाला में पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के मनोविज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो. दमनजीत संधू ने भीख मांगने में शामिल बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक और भावनात्मक प्रभावों तथा उनकी काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
हरियाणा के पूर्व DGP श्री K.P. सिंह ने बच्चों के खिलाफ मानव तस्करी और संगठित भिक्षावृत्ति जैसे अपराधों की रोकथाम के लिए आवश्यक कदमों पर अपने विचार साझा किए।
अंतर-विभागीय समन्वय जरूरी
कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बाल भिक्षावृत्ति की समस्या का स्थायी समाधान सरकार, समाज, परिवारों, स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयासों से ही संभव है।
अगर गौर करें तो डॉ. बलजीत कौर ने विश्वास दिलाया कि पंजाब सरकार बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि हर बच्चा सड़कों पर नहीं, बल्कि स्कूलों में और अपने सपनों को साकार करने का अधिकार रखता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- जुलाई 2024 से 2067 बचाव अभियान चलाए गए
- 1163 बच्चों को रेस्क्यू किया गया
- 409 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया
- 15 बच्चों के DNA टेस्ट कराकर परिवार से मिलाया
- प्रोजेक्ट जीवनजोत की डॉक्यूमेंट्री लॉन्च की












